राजधानी में हर साल की तरह इस साल भी प्रोफेसर कालोनी, कालीबाड़ी, नेहरूनगर, शांति नगर. त्रिमूर्ति नगर, बोरियाखुर्द, बोरियाकला, भाठागांव, काठीडीह, राजेंद्रनगर समेत 22 वार्डों के हजारों लोगों का बारिश में परेशान होना तय है। इन इलाकों में बारिश का पानी भरने की वजह से लोगों का अपने ही घरों में आना-जाना मुश्किल हो जाता है। बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले 11 साल में तीन महापौर ने इन सभी जगहों का दौरा किया और वादा किया था कि बारिश का पानी नहीं भरेगा। लेकिन एक भी महापौर अपना वादा पूरा नहीं कर पाए। शहर में जिन इलाकों में पानी भरता है अब वहां के लोगों ने निगम और प्रशासन से किसी भी तरह की मदद मिलने की उम्मीद भी छोड़ दी है। उनका कहना है कि जो काम 11 साल में नहीं हुआ वो अब बारिश आने पर क्या होगा। शहर में जब भी अच्छी बारिश होगी इन सभी इलाकों में पानी भरना शुरू हो जाएगा। कई घंटों बाद तक पानी नीचे नहीं उतरता है। कई बार तो लोगों के घरों में इतना पानी भर जाता है कि घर के सामान तैरने लगते हैं। दैनिक भास्कर ने अपनी पड़ताल में पाया कि डॉ. किरणमयी नायक, प्रमोद दुबे, एजाज ढेबर और मीनल चौबे किसी के भी कार्यकाल में जलभराव की समस्या खत्म नहीं हो पाई। जलभराव की समस्या को लेकर निगम के महापौर या कमिश्नर कितने गंभीर होते हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ऐन मानसून के दस्तक के समय फरिश्ता कांप्लेक्स के सामने नाला बनाने का शुरू किया गया है। मानसून खत्म होने के बाद भी नाला बनाने का काम पूरा नहीं हो पाएगा। तेज बारिश होते ही सड़कों पर भरता है पानी, घरों में कैद हो जाते हैं लोग… अब मानसून सिर पर कुशालपुर इलाके से और प्रोफेसर कॉलोनी की ओर से नालों का पानी एक साथ आकर एक ही चेंबर में मिलकर चिंगरी नाला में जाता है। लेकिन ढलान होने के कारण प्रोफेसर कॉलोनी का पानी रिवर्स होकर जलभराव का कारण बनता है। जिन पर जिम्मेदारी थी उन्होंने नहीं किया काम, अब भास्कर से बोले… नाला निर्माण कराया, समस्या कम रही: प्रमोद पूर्व महापौर प्रमोद दुबे का दावा है कि उनके कार्यकाल में नाला निर्माण कराया गया। इससे शहर में पानी भरने की समस्या सबसे कम रही। अभी प्रोफेसर कालोनी में लगातार आबादी बढ़ने के साथ यह समस्या बड़ी हो गई है। अशोक लीलैंड के सामने के चैंबर से मिलकर रिंग रोड के पार नाले से जुड़ता है। पिछले साल जलभराव की स्थिति गंभीर थी, क्योंकि नालियों की सफाई नहीं हुई। NH ने पाइप पुशिंग की अनुमति नहीं दी: एजाज मेरे कार्यकाल में काम होने की वजह से ही जयस्तंभ चौक पर अब जलभराव नहीं होता। शांति नगर, शंकरनगर की समस्या भी कम हो गई है। प्रोफेसर कालोनी की समस्या के लिए रिंग रोड पाइप पुशिंग का प्लान था, लेकिन एनएचएआई से समय पर एनओसी ही नहीं मिली। भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार है। बावजूद इसके महापौर अभी तक एनएचआई से एनओसी नहीं मिली। नाले बनाए गए, कम होगी समस्या: मीनल मानसून आने के पहले ही शहर के सभी बड़े नालों की सफाई हो चुकी है। प्रोफेसर कालोनी की समस्या खत्म करने तीन करोड़ खर्च कर नाले बनवाए गए हैं। इस साल काफी हद तक जलभराव कम रहेगा। रिंग रोड पर पाइप पुसिंग के लिए 1.62 करोड़ का प्रस्ताव एनएचआई से एनओसी नहीं मिलने की वजह से रुका है। काली मंदिर के पीछे बड़ा नाला बनवा रहे हैं, इससे राहत मिलेगी। भास्कर एक्सपर्ट – मनीष पिल्लीवार, टाउन प्लानर अर्बन फ्लड रोकने ओरिएंटेड प्लान बनाने की जरूरत
अर्बन फ्लड रोकने ओरिएंटेड प्लान और उसे सख्ती से लागू करने की जरूरत है। नाली का कनेक्शन, स्लोप और क्लोज एकदम सटीक होना चाहिए। नालियों का कनेक्शन सही नहीं होने की वजह से ही फ्लो बिगड़ता है। सही दिशा में स्लोप नहीं होने से नालियों का पानी सड़कों पर आ जाता है। ओपन नाली के चलते वह डस्टबिन बनकर रह जाती है। तालाबों का अच्छा इंटर कनेक्शन होना भी जरूरी है। इसे टुकड़ों में करने के बजाय बड़ा प्लान बनाकर काम करना चाहिए। तभी शहर से जलभराव की समस्या कम होगी।
