बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे और लगातार मिल रही सुरक्षा बलों की सफलताओं के बीच एक तस्वीर ऐसी भी है, जो विकास कार्यों के सामने खड़ी चुनौतियों की कहानी बयां करती है। इंद्रावती नदी पर बेदरे में बन रहा अंतरराज्यीय पुल पिछले छह साल से अधूरा पड़ा है, लेकिन इसकी सुरक्षा में आज भी 100 से अधिक जवान 24 घंटे तैनात हैं। साल 2020-21 में शुरू हुई यह महत्वाकांक्षी पुल परियोजना नक्सली विरोध के चलते बीच में ही रुक गई थी। निर्माण शुरू होने के कुछ समय बाद ही नक्सलियों ने ठेकेदार के सुपरवाइजर और एक कर्मचारी का अपहरण कर लिया था। घटना के बाद ठेकेदार ने काम बंद कर दिया और तब से पुल अधूरा ही खड़ा है। करीब 930 मीटर लंबे इस पुल के लिए 38 पिलर प्रस्तावित हैं, जिनमें से केवल 8 ही बन पाए हैं। पहले इसकी लागत 42 करोड़ रुपए थी, लेकिन निर्माण कार्य रुकने और डिजाइन संबंधी संशोधनों के बाद शेष कार्य की लागत लगभग 28 करोड़ रुपए बढ़ गई है। 50 से ज्यादा गांव के लोग परेशान: पुल अधूरा होने का सबसे बड़ा खामियाजा आसपास के ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। इंद्रावती नदी के दोनों ओर बसे 50 से अधिक गांवों के लोग आज भी नाव और अस्थायी साधनों के भरोसे आवाजाही करते हैं। बारिश के बाद फिर शुरू होगा निर्माण
बेदरे पुल के लिए री-टेंडर प्रक्रिया और रेट अप्रूवल पूरा हो चुका है। जल्द ही ठेकेदार को वर्क ऑर्डर जारी किया जाएगा। बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर दिया जाएगा। – विश्वदीप, बीजापुर कलेक्टर
