पुराने दफ्तरों में जगह की कमी से जूझ रही मेडिकल, डेंटल, फार्मेसी, नर्सिंग और पैरामेडिकल काउंसिलों में सिस्टम ठीक करने इन्हें नवा रायपुर शिफ्ट किया जा रहा है। लेकिन आयुष विश्वविद्यालय की बिल्डिंग में शिफ्टिंग शुरू होते ही व्यवस्था की खामियां सामने आ गई हैं। अधिकांश काउंसिलों को इतनी कम जगह मिली है कि रिकॉर्ड रखने और कर्मचारियों को बैठाने में ही मुश्किल आ रही है। अब काउंसिल के जिम्मेदार तय नहीं कर पा रहे हैं रिकार्ड की आलमारी कहां रखें और स्टाफ को कहां बिठाएं। ज्यादातर काउंसिल अब तक निजी भवनों और बंगलों में संचालित हो रही थीं। मेडिकल काउंसिल तो लाखों रुपए मासिक किराया देने के बावजूद दो कमरों में चल रही थी, जबकि पैरामेडिकल काउंसिल की स्थिति सबसे खराब मानी जाती रही है। उसका पूरा कार्यालय एक कमरे में संचालित होता है और कमरा रिकॉर्ड व फाइलों से भरा हुआ है। यही वजह थी कि शासन ने सभी काउंसिलों को एक स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। अभी तक डेंटल काउंसिल का कार्यालय तरह शिफ्ट हो चुका है। मेडिकल काउंसिल की शिफ्टिंग लगभग पूरी हो गई है और फार्मेसी काउंसिल की प्रक्रिया जारी है। इसी दौरान यह सामने आया कि अधिकांश काउंसिलों को उनकी जरूरत के मुकाबले काफी कम जगह आवंटित की गई है। पैरामेडिकल काउंसिल को छोड़ दें तो बाकी काउंसिलों में 12 से 15 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनके अलग-अलग रजिस्ट्रार हैं और वर्षों पुराने रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना जरूरी है। काउंसिलों के जिम्मेदारों का कहना है कि एक हजार वर्गफुट या उससे कम जगह में कर्मचारियों के बैठने, रिकॉर्ड रखने और कार्यालय संचालन की व्यवस्था करना आसान नहीं होगा। डेंटल काउंसिल को छोड़कर अन्य काउंसिलों ने अतिरिक्त स्थान की मांग भी की है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब मूल समस्या ही जगह की कमी थी तो शिफ्टिंग से पहले वास्तविक जरूरतों का आकलन क्यों नहीं किया गया। बड़े-बड़े हॉल मिले, लेकिन दफ्तर जैसा कोई सेटअप नहीं
आयुष विश्वविद्यालय परिसर में खाली पड़े तीन हॉल काउंसिल कार्यालयों के लिए आवंटित किए गए हैं। हालांकि इन हॉल में कार्यालय संचालन के लिए जरूरी कोई व्यवस्थित सेटअप नहीं है। केवल हॉल दे दिया गया है। अब काउंसिल को अपना अपना सेटअप बनाना है। फार्मेसी काउंसिल में अध्यक्ष के लिए ही नहीं बची जगह
पांचों काउंसिलों में केवल फार्मेसी काउंसिल में अध्यक्ष का पद है और परंपरागत रूप से उनका चेंबर काउंसिल कार्यालय में ही बनाया जाता है। लेकिन फार्मेसी काउंसिल को केवल करीब 1000 वर्गफुट जगह मिली है। काउंसिल में मौजूद स्टाफ के अलावा फार्मासिस्टों के रिकॉर्ड से भरी करीब तीन दर्जन आलमारियां भी हैं। ऐसे में कर्मचारियों और रिकॉर्ड के लिए ही पर्याप्त जगह नहीं बच रही है। सवाल यह है कि अध्यक्ष के लिए अलग चेंबर आखिर कहां बनाया जाएगा। नर्सिंग काउंसिल की शिफ्टिंग पर ही खड़े हो गए हैं सवाल
नर्सिंग काउंसिल का पूरा काम स्वास्थ्य संचालनालय में होता है। नर्सिंग सारी फाइल वहीं हस्ताक्षर के लिए जाती हैं। उसके बावजूद इस कार्यालय को आयुष विवि की बिल्डिंग में शिफ्ट किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का ही कहना है कि नर्सिंग काउंसिल के कार्यालय को नवा रायपुर में शिफ्ट करने के लिए सबसे बेहतर जगह स्वास्थ्य संचालनालय का भवन है। यहां ऊपरी फ्लोर में कमरे भी खाली हैं। इस वजह से शिफ्टिंग में दिक्कत नहीं होती। जिम्मेदार बोले- शुरू में दिक्कत होगी, फिर सब ठीक हो जाएगा शासन का निर्णय है कि सभी काउंसिल एक छत के नीचे हों। उसी के अनुरूप व्यवस्था की जा रही है। इससे छात्रों को राहत मिलेगी। रही मेरे चेंबर की बात तो उसके लिए जगह बन जाएगी।
-अरुण मिश्रा, अध्यक्ष, फार्मेसी काउंसिल अभी जितनी जगह उपलब्ध थी, वहां व्यवस्था की गई है। भविष्य में नए फ्लोर बनाए जाएंगे। वहां भी कक्ष दिए जाएंगे। शुरुआत के कुछ दिनों में तकलीफ होगी, लेकिन जल्द ही सिस्टम ठीक कर लिया जाएगा।
-डॉ. विवेक पात्रा, कुलपति, आयुष विश्वविद्यालय
