रेत माफिया द्वारा भाजपा नेता को जिंदा जलाए जाने के बाद रेत की लड़ाई फिर चर्चा में है। पूरा मामला रेत से होने वाली मोटी कमाई का ही है। इस कमाई के चलते ही रेतघाटों में सिंडिकेट अपना वर्चस्व बनाने में लगा रहता है। इसका ही असर यह होता है कि रेत की कीमतें लगातार बढ़ती चली जाती है। बाजार में रेत का रेट सिंडिकेट तय कर रहे हैं। मानसून में वैध घाट बंद होने के बावजूद बाजार में रेत की सप्लाई जारी है और इसकी कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। जानकारों के मुताबिक बिलासपुर में खपने वाली करीब 90 प्रतिशत रेत जांजगीर-चांपा और सक्ती जिले से आती है। आरोप है कि मई के अंतिम सप्ताह में 80 प्रतिशत सप्लाई को जानबूझकर कम किया गया। इसके बाद बाजार में कमी का माहौल बना और पहले से डंप की गई रेत ऊंचे दामों पर बेची जाने लगी। कुछ ही दिनों में रेत का दाम 18 से 20 हजार रुपए प्रति हाइवा से बढ़कर 30 हजार रुपए तक पहुंच गया। कई स्थानों पर 35 हजार रुपए तक की मांग की जा रही है। खनिज विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 175 वैध रेत खदानें चालू थीं, वहीं 150 नीलाम घाटों में से इस महीने 25 घाटों को पर्यावरण की स्वीकृति दी गई। जबकि गैर-मंजूरी वाले घाटों से अवैध उत्खनन की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। रेत के कारोबार में क्वालिटी के नाम पर भी अलग-अलग दरें वसूली जा रही हैं। महानदी की रेत को ‘छपाई वाली’ और बेहतर गुणवत्ता वाली बताकर महंगे दाम पर बेचा जाता है, जबकि अरपा की रेत को ‘पाटने वाली’ बताकर अलग श्रेणी में रखा जाता है। कारोबारियों का कहना है कि इसी आधार पर बाजार में मनमाने रेट तय किए जा रहे हैं। ट्रैक्टर से लेकर हाइवा तक सब महंगा
रेत की बढ़ती कीमतों का असर छोटे निर्माण कार्यों पर भी पड़ा है। पहले जो ट्रैक्टर रेत 1200 से 1400 रुपए में मिल जाती थी, वह अब 2200 से 2500 रुपए तक पहुंच गई है। वहीं हाइवा रेत के दाम 30 हजार रुपए तक पहुंच चुके हैं। ऐसे चलता है सिंडिकेट का खेल
आपूर्ति घटाकर बाजार में कमी का माहौल बनाया जाता है। दूसरी ओर रेत को बड़े पैमाने पर डंप किया जाता है। मांग बढ़ने पर यही रेत ऊंचे दामों पर बेची जाती है। कारोबार से जुड़े लोगों का दावा है कि इसी वजह से कुछ ही दिनों में प्रति हाइवा कीमत में 12 हजार रुपए तक की वृद्धि हुई है। रायगढ़: कागजों में प्रतिबंध, मांड नदी में हो रहा अवैध खनन कागजों में 10 जून से रेत खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू है। मानसून अवधि को देखते हुए जिले के सभी रेत घाटों पर खनन गतिविधियां थम जानी चाहिए। लेकिन रायगढ़ में मांड नदी के घाटों पर तस्वीर इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। यहां दिनदहाड़े नदी के भीतर मशीनें चल रही हैं और भारी वाहनों से रेत का अवैध परिवहन धड़ल्ले से जारी है। भास्कर टीम ने खरसिया क्षेत्र में मांड नदी के उसरौट, रानीगुड़ा और पनझर घाट का जायजा लिया। तीनों घाटों पर नदी के भीतर तक जाने के लिए बकायदा रैंप और रास्ते बने हुए मिले। मौके पर भारी वाहनों के टायरों के ताजा निशान और जेसीबी व पोकलेन जैसी प्रतिबंधित मशीनों के संचालन के साफ संकेत दिखाई दिए। घाटों से ट्रैक्टर और हाइवा लगातार रेत भरकर निकल रहे हैं, जिसे सीधे डंपिंग स्थलों तक पहुंचाया जा रहा है। अवैध खनन की पुष्टि के लिए भास्कर टीम ने पनझर घाट से निकलने वाले एक हाइवा को ट्रैक किया। वाहन सीधे धनागर स्थित डंपिंग यार्ड पहुंचा, जहां रेत खाली की गई। मौके पर मौजूद ड्राइवर ने नियमित रूप से घाट से यार्ड तक रेत परिवहन होने की जानकारी दी।
