छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बालोद जिले की सहायक शिक्षक पंचायत को बड़ी राहत देते हुए उनकी सेवा समाप्ति (बर्खास्तगी) का आदेश निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट ने माना कि विभाग ने अनुशासनात्मक कार्रवाई में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया और गलत प्रावधान के तहत बर्खास्तगी का आदेश पारित किया। बता दें कि याचिकाकर्ता शिक्षक ने पारिवारिक कारणों के चलते अवैतनिक अवकाश लिया था, जिसे स्वीकृत करने के बजाए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर दी गई। दरअसल, बालोद जिले की रहने वाली तस्लीम बानो की नियुक्ति वर्ष 2005 में सहायक शिक्षक पंचायत के रूप में शासकीय प्राथमिक शाला शिकारीटोला में हुई थी। वर्ष 2009 में उनका नियमितीकरण कर दिया गया था। पारिवारिक कारणों से उन्होंने 9 फरवरी 2015 को अवैतनिक अवकाश के लिए आवेदन दिया था। इसके बाद 4 नवंबर 2020 को व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए विकासखंड शिक्षा अधिकारी, डौंडीलोहारा को त्यागपत्र भी सौंपा। हालांकि, विभाग ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। इसके बजाय विभागीय जांच करते हुए 24 अगस्त 2021 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया। बर्खास्तगी आदेश को हाईकोर्ट में दी चुनौती तस्लीम बानो ने सीनियर एडवोकेट मतीन सिद्दीकी के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें तर्क दिया कि तस्लीम बानो वर्ष 2009 से नियमित कर्मचारी थीं। ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1999 के नियम-7 के तहत की जानी चाहिए थी। याचिका में यह भी कहा गया कि विभाग ने बिना उचित सुनवाई का अवसर दिए और गलत तरीके से नियम-10 के तहत कार्रवाई कर उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया, जो विधिसम्मत नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा- गलत नियम के तहत एक्शन दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि विभागीय कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया और लागू नियमों के अनुरूप नहीं थी। कोर्ट ने माना कि नियमित कर्मचारी के खिलाफ गलत नियम के तहत की गई कार्रवाई टिकाऊ नहीं है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत डौंडीलोहारा द्वारा जारी बर्खास्तगी आदेश को निरस्त करते हुए तस्लीम बानो की याचिका स्वीकार कर ली।
