मानसून सत्र का आज आखिरी दिन:अवि​श्वास प्रस्ताव पर होगी चर्चा, ध्यानाकर्षण में उठा पीएम मातृ वंदन योजना में भुगतान का मुद्दा

विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन सत्ता पक्ष ने पिछली सरकार की कार्यकाल में शुरू की गई योजनाओं और उसके खर्च को लेकर वित्तीय अनियमितताओं और बिजनेस रूल्स के पालन नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया। भाजपा के विधायक अजय चंद्राकर ने पूर्व सरकार के मुखिया को संदर्भित करते हुए पूछा कि बिना संचालन के लिए कोई सेटअप तय किए, तीन योजनाओं पर 200 करोड़ खर्च कर दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि क्या आउटसोर्सिंग पर देने के लिए इतनी भारी रकम खर्च की गई। कांग्रेस के विधायक राघवेंद्र सिंह ने ज्ञान भारतम योजना के तहत मल्हार ताम्रपत्र को लेकर केंद्र और राज्य की ओर से दी गई अलग-अलग जानकारी का मुद्दा उठाया। साथ ही गलत जानकारी देने वाले अफसरों पर कार्रवाई की मांग की। इसपर विभागीय मंत्री ने कहा कि कार्रवाई करेंगे। विधानसभा में प्रश्नकाल की कार्रवाई के प्रमुख अंश इस प्रकार हैं:- सेवा ग्राम, इंटरनेशनल स्कूल और टेनिस अकादमी के संचालन पर सवाल मंत्री से, लेकिन योजना बनाने वाली पिछली सरकार को घेरा अजय: रायपुर में सेवाग्राम, इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूल, टेनिस अकादमी के लिए करोड़ों की स्वीकृति। सेवाग्राम पर 104 करोड़ रुपए खर्च किया गया। इनका क्या किया जाएगा? कैसे संचालन होगा? राम राज्य के उल्लेख का अभिप्राय और उद्देश्य क्या है?
ओपी: सेवाग्राम पिछली सरकार की योजना है। फाइलों में सारी चीजें देखा, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं मिली। हमारी सरकार आने के बाद हमने देखा कई काम अधूरे हैं, उन्हें जल्द पूरा कराने का प्रयास किया। देश के ख्यातिलब्ध संस्थाओं से इन्हें चलाने के लिए संपर्क करेंगे।
अजय: इन तीन योजनाओं पर 50 करोड़, 27 करोड़ और 129 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ। चलाने का कोई कांसेप्ट नहीं। क्या आउटसोर्सिंग में देने के लिए इतना खर्च किया गया। क्या यह अनियमितता की श्रेणी में नहीं आता? वित्तीय अनियमितता और बिजनेस रूल का उल्लंघन नहीं है?
ओपी: निश्चित तौर पर लोकधन के व्यय का आउटपुट मिलना चाहिए। हम इसके बेहतर संचालन के लिए काम करेंगे।
अजय: यह बताइए कार्रवाई बनती है या नहीं। नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
ओपी: मैं इस संबंध में रूल्स उपलब्ध करा दूंगा।
अजय: मुझे नहीं, सदन को जानकारी उपलब्ध कराएं। क्या कार्रवाई करेंगे?
ओपी: यह सब पिछली सरकार का है। हमारी सरकार में बेस्ट करेंगे।
अजय: बिना सेटअप योजना पर 200 करोड़ खर्च। एक व्यक्ति की इच्छा, स्वेच्छाचारिता पर क्या इतना खर्च किया जा सकता है?
ओपी: जो भी रूल्स हैं, उपलब्ध कराउंगा। रूल्स वॉयलेशन ना हो, इसके लिए प्रयास करेंगे। बेहतर संचालन की व्यवस्था करेंगे। सेवा ग्राम के लिए एनआरडीए, टेनिस अकादमी के लिए खेल विभाग और इंटरनेशनल स्कूल के लिए शिक्षा विभाग संचालन के संबंध में निश्चित तौर पर चिंता करेगा। बोलने उठे भूपेश को अजय ने टोका, बोले-बीच में क्यों बोल रहे भूपेश: माननीय अध्यक्ष महोदय बात स्वेच्छाचारिता और एक व्यक्ति की इच्छा पर है…..। अजय: आप क्यों बोल रहे हैं बीच में। भूपेश: आप कौन होते हैं टोकने वाले, मैं अध्यक्ष की अनुमति से बोल रहा हूं। अजय: आप क्यों स्पष्टीकरण दे रहे हैं, मेरा प्रश्न चल रहा है, आप किस प्रक्रिया में बोल रहे हैं, मैं मंत्री से जवाब चाहता हूं। महंत: (चंद्राकर को संबोधित करते हुए) अभी उनके (भूपेश) चाचा को अपना गुरु बता रहे थे और अब दुश्मन हो गए। राघवेंद्र ने ताम्रपत्र की जानकारी पर विभाग से मांगी रिपोर्ट, भाषा ब्राह्मी-संस्कृत या ब्राह्मी-पाली राघवेंद्र: ज्ञान भारतम अभियान के तहत क्या ताम्रपत्र भी पांडुलिपि के दायरे में आता है। राजेश: ताम्रपत्र पहले पांडुलिपि में नहीं आता था, लेकिन डा. अहमद खान ने 18 जनवरी 1987 को कृषकों से मल्हार का ताम्रपत्र प्राप्त किया था। उन्होंने रघुनंदन प्रसाद पांडे को दिया। उस समय यह पांडुलिपि में नहीं आया था, लेकिन बाद में केंद्र सरकार ने पांडुलिपि की श्रेणी में स्वीकार किया। पीएम ने मन की बात में भी इसे कहा।
राघवेंद्र: आपके जवाब में आया कि 2005 में प्रकाशित किया गया। 1987 में खोज हुई और ये ब्राह्मी लिपि व संस्कृत भाषा में है। जैसा कि उल्लेख किया गया है। प्रधानमंत्री के ज्ञान भारतम में इसकी खोज हुई। ये ताम्रपत्र ब्राह्मी और पाली भाषा में लिखी गई है। आपका जवाब और प्रधानमंत्री के ज्ञान भारतम से मिली जानकारी में अंतर है। विभाग गलत कह रहा है या ये जानकारी गलत है।
राजेश: इस बारे में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है। मैं जानकारी मंगाकर दूंगा।
राघवेंद्र: एटीआर का डॉक्यूमेंट के अनुसार ब्राह्मी और पाली भाषा में लिखा गया है ताम्रपत्र। विभाग ब्राह्मी और संस्कृत बता रहा है। तारीख भी गलत बताई जा रही है।
राजेश: मैंने पहले ही कहा कि मुझे इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं। मैं परीक्षण करा लेता हूं।
चरण: पीएम कभी गलत नहीं बोलते। विभाग ही गलती करता है। पीएम जो बोल देंगे, वही कहेंगे। लकीर के फकीर हैं।
राघवेंद्र: जो गलत जानकारी दिए हैं, उनपर कार्रवाई करेंगे। राजेश: हां कार्रवाई करेंगे। पीएम मातृ वंदन योजना फर्जी हितग्राहियों को 61.37 लाख पेमेंट, मंत्री बोलीं-पोर्टल हैक प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में बस्तर संभाग में 1400 फर्जी हितग्राहियों के नाम पर 61.37 लाख रुपए के भुगतान का मामला गुरुवार को विधानसभा में गूंजा। विपक्ष ने इसे विभागीय मिलीभगत का मामला बताते हुए सरकार को घेरा, जबकि महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि यह साइबर हैकिंग का मामला है और विभागीय अधिकारियों की इसमें कोई भूमिका नहीं है। ध्यानाकर्षण के दौरान कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने आरोप लगाया कि वर्ष 2025 से बस्तर संभाग में फर्जी हितग्राहियों का पंजीयन कर प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की राशि निकाली गई। 1400 से अधिक फर्जी खातों में करीब 61.37 लाख रुपए तीन अलग-अलग चरणों में ट्रांसफर किए गए। विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब आवेदन की प्रक्रिया आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सुपरवाइजर और सीडीपीओ के तीन स्तरों से सत्यापित होती है तो इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हो गई। जवाब में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि यह भारत सरकार के पोर्टल पर साइबर अपराध कर किया गया फर्जीवाड़ा है। जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में मामला सामने आते ही संचालक और भारत सरकार को इसकी जानकारी दी गई। जांच समिति गठित की गई, एफआईआर दर्ज कराई गई और मामला साइबर पुलिस को सौंप दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया विभागीय अधिकारियों की कोई भूमिका सामने नहीं आई है। मंत्री के इस जवाब पर विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ। विपक्ष ने पूछा कि यदि यह केवल साइबर हैकिंग थी तो 1400 फर्जी खातों में तीन बार भुगतान कैसे हुआ और एफआईआर दर्ज होने के एक माह बाद भी किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इस मुद्दे पर सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन से बहिर्गमन कर दिया। लक्ष्य से ज्यादा खाद सप्लाई का मुद्दा उठाया विधायक दलेश्वर साहू ने पूछा-यूरिया, डीएपी इत्यादि खाद की आपूर्ति 70 से 75 प्रतिशत के आधार पर होती है। कुल भंडारण का 48 प्रतिशत सहकारिता को और निजी को 52 प्रतिशत खाद आबंटित की गई। जवाब में यह विरोधाभाष क्यों। इसपर मंत्री रामविचार ने कहा कि सहकारिता को कुल भंडारण का 64 प्रतिशत और निजी को 37 प्रतिशत आबंटन हुआ। आपके पास कहां से ये आंकड़े आ गए। दलेश्वर ने कहा कि जशपुर, सरगुजा, मनेंद्रगढ़, कोंडागांव में लक्ष्य के विरुद्ध आबंटन हुआ है। क्या इसकी जांच करवाएंगे। मंत्री ने कहा जांच का तो औचित्य ही नहीं है।

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