रायपुर नगर निगम ने 90 हजार अनुमानित अवैध नल कनेक्शनों को वैध बनाने के लिए नियमितीकरण अभियान शुरू किया है। 5 हजार रुपए नियमितीकरण शुल्क और नए नल कनेक्शन का शुल्क जमा करने पर घरेलू और व्यावसायिक दोनों तरह के अवैध कनेक्शन वैध हो जाएंगे। इसके बाद निगम इन उपभोक्ताओं से नियमित जलकर भी वसूलेगा। इस अभियान के जरिए निगम ने राजस्व बढ़ाने का प्लान तो बनाया है, लेकिन वर्षों से पानी की समस्या से जूझ रहे शहर के 20 से अधिक वार्डों के लिए कोई कार्ययोजना तैयार नहीं की गई है। ऐसे में कनेक्शन कागजों पर वैध होने के बाद भी टेल एंड तक पर्याप्त पानी पहुंचना बड़ी चुनौती बना रहेगा। जल विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध कनेक्शन नियमित होने से रिकॉर्ड तो सुधरेगा, लेकिन टेल एंड तक समान दबाव से पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन नेटवर्क, इंटरकनेक्शन, राइजिंग लाइन से लिए गए डायरेक्ट कनेक्शन हटाने और जरूरत के अनुसार पाइपलाइन क्षमता बढ़ाने जैसे तकनीकी सुधार भी जरूरी होंगे। केवल नियमितीकरण अभियान से जलापूर्ति व्यवस्था की समस्या अपने आप दूर नहीं होगी। 3.60 लाख प्रॉपर्टी, 2.21 लाख नल कनेक्शन
निगम के रिकॉर्ड में 3.60 लाख प्रॉपर्टी दर्ज हैं, जबकि वैध नल कनेक्शन सिर्फ 2 लाख 21 हजार हैं। निगम का अनुमान है कि करीब 90 हजार कनेक्शन अवैध हैं। इन्हें 15 अक्टूबर तक अभियान के दौरान वैध किया जाएगा। आवेदन के साथ 5 हजार रुपए नियमितीकरण शुल्क और नए नल कनेक्शन का शुल्क जमा करना होगा। 16 अक्टूबर से अवैध कनेक्शनों को काटने की कार्रवाई भी प्रस्तावित है। इन वार्डों में रहती है पेयजल की समस्या
नियमितीकरण से निगम के पास वैध उपभोक्ताओं का रिकॉर्ड और राजस्व बढ़ेगा, लेकिन जल वितरण व्यवस्था की मूल समस्या बरकरार रहेगी। वर्तमान में डॉ. खूबचंद बघेल वार्ड, भक्तमाता कर्मा वार्ड, महामाया मंदिर वार्ड, वामनराव लाखे वार्ड, डंगनिया, पं. जवाहरलाल नेहरू वार्ड, चंद्रशेखर आजाद वार्ड, भनपुरी, कामरेड सुधीर मुखर्जी वार्ड, अमलीडीह, ब्राह्मणपारा और फुंडहर सहित 20 से अधिक वार्डों के टेल एंड क्षेत्रों में जुलाई में भी लो प्रेशर की समस्या बनी हुई है। गर्मी के दौरान इन इलाकों में टैंकरों से जलापूर्ति करनी पड़ती है। अवैध नल कनेक्शन नियमितीकरण सिर्फ कागजों पर ही वैध नहीं होगा। एंड-टू-एंड प्रत्येक उपभोक्ता तक समान मात्रा में पानी पहुंचाने के लिए जरूरी बदलाव भी किए जाएंगे। नियमितीकरण से मिलने वाला आंकड़ा निगम के लिए महत्वपूर्ण होगा, ताकि आवश्यक सुधार किए जा सकें। जब निगम के पास वैध कनेक्शनों का सही रिकॉर्ड होगा, तभी भविष्य में नए कनेक्शनों की मांग के अनुरूप जलापूर्ति व्यवस्था विकसित की जा सकेगी। – नरसिंग फरेंद्र, ईई, जलकार्य विभाग, निगम रायपुर भास्कर एक्सपर्ट – बद्री चंद्राकर, रिटायर्ड ईई, जलकार्य विभाग, निगम अवैध कनेक्शन से बिगड़ती है इंजीनियरिंग
पानी की टंकी निर्माण के दौरान ही उसका डीएमए (डिस्ट्रिक्ट मीटर एरिया) तैयार किया जाता है। यानी पानी सप्लाई का ऐसा क्षेत्र, जहां कितना पानी गया और कितना उपभोक्ताओं तक पहुंचा, इसका अलग से हिसाब रखा जा सके। इसमें कनेक्शनों की संख्या भी तय होती है। पाइपलाइन का व्यास, ग्रैविटी, प्रेशर और स्लोप जैसी सभी तकनीकी बारीकियों का ध्यान रखा जाता है, ताकि टेल एंड तक सभी मौसम में समान दबाव से पानी पहुंचे। लेकिन इन्हीं पाइपलाइनों में अवैध कनेक्शन जोड़ने से पूरी इंजीनियरिंग व्यवस्था प्रभावित हो जाती है, जिसका परिणाम टेल एंड पर लो प्रेशर के रूप में सामने आता है। नियमितीकरण अभियान के बाद भी इस समस्या के समाधान के लिए काफी मशक्कत करनी होगी। राइजिंग लाइन से लिए गए डायरेक्ट कनेक्शन हटाने, सही तकनीकी योजना के आधार पर प्रॉपर्टी करने, पाइपलाइन का व्यास बढ़ाने और भविष्य की जरूरतों के अनुसार जलापूर्ति नेटवर्क विकसित करने पर काम करना होगा।
