कुम्हारी में नेशनल हाईवे-53 पर गुरुवार सुबह करीब 9.45 बजे हुए भीषण सड़क हादसे में एक्टिवा सवार दो सगी बहनों और उनकी दो मासूम बेटियों की मौत हो गई। हादसे में एक 8 वर्षीय बालक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे एम्स में भर्ती कराया गया है। पुलिस के मुताबिक मृतकों की पहचान भिलाई-3 सोमनी निवासी अमृता निर्मलकर (28), उनकी बहन लक्ष्मी निर्मलकर (26), अमृता की 7 वर्षीय बेटी याचना और लक्ष्मी की 4 वर्षीय बेटी डाली के रूप में हुई है। अमृता का 8 वर्षीय बेटा भावेश घायल है। पुलिस ने बताया कि सभी लोग सुबह एक्टिवा से रायपुर की बसंत विहार कॉलोनी स्थित अपने मामा के घर गृह प्रवेश कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। कुम्हारी में दशमेश ढाबे के सामने सड़क किनारे खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली से उनकी एक्टिवा पीछे से टकरा गई। टक्कर इतनी तेज थी कि चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद राहगीरों ने पुलिस और एम्बुलेंस को सूचना दी। पुलिस ने मृतकों के मोबाइल से परिजनों को सूचना दी। चारों शवों को सुपेला अस्पताल भेजा गया, जहां पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। ट्रैक्टर चालक भोला यादव को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। अमृता के पति लोकेश ने बताया कि सुबह पत्नी ने फोन कर मामा के घर जाने की जानकारी दी थी। कुछ देर बाद उनकी साली लक्ष्मी भी अपनी बेटी के साथ घर पहुंचीं और सभी एक साथ रायपुर के लिए निकल गए। मामा के घर गृहप्रवेश का कार्यक्रम था। लोकेश ने बताया कि उनकी बेटी याचना का दो दिन पहले ही जन्मदिन मनाया गया था। वह पहली कक्षा में पढ़ती थी। पुलिस के अनुसार एक्टिवा अमृता चला रही थीं। एक बच्ची आगे खड़ी थी, जबकि पीछे लक्ष्मी और दो बच्चे बैठे थे। यानी पांच लोग एक ही स्कूटी पर सवार थे। जांच में पता चला कि अतुल ऑक्सीजन कंपनी का ट्रैक्टर ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर रायपुर जा रहा था। घटना से करीब चार मिनट पहले चालक ट्रैक्टर सड़क किनारे खड़ा कर पास की दुकान पर गया था। इसी दौरान एक्टिवा ट्रॉली से टकरा गई। पुलिस का कहना है कि संभव है सामने से कोई वाहन गलत दिशा में आ गया हो, जिससे स्कूटी का संतुलन बिगड़ा। तेज रफ्तार भी हादसे की एक वजह मानी जा रही है। मामले की जांच जारी है। छह महीने में 759 सड़क हादसे, 143 लोगों की मौत
जनवरी से जून 2026 तक जिले में 759 सड़क हादसे हुए। इनमें 611 लोग घायल हुए और 143 लोगों की मौत हुई। पिछले साल इसी अवधि में 692 हादसों में 204 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2024 में 656 हादसों में 197 लोगों ने जान गंवाई थी। सड़क हादसों की संख्या लगातार चिंता का विषय बनी हुई है।
