काव्य कुंभ के आखिरी दिन मंच पर जब मणिका दुबे पहुंचीं, तो उनकी रचनाओं को युवाओं ने खूब पसंद किया। प्रेम, रिश्तों और युवाओं की भावनाओं को आसान शब्दों में पिरोकर उन्होंने कविताएं और गजलें सुनाईं, जिन्हें खूब तालियां मिलीं। कार्यक्रम के दौरान मणिका ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपने लेखन की शुरुआत, सोशल मीडिया के असर, नई पीढ़ी की सोच, प्रेम की बदलती अभिव्यक्ति और युवा रचनाकारों के लिए जरूरी बातों पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि वे वही लिखती हैं, जो उनकी पीढ़ी महसूस करती है। सोशल मीडिया ने लेखकों और कवियों को अपनी बात कहने का नया मंच दिया है। मणिका ने MBA की पढ़ाई छोड़कर लेखन की दुनिया में कदम रखा। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… मणिका दुबे से खास बातचीत सवाल: आपकी साहित्यिक यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? आज जिस मुकाम पर आप हैं, वहां तक पहुंचने का सफर कैसा रहा? जवाब: शुरुआत बहुत सोची-समझी नहीं थी। मैं MBA ड्रॉपआउट हूं। मैंने अपना MBA इसलिए छोड़ दिया, क्योंकि मुझे इस क्षेत्र में एक्टिव होने से बहुत खुशी मिलती थी। यह खुशी दिल से मिलती थी। मैं दबाव में रहकर कोई काम नहीं कर सकती थी। मैंने कई नौकरियां भी छोड़ी हैं। मुझे इस क्षेत्र में सुकून मिलता था, इसलिए मैंने इसी लाइन को चुना। सवाल: आज के यंगस्टर्स आपकी कविताओं से खुद को बहुत ज्यादा कनेक्ट पाते हैं, लिखते समय आपके मन में क्या चलता है? जवाब: जैसा युवा वर्ग सोचता है, मैं भी वैसा ही सोचती हूं। मैं खुद युवा वर्ग का प्रतिनिधित्व करती हूं। हो सकता है कि लेखकों और कवियों का देखने का दायरा थोड़ा बड़ा होता हो, लेकिन लोग मुझसे इसलिए जुड़ पाते हैं, क्योंकि मैं उन्हीं के बीच की बातें करती हूं। जो चीजें उनकी जिंदगी में घट रही होती हैं, उन्हें मैं अपनी रचनाओं में कहने की कोशिश करती हूं। मुझे लगता है कि मैं अभी भी सीख रही हूं। सवाल: पहले कवि अपनी बात किताबों के जरिए पहुंचाते थे, आज रील्स वायरल हो रही हैं; सोशल मीडिया के इस दौर को आप कैसे देखती हैं? जवाब: सोशल मीडिया बहुत अच्छी चीज है। यह अपने आपको अभिव्यक्त करने का एक शानदार मंच है। पहले लोगों के पास खुद को व्यक्त करने के इतने प्लेटफॉर्म नहीं होते थे। उनकी बातें लोगों तक पहुंचने में काफी समय लगता था। अखबारों और किताबों के माध्यम से उनकी रचनाएं लोगों तक पहुंचती थीं। लेकिन अब सोशल मीडिया के जरिए लोग अपनी बात तेजी से और बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचा पा रहे हैं। इसका अच्छा उपयोग भी हो रहा है। मुझे भी यहां बुलाया गया है तो मेरी वीडियो देखकर ही बुलाया गया है। मेरा चयन भी वीडियो के आधार पर हुआ है। अगर कोई नया व्यक्ति इस क्षेत्र में आना चाहता है और उसकी वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों तक पहुंच रही है, तो यह उसके लिए बहुत अच्छा मंच है। सोशल मीडिया लोगों को मंच तक पहुंचाने का काम कर रहा है। सवाल: नई और पुरानी पीढ़ी के इश्क को आप किस नजरिए से देखती हैं? जवाब: इश्क की समझ का किसी जनरेशन से कोई लेना-देना नहीं है। हर व्यक्ति का महसूस करने और उसे जाहिर करने का अपना तरीका होता है। तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन भावनाएं नहीं बदलतीं। पुराने समय में लोग अपने महबूब तक चिट्ठियां पहुंचाते थे। आज लोग ज्यादा एक्सप्रेसिव हो गए हैं। वे अपनी भावनाएं खुलकर जाहिर कर देते हैं, मिल लेते हैं, बात कर लेते हैं। लेकिन इससे इश्क अलग नहीं हो जाता। बहुत लोग कहते हैं कि आज के दौर में सच्चा इश्क नहीं होता, लेकिन जो लोग इश्क करते हैं, वे जानते हैं कि वह कितनी शिद्दत से किया जाता है। इसलिए मैं अपनी जनरेशन या जेन-जी को लेकर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगी। सवाल: वसीम बरेलवी जैसे बड़े शायरों ने आपकी तारीफ करते हुए कहा कि अब उन्हें भविष्य की चिंता नहीं है। इसे आप कैसे देखती हैं? जवाब: उनका यह प्रशंसा भरा वक्तव्य मेरे लिए बहुत मायने रखता है। वसीम बरेलवी साहब ऐसे शायर हैं, जिन्हें सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में सुना और सम्मान दिया जाता है। उनके अशआर (शेर) लोगों की जुबान पर रहते हैं। उनकी शायरी जितनी बड़ी है, वे इंसान के तौर पर उससे भी बड़े हैं। उनकी सबसे खास बात यह है कि वे अपने स्नेह और प्रेम को लोगों के साथ बांटना जानते हैं। मैं जब से उन्हें जान रही हूं, तब से उनका स्नेह और आशीर्वाद मुझे लगातार मिलता रहा है। इसलिए उनकी ओर से मिली यह सराहना मेरे लिए किसी सम्मान से कम नहीं है। सवाल: जो लोग लिखते हैं और कवि या शायर बनना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सलाह देना चाहेंगी? जवाब: मेरा सबसे पहला संदेश यही होगा कि लोगों को पढ़िए। किताबें पढ़िए, कवियों और शायरों को पढ़िए। पुराने रचनाकारों की रचनाओं से सीखिए। गद्य पढ़िए। ऐसी बहुत-सी किताबें हैं, जिन्हें पढ़ना चाहिए। जिस भी मंच पर आपको अवसर मिले, वहां प्रस्तुति दीजिए। मंच कभी छोटा या बड़ा नहीं होता। अपनी ऑडियंस खुद तैयार कीजिए। अपनी रचनाओं में कुछ नया और रचनात्मक करने की कोशिश कीजिए। जहां भी अवसर मिले, लगातार परफॉर्म करते रहिए। अपने वीडियो देखिए, उनका विश्लेषण कीजिए और समझिए कि सुधार की जरूरत कहां है। जब आपको लगातार अच्छा रिस्पॉन्स मिलने लगे, तब आपको खुद महसूस हो जाएगा कि अब आप बड़े मंच के लिए तैयार हैं। …………………… यह इंटरव्यू भी पढ़िए… कॉर्पोरेट जॉब छोड़कर स्टोरीटेलिंग में आए अमनदीप: बोले-12 महीने की बचत के भरोसे शुरू किया नया सफर, दादाजी की घड़ी पहनकर देते हैं परफॉर्मेंस
स्टोरीटेलर अमनदीप ख्याल शनिवार को काव्य कुंभ में परफॉर्मेंस के लिए रायपुर पहुंचे। कार्यक्रम में उन्होंने अपने लोकप्रिय लाइव स्टोरीटेलिंग शो ‘धक-धक’ की तरह ही श्रोताओं को अपनी जिंदगी के किस्सों से जोड़ लिया। प्रेम, रिश्तों, अकेलेपन और जीवन के छोटे-छोटे अनुभवों को कहानियों में पिरोने वाले अमनदीप ने मंच से अपनी यात्रा साझा की। पढ़ें पूरी खबर…
