छत्तीसगढ़ में घरों में बिजली जलाना महंगा हो जाएगा। घरेलू उपभोक्ताओं को 1 जुलाई से टैरिफ में 30 से 50 पैसे यूनिट की बढ़ोतरी हो जाएगी। नई दरों के लागू होने पर 100 यूनिट तक खपत करने वालों को 36 रुपए ज्यादा चुकाने पड़ेंगे। 200 यूनिट पर वृद्धि बढ़कर 73 रुपए हो जाएगी। बिजली की खपत के साथ बिल बढ़ता जाएगाग। 800 यूनिट तक खपत पर लगभग 413 रुपए का भार पड़ेगा। सभी वर्ग मिलाकर बिजली में 6.23% की वृद्धि हुई है।
विद्युत नियामक आयोग ने सोमवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों को मंजूरी दी है। आयोग ने वितरण कंपनी के प्रस्तावित औसतन 24% वृद्धि के मुकाबले केवल 6.23% की औसत वृद्धि को मंजूरी दी। बिजली कंपनी ने वर्ष 2026-27 के लिए 6304 करोड़ रुपए के राजस्व घाटे का दावा किया था, लेकिन आयोग ने जांच के बाद इसे घटाकर 1662 करोड़ रुपए माना। औसत विद्युत सप्लाई कास्ट 7.13 रुपए प्रति यूनिट तय की है, जबकि वर्तमान टैरिफ के आधार पर औसत बिलिंग दर 6.71 रुपए प्रति यूनिट आंकी गई है। इसी अंतर को पाटने के लिए दरों में वृद्धि की गई है। बता दें कि पिछले साल भी बिजली दरों में करीब 20 पैसे तक की बढ़ोत्तरी की गई थी। किसानों पर असर कम, उनके ऊर्जा प्रभार की छूट बढ़ी छत्तीसगढ़ में मप्र, महाराष्ट्र से सस्ती, मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना से उपभोक्ताओं पर असर कम पिछले कुछ सालों में महंगाई, कोयला, बिजली उत्पादन और आपूर्ति लागत में वृद्धि को देखते हुए विद्युत टैरिफ दरों में मामूली वृद्धि की गई है। आयोग के अनुसार संशोधित दरों के बावजूद छत्तीसगढ़ में बिजली शुल्क पड़ोसी राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और झारखंड की तुलना में अभी भी कम है। ऐसे में राज्य में उपभोक्ताओं और उद्योगों के लिए बिजली दरें प्रतिस्पर्धी बनी रहेंगी। आयोग ने बिजली शुल्क में औसतन 6.23 प्रतिशत की वृद्धि की है। टैरिफ वृद्धि करते समय आयोग ने आम जनता और निम्न आय वर्ग के हितों का ध्यान रखा है। सरकार की मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के तहत 400 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक की खपत पर आधा बिजली बिल देने की सुविधा मिल रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में निम्न एवं मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर वास्तविक अतिरिक्त भार अपेक्षाकृत कम रहेगा। अनुमान है कि इन उपभोक्ताओं के बिल पर प्रभाव औसतन केवल 15 से 20 पैसे प्रति यूनिट के बराबर होगा। इसी प्रकार 201 से 600 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले कई उपभोक्ता पीएम सूर्यघर योजना के तहत रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाकर अपनी ग्रिड आधारित खपत 400 यूनिट के भीतर कर रहे हैं। ऐसे उपभोक्ताओं पर भी बढ़ोतरी का प्रभाव बहुत ही कम होने की संभावना है। गैर-घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं की बिजली दरों में औसतन 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। वहीं कृषि पंपों के लिए दरों में 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी घोषित की गई है। हालांकि कृषि उपभोक्ताओं को राज्य सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी के कारण इस वृद्धि का सीधा प्रभाव किसानों पर नहीं होगा। उच्च दाब (एचटी) श्रेणी के औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए भी बिजली शुल्क में संशोधन किया गया है। 220 केवी और 132 केवी श्रेणी में ऊर्जा प्रभार में 30 पैसे प्रति यूनिट तथा डिमांड चार्ज में 25 रुपए प्रति केवीए की वृद्धि की गई है।
33 केवी श्रेणी में 40 पैसे प्रति यूनिट और 11 केवी श्रेणी में 30 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी लागू होगी। नई टैरिफ व्यवस्था में कुछ विशेष रियायतें भी दी गई हैं। बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में स्थित छात्रावासों को व्यावसायिक श्रेणी के बजाय घरेलू श्रेणी में शामिल कर राहत प्रदान की गई है। इसके अलावा विलंबित भुगतान अधिभार की व्यवस्था को भी उपभोक्ता हित में सरल बनाया गया है। अब अतिरिक्त शुल्क केवल वास्तविक विलंब अवधि के आधार पर लगेगा। घरेलू और गैर-घरेलू श्रेणी के 10 किलोवाट से अधिक भार वाले उपभोक्ताओं को ऑफ-पीक अवधि में बिजली उपयोग करने पर 20 पैसे प्रति यूनिट की छूट भी मिलेगी।
