भास्कर न्यूज| कोंडागांव कोंडागांव के दक्षिण वन मंडल कार्यालय परिसर में पर्यावरण संरक्षण की मिसाल सामने आई है। यहां लाखों रुपए की लागत से नया कार्यालय भवन बन रहा है। निर्माण के बीच एक अंजीर का पेड़ आ गया। वन विभाग ने पेड़ काटने के बजाय भवन की रूपरेखा बदल दी। भवन के मध्य खड़े अंजीर के पेड़ को बचाने के लिए उसके चारों ओर पर्याप्त खाली जगह छोड़ी गई। निर्माण कार्य इसी बदलाव के साथ कराया जा रहा है। अक्सर निर्माण या विकास कार्य में पेड़ काट दिए जाते हैं। कोंडागांव वन विभाग ने दिखाया कि इच्छाशक्ति से पेड़ बचाकर भी निर्माण हो सकता है। यह अंजीर का पेड़ पर्यावरण के साथ आर्थिक रूप से भी उपयोगी है। बाजार में अंजीर की कीमत करीब एक हजार रुपए प्रति किलो तक पहुंच जाती है। विभाग की पहल से किसानों, आम लोगों को संदेश मिला कि बस्तर की जलवायु में अंजीर की खेती की बड़ी संभावना है। इससे अच्छी आय हो सकती है। वन विभाग की पहल की क्षेत्रभर में प्रशंसा हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर निर्माण में ऐसी सोच अपनाई जाए तो पर्यावरण संरक्षण में बड़ा बदलाव आएगा। दक्षिण वन मंडल कार्यालय परिसर का यह अंजीर का पेड़ अब प्रकृति, विकास के संतुलन का प्रतीक बन गया है। यह आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण बचाने का संदेश देता रहेगा।
