‘चोला माटी के हे राम, एकर का भरोसा…’:गाकर शिष्यों व प्रशंसकों ने डॉ. तीजन बाई को दी अंतिम विदाई, अब दिलों में गूंजेगी दमदार आवाज

छत्तीसगढ़िया संस्कृति की जीवंत संवाहक पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई रविवार की दोपहर पंचतत्व में विलीन हो गई। गनियारी मुक्तिधाम में जैसे ही उनके शिष्यों का स्वर गूंजा ‘चोला माटी के हे राम, एकर का भरोसा…’ हजारों की संख्या में मौजूद लोगों की आंखों से आंसुओं की धार फूट पड़ी। डॉ. तीजन बाई को उनके मंझले बेटे दिलहरण पारधी ने मुखाग्नि दी। महाभारत की कथाओं को अपनी दमदार आवाज, अभिनय और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से जीवंत बनाने वाली डॉ. तीजन बाई के निधन पर देश और प्रदेश के राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गहरा शोक जताया। संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई: डॉ. तीजन बाई के निधन से गहरा आघात लगा है। उन्होंने प्रदेश की कला और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई। उनका जाना छत्तीसगढ़ के लिए अपूरणीय क्षति है।
-अरुण साव, उपमुख्यमंत्री तीजन बाई की पंडवानी सुनकर बड़े हुए: बचपन से तीजन बाई की पंडवानी सुनते हुए हम बड़े हुए। उनकी दमदार आवाज, जीवंत प्रस्तुति और लोक संस्कृति के प्रति समर्पण ने हमारे मन पर अमिट छाप छोड़ी है।
-विजय शर्मा, उपमुख्यमंत्री पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी उनकी प्रेरणा : पंडवानी की अमर स्वर साधिका को विनम्र नमन। लोककला के संरक्षण के प्रति तीजन बाई का समर्पण, उनकी सादगी और साधना आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। – ओपी चौधरी, वित्त मंत्री मैं साइकिल से पंडवानी सुनने जाता था: छत्तीसगढ़ की अनमोल रत्न, महान पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन बड़ी क्षति है। जब हम स्कूल में पढ़ते थे, तब साइकिल से पंडवानी सुनने जाया करते थे। – भूपेश -बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री लोक संस्कृति की आवाज खो गई: छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति आज अपनी सबसे बुलंद आवाज खो बैठी। तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाई।
– केदार कश्यप, वन मंत्री छत्तीसगढ़ को दिलाई पहचान: पंडवानी की अपनी अद्वितीय प्रस्तुति से तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाई। उनका जीवन कला और लोकधरोहर के संरक्षण के लिए समर्पित रहा। – -रामविचार नेताम, कृषि मंत्री लोक संस्कृति की जीवंत संवाहक: तीजन बाई ने अनूठी शैली और बुलन्द आवाज से छत्तीसगढ़ की लोक कला पंडवानी को देश के कोने-कोने में पहुंचाया। साथ ही सात समुद्र पार भी छत्तीसगढ़िया संस्कृति का परचम लहराया। वे लोक संस्कृति की जीवंत संवाहक थीं। – किरण सिंह देव, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा

More From Author

IIM नवा रायपुर में दो दिवसीय चिंतन शिविर का समापन:साय ने मंत्रियों संग की योग से दिन की शुरुआत; कहा- स्वस्थ शरीर और शांत मन से ही सुशासन

जोकोविच ने फेडरर का रिकॉर्ड तोड़ा:विंबलडन में सबसे ज्यादा 106 मैच जीतने वाले खिलाड़ी बने; ओसाका ने वर्ल्ड नंबर-1 सबालेंका को हराया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *