केरलम में इस साल निपाह वायरस का पहला केस:मरीज वेंटिलेटर पर, हॉस्पिटल स्टॉफ क्वारंटीन; राज्य में हाई अलर्ट, 8 साल में छठवीं बार संक्रमण फैला

केरलम में इस साल निपाह वायरस का पहला केस मिला है। इसकी जानकारी गुरुवार को सामने आई। मरीज 43 साल का है और कोझिकोड का रहने वाला है। राज्य सरकार ने रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। मरीज को हल्का बुखार आने पर प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। बाद में कोझिकोड मेडिकल कॉलेज भेजा गया। उसकी हालत गंभीर है और वह वेंटिलेटर पर है। स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने कहा, मरीज कई लोगों के संपर्क में आया था। अस्पताल के स्टाफ और उसके संपर्क में आए संभावित लोगों को क्वारंटीन रहने को कहा गया है। फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। 2018 के बाद से केरलम में 6वीं बार संक्रमण फैला है। आखिरी बार दो साल पहले 2024 में दो केस मिले थे। इनमें एक की जान चली गई थी। मरीज निपाह वायरस की चपेट में कैसे आया अधिकारियों के मुताबिक, मरीज ने हाल ही में एक गोदाम किराए पर लिया था और खुद उसकी सफाई की थी। आशंका है कि इसी दौरान वह संक्रमण की चपेट में आया। निपाह वायरस मुख्य रूप से फ्रूट बैट (फल खाने वाले चमगादड़ों) से फैलता है। अब आगे क्या… सबसे पहला केस मलेशिया में मिला था WHO के मुताबिक, साल 1998 में मलेशिया के सुंगई निपाह गांव में पहली बार निपाह वायरस का पता चला था। इसी गांव के नाम पर ही इसका नाम निपाह पड़ा। आमतौर पर यह वायरस चमगादड़ और सुअर से फैलता है। अगर इस वायरस से इन्फेक्टेड चमगादड़ किसी फल को खाता है और उसी फल-सब्जी को कोई इंसान या जानवर खाता है तो वह भी संक्रमित हो जाता है। निपाह वायरस सिर्फ जानवरों से ही नहीं, बल्कि एक इन्फेक्टेड व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैलता है। यह लार, खून और बॉडी फ्लूइड से फैल सकता है। निपाह वायरस के लक्षण दो से तीन दिन में दिखने लगते हैं। इसके शुरुआती लक्षणों में बुखार, सिरदर्द और सांस लेने में परेशानी जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। ———————– फिजिकल हेल्थ से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… डिप्थीरिया से 2 बच्चों की मौत: इन 6 लक्षणों को इग्नोर न करें, बच्चों को वैक्सिन जरूर लगवाएं बीते दिनों महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव से डिप्थीरिया (गलघोंटू) के तीन मामले सामने आए। इनमें छह महीने और 11 साल के दो बच्चों की मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीनों बच्चों को डिप्थीरिया के टीके नहीं लगे थे। पूरी खबर पढ़ें…

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