आयोग ने की पुष्टि- कार ई20 ईंधन की नहीं थीं:डॉक्टर देबता बोले- कंपनी फैसले को नहीं मान रही, जरूरत पड़ी तो अदालत में भी लड़ूंगा

रायपुर में मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कार में एथेनॉल( ई20) पेट्रोल डालने के बाद इंजन खराब होने का मामला देशभर में चर्चा में है। जिला उपभोक्ता आयोग ने कंपनी और डीलर को 45 दिन में ई20 अनुकूल नई कार देने या 20.5 लाख रुपए लौटाने का आदेश दिया है। इसके अलावा एक लाख रुपए मानसिक प्रताड़ना और 10 हजार रुपए वाद व्यय भी देना होगा। फैसले के बाद शिकायतकर्ता और किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेमराज देबता ने दैनिक भास्कर से अपना अनुभव साझा किया। मैंने जून 2024 में मैग्नेटो मॉल स्थित नेक्सा स्काई शोरूम से करीब 20.5 लाख रुपए में ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड Zeta+ खरीदी थी। पांच महीने बाद पेट्रोल भरवाकर निकला तो डेशबोर्ड पर इंजन खराब होने का संदेश आ गया। शोरूम में टैंक से निकाला गया पेट्रोल बोतल में रखा तो ऊपर पेट्रोल और नीचे सफेद जैली की परत थी। शोरूम ने इसे गुणवत्ताहीन पेट्रोल बताया और खराबी वजह इसे ही माना। तब मैं पेट्रोल सैंपल लेकर जियो पेट्रोल पंप गया और ई-मेल से शिकायत की। पंप प्रबंधन ने जवाब दिया कि उस दिन कई गाड़ियों में पेट्रोल भरा गया, लेकिन किसी और ने शिकायत नहीं की। इसलिए खराबी कार में होगी। यहां बता दूं कि मैंने जियो के अलावा इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और एचपी के पंपों से भी पेट्रोल भरवाया था, इसलिए पंप वाले के खिलाफ आगे नहीं गया। कार में खराबी के चलते सर्विस सेंटर पर कई बार टैंक खाली कर नया पेट्रोल डाला गया, लेकिन कार कुछ किलोमीटर चलकर कार बंद हो जाती थी। शोरूम ने एक महीने तक कार अपने पास रखी और बदले में पुरानी मैनुअल लोनर कार दी। दिसंबर में कार वापस मिली, लेकिन पेट्रोल भरवाने के पांच किलोमीटर बाद फिर बंद हो गई। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि खराबी पेट्रोल में है, या मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट है या हाइब्रिड सिस्टम में है। मैंने शोरूम प्रबंधन से नई कार या पूरी कीमत लौटाने की मांग की। कंपनी ने इनकार करते हुए ट्रू वैल्यू के हिसाब से सिर्फ 12 लाख रुपए देने की पेशकश की। बाद में कहा गया कि पेट्रोल से इंजन खराब हुआ है। इसके पार्ट बदलने में 5.3 लाख रुपए लगेंगे, जो वारंटी में कवर नहीं होंगे। पार्ट बदलने के बाद भी कार कितनी चलेगी, इसकी गारंटी नहीं दी गई। परेशान होकर 29 मार्च 2025 को कार शोरूम में छोड़ आया। कार पिछले 15 महीने से वहीं खड़ी है, लेकिन 12 लाख रुपए के फाइनेंस पर हर महीने 30 हजार रुपए की ईएमआई भर रहा था। इन सब चीजों से परेशान होकर मैंने उपभोक्ता आयोग में केस लगाया। आयोग के आदेश से पता चला कि जांच में पेट्रोल में 10 से 20% एथेनॉल मिला और कार ई-20 के अनुकूल नहीं थी। हालांकि कंपनी इसे ई-20 सपोर्टेड बताते हुए फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कह रही है। कंपनी ऊपरी अदालत जाएगी तो मैं भी कानूनी लड़ाई लड़ूंगा। मुझे भरोसा है कि आखिर में सच्चाई की जीत होगी।’

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