छत्तीसगढ़ के बैकुंठपुर में 12 साल की बच्ची को बंधक बनाकर जीजा ने उसके साथ रेप किया। मामले में पुलिस ने आरोपी जीजा को गिरफ्तार किया है। इस बीच, नाबालिग की मुंहबोली बहन ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर दावा किया था कि उसकी बहन और 9 साल के भाई को अवैध रूप से चाइल्ड हेल्पलाइन में रखा गया है। जबकि रिकॉर्ड के अनुसार लड़का बैकुंठपुर चाइल्ड वेलफेयर सेंटर और लड़की अंबिकापुर बालिका गृह में सुरक्षित थे। मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मुख्य सचिव और डीजीपी को दोनों बच्चों को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया था। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता बहन ने तथ्यों को लेकर कोर्ट को गुमराह किया है, जिसके बाद अदालत ने काउंसलर से काउंसिलिंग रिपोर्ट बंद लिफाफे में मांगी है। फिलहाल कोर्ट ने अगली सुनवाई तक दोनों बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर सेंटर में ही रखने का आदेश दिया है और मामले की अगली सुनवाई कल यानी 2 जुलाई को होगी। जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, बैकुंठपुर के दो अनाथ बच्चे 12 साल की बच्ची और उसका 9 साल का भाई अपनी मुंहबोली दीदी के घर रह रहे थे। आरोप है कि इस दौरान दोनों के साथ शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना की गई। लगातार हो रही प्रताड़ना से परेशान होकर दोनों भाई-बहन दीदी और जीजा के घर से भागकर अपने एक परिचित के यहां पहुंच गए। मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) को सूचना दी गई। इसके बाद दोनों बच्चों की काउंसिलिंग कराई गई और उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें संरक्षण में रखा गया। जीजा ने 12 साल की बच्ची से किया रेप चाइल्ड वेलफेयर सेंटर में जब बच्चों से पूछताछ कर काउंसिलिंग की गई, तब पता चला कि उन्हें पनाह देने वाले जीजा ने 12 साल की बच्ची के साथ रेप किया। इसके साथ ही उसके भाई को भी लगातार प्रताड़ित किया जाता रहा। मामला सामने आने के बाद चाइल्ड वेलफेयर सेंटर ने आरोपी जीजा के खिलाफ केस दर्ज किया। वहीं, बच्चों को शेल्टर होम में रखा गया। यह प्रक्रिया अभी चल ही रही थी कि मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। हाईकोर्ट बोला- बच्चों का कल्याण और उनकी मानसिक स्थिति सर्वोपरि मंगलवार को हाईकोर्ट के आदेश पर कोरिया की कलेक्टर रोक्तिमा यादव, अंबिकापुर के अपर कलेक्टर राम सिंह ठाकुर और महिला-बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने दोनों भाई-बहन को हाईकोर्ट में पेश किया। इस दौरान राज्य शासन की ओर से कोर्ट को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि बच्चों का कल्याण और उनकी मानसिक स्थिति सर्वोपरि है। हाईकोर्ट ने मांगी काउंसिलिंग रिपोर्ट हाईकोर्ट ने दोनों बच्चों की काउंसिलिंग कोर्ट रूम के बजाय स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी में कराने के निर्देश दिए। इसके बाद एकेडमी की डायरेक्टर और सीनियर एडवोकेट नौशीना अली की देखरेख में बच्चों की काउंसिलिंग की गई। बच्चों से बातचीत के बाद वह अपनी रिपोर्ट बंद लिफाफे में हाईकोर्ट को सौंपेंगी। फिलहाल हाईकोर्ट ने दोनों बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर सेंटर में ही रखने का आदेश दिया है। ………………….. हाईकोर्ट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बोला- बिना पेनिट्रेशन प्राइवेट पार्ट रगड़ना रेप नहीं:सिर्फ कोशिश, आरोपी की सजा आधी; कहा- ये कानून की नजर में दुष्कर्म नहीं
‘यदि किसी मामले में महिला के साथ पूरा पेनिट्रेशन यानी प्रवेश साबित नहीं होता, केवल प्राइवेट पार्ट को रगड़ा गया है, तो इसे कानून की नजर में रेप नहीं माना जाएगा। ऐसा कृत्य अटेम्प्ट टू रेप यानी रेप की कोशिश की श्रेणी में आएगा।’ पढ़ें पूरी खबर…
