सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया कि तय फुटपाथ पर चलने का अधिकार एक बुनियादी अधिकार है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और एएस चंदुरकर की बेंच ने एक अहम फैसले में कहा कि तय रास्तों पर मोटर गाड़ियों के मुकाबले इस अधिकार को प्राथमिकता दी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि यह संविधान के आर्टिकल 19 (1) (d) के तहत गारंटी वाले आने-जाने के अधिकार और आर्टिकल 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) समेत दूसरे बुनियादी अधिकारों का हिस्सा है। बेंच ने कहा कि इस अधिकार के तहत अगर सड़क है, तो यह पक्का करना भी ड्यूटी है कि पैदल चलने वालों के लिए तय और अच्छी तरह से मेंटेन किए गए फुटपाथ हों। यह फैसला एक एक्सीडेंट केस में आया, जिसमें एक पिता ने अपने 5 साल के बेटे को खो दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजे की रकम बढ़ाकर 11,44,628 रुपए कर दी। और इसे कम करने वाले हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट के आदेश की 2 बातें… सुप्रीम कोर्ट बोला- मौलिक अधिकार लागू करवाने निगरानी बॉडी बनाएं सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा- तय फुटपाथ पर चलने के मौलिक अधिकार को बेहतर बनाने और लागू करने के लिए एक रेगुलेटरी बॉडी बनाना जरूरी है। हमेशा काम करने वाली और लगातार बनी रहने वाली ऐसी रेगुलेटरी बॉडी संस्थागत जानकारी विकसित और सुरक्षित रखेगी, ताकि वह अपने जमा किए और प्रोसेस किए गए अनुभव, डेटा और जानकारी के आधार पर काम कर सके। बेंच ने कहा कि संस्थागत विशेषज्ञता बहुत जरूरी है और ऐसी रेगुलेटरी बॉडी खास जानकारी और हुनर वाले लोगों को काम पर रखेगी। कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह इस फैसले की कॉपी केंद्र सरकार, आवास और शहरी मामलों, ग्रामीण विकास और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालयों को भेजे ताकि जरूरी कानूनी ढांचा शुरू करने की जरूरत पर विचार किया जा सके।
