आईटी कंपनी विप्रो ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (Q4FY26) के नतीजे घोषित कर दिए हैं। सालाना आधार (YoY) पर कंपनी का मुनाफा 1.87% गिरकर 3,502 करोड़ रुपए रहा है। पिछले साल इसी तिमाही में यह आंकड़ा 3,569 करोड़ रुपए था। हालांकि, पिछली तिमाही (दिसंबर) के मुकाबले मुनाफे में 12% से ज्यादा की रिकवरी देखने को मिली है। पिछली यानी अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में मुनाफा 3,119 करोड़ रुपए था। विप्रो ने 16 अप्रैल को नतीजे जारी किए हैं। सालाना आधार पर रेवेन्यू 8% बढ़ा 15,000 करोड़ रुपए के शेयर बायबैक करेगी विप्रो विप्रो के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 15,000 करोड़ रुपए के शेयर बायबैक करने की मंजूरी दे दी है। कंपनी यह शेयर उन निवेशकों से खरीदेगी जिनके पास रिकॉर्ड डेट तक विप्रो के स्टॉक होंगे। विप्रो ने इस बायबैक के लिए प्रति शेयर 250 रुपए की कीमत तय की है। BSE पर बुधवार को कंपनी का शेयर 210.20 रुपए पर बंद हुआ था। इस लिहाज से कंपनी अपने निवेशकों को मौजूदा बाजार भाव से लगभग 19% ज्यादा (प्रीमियम) दाम दे रही है। इसका सीधा फायदा उन शेयरधारकों को होगा जो अपने शेयर कंपनी को वापस बेचेंगे। कुल 60 करोड़ शेयर वापस खरीदेगी कंपनी विप्रो कुल 60 करोड़ शेयर वापस खरीदेगी। यह कंपनी की कुल शेयर कैपिटल का 5.7% हिस्सा है। हालांकि, इस बायबैक को अभी कंपनी के शेयरधारकों की मंजूरी मिलना बाकी है। इसके बाद ही इसकी अंतिम तारीख (रिकॉर्ड डेट) तय की जाएगी। टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है विप्रो विप्रो लिमिटेड एक लीडिंग टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसलटिंग कंपनी है। 65 देशों में इसकी प्रेजेंस है। अजीम प्रेमजी को 1966 में 21 साल की उम्र में अपने पिता से विप्रो का कंट्रोल विरासत में मिला था। प्रेमजी ने साबुन और वेजिटेबिल ऑयल का कारोबार करने वाली कंपनी वेस्टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोडक्ट्स लिमिटेड को अमेरिकन कंपनी सेंटिनल कंप्यूटर कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर 1980 में IT कंपनी के तौर पर इंट्रोड्यूस कराया। नॉलेज पार्ट: बायबैक क्या होता है? बायबैक का मतलब जब कोई कंपनी अपने शेयरों को बाजार से वापस खरीदती है। बायबैक कब और क्यों किया जाता है? बायबैक आमतौर पर तब किया जाता है जब किसी कंपनी के पास कैश पैसा हो। यानी वह इस पैसे से बाजार में अपने शेयरों को वापस खरीदती है। इसका कोई समय या नियम नहीं है कि कब करना चाहिए या क्यों करना चाहिए। कंपनी के ऊपर है कि उसे जब लगे कि उसके पास कैश है, वह कर सकती है। बायबैक इसलिए भी किया जाता है क्योंकि इससे कंपनी में प्रमोटर की होल्डिंग बढ़ जाती है। क्या होता है टेंडर ऑफर और रिकॉर्ड डेट? टेंडर ऑफर: इसमें कंपनी निवेशकों को एक फॉर्म भेजती है और उनसे पूछती है कि क्या वे अपने शेयर तय कीमत पर बेचना चाहते हैं। यह ओपन मार्केट बायबैक से अलग होता है क्योंकि इसमें कीमत पहले से फिक्स होती है। रिकॉर्ड डेट: यह वह तारीख होती है जिस दिन तक आपके डीमैट खाते में शेयर होने जरूरी हैं। अगर आप रिकॉर्ड डेट के बाद शेयर खरीदते हैं, तो आप बायबैक का फायदा नहीं उठा पाएंगे।
