लालच ने छीनी मासूम की मदद:दुर्लभ बीमारी से पीड़ित बच्ची की मदद के लिए यूट्यूबर्स ने जुटाए एक लाख रुपए लेकिन दिए नहीं

दंतेवाड़ा की 14 वर्षीय जागेश्वरी को बीती रात एम्स में भर्ती कराया गया है। जागेश्वरी त्वचा पर कांटों जैसी मोटी परतें बनने वाली बीमारी ‘इकथियोसिस हिस्ट्रिक्स’ से पीड़ित है। जागेश्वरी को छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पहल के बाद दोबारा एम्स में भर्ती कराया गया है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है। बाल आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा के स्वत: संज्ञान लेते हुए जागेश्वरी को एम्स में भर्ती कराया। जानिए उन्हीं की जुबानी, पूरी कहानी… फर्स्ट पर्सन – वर्णिका शर्मा, अध्यक्ष- बाल आयोग यू-ट्यूबर्स ने ठग के पैसे खुद पर किए खर्च दंतेवाड़ा और बीजापुर के बीच 20-30 किमी अंदर गांव में एक बच्ची पिछले 8-10 सालों से बेहद दुर्लभ और गंभीर त्वचा रोग से पीड़ित है। इस अजीबोगरीब बीमारी के कारण बच्ची का शरीर ‘पत्थर’ की तरह सख्त हो गया है और त्वचा पेड़ की छाल की तरह बन गई है। कुछ यूट्यूबर्स जब उसके गांव गए तो उन्होंने बच्ची का वीडियो बनाया और फिर अपने चैनल के माध्यम से उसकी मदद के नाम पर पैसे मांगने लगे। सोशल मीडिया में वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें पैसे तो मिले, लेकिन उस पैसे को उन्होंने बच्ची को नहीं दिया। जब इसकी जानकारी हमें हुई तब हमने दंतेवाड़ा एसपी गौरव राय को इसके बारे में जानकारी दी। एसपी ने मामले की जांच कराई और दो लोगों को हिरासत ​में लिया। इसके बाद दोनों से 84 हजार रुपए बरामद की गई। इसके बाद सोमवार को हमारी टीम बच्ची के गांव पहुंची। इसके बाद टीम बच्ची का रेस्क्यू कर रात करीब 7.30 एम्स पहुंची। मैंने खुद एम्स में जाकर बच्ची के सही इलाज के लिए डॉक्टरों की एक आपात बैठक ली। मैंने एम्स की टीम से यह भी कहा है कि अगर बच्ची को दिल्ली एम्स जैसे संस्थान में भर्ती करने की जरूरत हो तो उच्च अधिकारियों से बात की जाएगी। मां का दर्द… जन्म के 3 माह बाद ही त्वचा में कांटों जैसा उभार दिखा अप्रैल 2012 में जन्म के करीब 3 महीने बाद ही बेटी के पैरों की त्वचा पर छोटे-छोटे कांटों जैसे उभार दिखाई देने लगे थे। परिवार को बीमारी की जानकारी नहीं थी। इसलिए शुरू में इसे किसी तंत्र-मंत्र या बुरी नजर का असर समझकर कई जगह झाड़-फूंक कराया गया। लेकिन बीमारी समय के साथ और बढ़ती गई। मां के मुताबिक, जब वह घर से बाहर खेलने जाती थी तो आसपास के बच्चे उसे देखकर चिढ़ाते थे। इससे परेशान होकर उसने बाहर निकलना और लोगों से मिलना-जुलना भी कम कर दिया। -जैसा कि जागेश्वरी की मां सुबी ने भास्कर को बताया। डर्मेटोलॉजिस्ट की टीम कर रही निगरानी एम्स में बच्ची के इलाज की जिम्मेदारी डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. नम्रता छबड़ा और उनकी टीम को सौंपी गई है। डॉ. नम्रता की टीम ने विशेष निगरानी के साथ प्रारंभिक जांच और इलाज भी शुरू कर दिया है। मिली जानकारी के अनुसार प्रारंभिक चरण में त्वचा की विस्तृत जांच कर बीमारी की प्रकृति और कारण समझे जाएंगे। इसके बाद जरूरत अनुसार कुछ जांचें कराई जाएंगी ताकि त्वचा संबंधी किसी दुर्लभ या गंभीर स्थिति की पुष्टि की जा सके। शुरुआती उपचार में त्वचा को नमी देना, विशेष क्रीम व दवाओं का उपयोग, संक्रमण की रोकथाम और त्वचा की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाएगा। 2019 में आई थी अंबेडकर अस्पताल: अंबेडकर अस्पताल के त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मृत्युंजय सिंह ने बताया कि बच्ची को इलाज के लिए साल 2019 में अंबेडकर अस्पताल लाया गया था। उसे इकथियोसिस कांटों नाम की बेहद दुर्लभ बीमारी है। इसमें त्वचा अधिक सूखी होकर मोटी परतों में बदल जाती है और कई जगह फटने भी लगती है। यह बीमारी जानलेवा नहीं होती। ये होता है बीमारी का कारण
एम्स के डॉक्टरों के अनुसार, इकथियोसिस हिस्ट्रिक्स मुख्य रूप से आनुवंशिक कारणों से होता है। आमतौर पर यह ऑटोसोमल डॉमिनेट पैटर्न में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चल सकता है, हालांकि कई मामलों में बिना किसी पारिवारिक इतिहास के जीन में अचानक हुए बदलाव के कारण यह बीमारी विकसित हो जाती है। यह रोग अक्सर KRT1 तथा कुछ प्रकारों में GJB2 जीन में होने वाले परिवर्तन से जुड़ा पाया गया है।

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