रेत के लिए उजाड़ दिया श्मशान, 10 कंकाल मिले:फिर भी नहीं रुका खनन; ग्रामीण बोले- मौत से ज्यादा मरने के बाद का डर

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में महानदी किनारे बसे खरेंगा गांव के श्मशान घाट में इन दिनों लोग अपने दफनाए गए परिजनों की जगह तलाश रहे हैं। वजह ये है कि अवैध रेत खनन के लिए यहां 6-7 फीट गहरी कब्रें खोद दी गईं और 10 मानव कंकाल बाहर आ गए। गांव वालों का कहना है कि, प्रशासन ने कंकालों को दोबारा दफना दिया, लेकिन अब किसी को नहीं पता कि उनके अपने कहां हैं। हैरानी की बात यह है कि, 10 मानव कंकाल मिलने के बाद भी उसी रात फिर रेत की खुदाई की गई। ग्रामीणों ने कहा कि अब उन्हें मौत से नहीं, बल्कि इस बात से डर लगने लगा है कि कहीं मरने के बाद उनकी कब्र भी न खोद दी जाए। दैनिक भास्कर की टीम इस घटना के अगले दिन धमतरी जिले के खरेंगा गांव पहुंची। गांव वालों के आरोप, श्मशान घाट की हालत और अवैध खनन के निशानों को करीब से देखा। मौके पर जो तस्वीर सामने आई, वह सिर्फ अवैध खनन की नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं और उनके पूर्वजों के सम्मान से जुड़ी थी। पढ़ें ये रिपोर्ट पहले देखे तस्वीरें… ग्राम खरेंगा (धमतरी)। दोपहर का वक्त है। तापमान करीब 44 डिग्री के आसपास है। महानदी किनारे बने खरेंगा के श्मशान घाट में पहुंचते ही दूर-दूर तक रेत के ऊंचे ढेर और गहरे गड्ढे दिखाई देते हैं। कुछ गड्ढे इतने बड़े हैं कि उनमें आसानी से एक ट्रैक्टर उतर सकता है। इन्हीं गड्ढों के बीच वह जगह है जहां गांव के लोग पीढ़ियों से अपने परिजनों को दफनाते आए हैं। गुरुवार (28 मई) को इसी श्मशान घाट में अवैध रेत खनन के दौरान 10 से ज्यादा मानव कंकाल बाहर निकल आए थे। हमारी टीम मौके पर पहुंची तो गांव के लोग अब भी उसी घटना की चर्चा कर रहे थे। कोई प्रशासन से नाराज था, कोई रेत माफियाओं पर गुस्सा निकाल रहा था और कुछ लोग ऐसे भी थे जो यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि जिन लोगों को उन्होंने सालों पहले यहां दफनाया था, उनके अवशेष अब आखिर कहां हैं। श्मशान घाट की तरफ जाते समय गांव के कुछ लोग रास्ते में ही मिल गए। उन्होंने सबसे पहले हमें उस जगह पर ले जाकर खड़ा किया जहां एक दिन पहले कंकाल मिले थे। अब वहां रेत के बड़े ढेर और कई गड्डे दिखाई दे रहे है। ग्रामीण बताते हैं कि प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर सभी कंकालों को दोबारा दफना दिया। लेकिन समस्या यह है कि किसी को नहीं पता कि किसका कंकाल कहां दफन किया गया। गांव के एक बुजुर्ग ने रेत के ढेर की तरफ देखते हुए कहा, ‘यहीं कहीं हमारे लोग होंगे, लेकिन कौन कहां है, अब कोई नहीं जानता।’ जब पूरे गांव को पता चला- ‘श्मशान में कंकाल बाहर आ गया’ ग्रामीणों के मुताबिक, गुरुवार को मनरेगा का काम चल रहा था। इसी दौरान कुछ लोगों ने देखा कि श्मशान घाट के पास खुदाई वाले हिस्से में हड्डियां दिखाई दे रही हैं। पहले लोगों को लगा कि शायद जानवरों के अवशेष होंगे, लेकिन जब पास जाकर देखा तो मामला कुछ और ही निकला। थोड़ी ही देर में खबर पूरे गांव में फैल गई कि श्मशान घाट से मानव कंकाल बाहर निकल आए हैं। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। जिसने भी ये सब देखा, वो हैरान रह गया। कई जगहों पर हड्डियां बिखरी हुई थीं। कुछ कंकाल लगभग पूरे दिखाई दे रहे थे। ‘अब तो मौत से ज्यादा मौत के बाद का डर’ श्मशान के पास बैठी बुजुर्ग देवला बाई साहू की आंखों में गुस्से और दुख दोनों दिखाई देते हैं। वे कहती हैं कि गांव के बुजुर्गों ने उन्हें पाल-पोसकर बड़ा किया था। उनकी मौत के बाद पूरे सम्मान के साथ यहीं अंतिम विदाई दी गई थी। लेकिन रेत के लालच में उन्हीं की कब्रें खोद दी गईं। देवला बाई कहती हैं, “जिस दुख को हम सालों पहले भूलने की कोशिश कर चुके थे, वह फिर से सामने आ गया है। जिन लोगों को सम्मान के साथ दफनाया था, उनके कंकाल रेत में बिखरे पड़े थे। इससे बड़ा दुख क्या हो सकता है।” वे कहती हैं, “अब तो मरने से भी डर लगता है। अगर यहां हमें दफनाया गया तो हमारी लाश को भी रेत माफिया खोदकर बाहर निकाल देंगे। मरने के बाद भी चैन नहीं मिलेगा।” उनका आरोप है कि गांव में लंबे समय से अवैध खनन हो रहा है और इसकी जानकारी नेताओं तथा अधिकारियों को भी है। सब जानते हैं कि यहां रेत निकल रही है, लेकिन कोई देखने तक नहीं आया। जब 10 कंकाल बाहर निकल गए तब भी कोई नेता गांव नहीं पहुंचा। साड़ी से हुई पहचान, निकला सास का कंकाल भीड़ में मौजूद लोकेश्वरी साहू बार-बार एक ही बात दोहरा रही थीं- “ये हमारे साथ नहीं होना चाहिए था।” लोकेश्वरी गांव की पंच हैं। उनकी सास का निधन इसी साल 23 मार्च को हुआ था। वे बताती हैं, “जब कंकाल मिलने की खबर मिली तो मैं भी यहां आई। एक आधा गला हुआ कंकाल पड़ा था। उसके पास पीले रंग की साड़ी का कपड़ा दिखाई दे रहा था। उसी साड़ी से पहचान हुई कि यह मेरी सास का शव है।” वे कहती हैं कि उस वक्त पूरा परिवार रो पड़ा। “हमने उन्हें पूरे सम्मान के साथ दफनाया था। बाद में प्रशासन ने कंकाल दोबारा दफना दिया, लेकिन अब हमें नहीं पता कि उन्हें कहां दफनाया गया है।” ग्रामीण बोले- अपनों के कंकाल कहां दफनाए घटना के अगले दिन भी कई ग्रामीण श्मशान घाट पहुंचे थे। 60 वर्षीय राजेन्द्र कुमार भारती भी उन्हीं लोगों में शामिल थे। वे एक पुरानी कब्र के पास खड़े होकर हाथ जोड़ रहे थे। राजेन्द्र बताते हैं, “मेरे पैदा होने से पहले से गांव में यही परंपरा है कि मृत लोगों को यहीं दफनाया जाता है। यह श्मशान भूमि है।” यहां शव बहाने की परंपरा नहीं है। “हम लोग 6 से 7 फीट गहरा गड्ढा खोदकर अंतिम संस्कार करते हैं। फिर मिट्टी और रेत डालकर विदाई देते हैं। लेकिन अब समझ नहीं आ रहा कि जिन लोगों को यहां छोड़ा था, वे अब कहां हैं।” वे आसपास बने गहरे गड्ढों की ओर इशारा करते हुए कहते हैं, “यहां खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद रात के अंधेरे में रेत निकाली गई। माफियाओं ने श्मशान तक को नहीं छोड़ा।” राजेन्द्र से कुछ दूरी पर गांव के उपसरपंच डिसेन्द्र साहू श्मशान घाट में इधर-उधर घूमते दिखाई दिए। वे उन निशानों को तलाश रहे थे, जिनसे यह पता चल सके कि प्रशासन ने बाहर निकले कंकालों को दोबारा कहां दफनाया है। डिसेन्द्र बताते हैं, “हमें लोगों ने फोन करके बताया कि श्मशान खोदकर रेत निकाली जा रही है और कंकाल बाहर आ गए हैं। जब हम यहां पहुंचे तो करीब 10 कंकाल दिखाई दिए। उनमें से दो ऐसे थे जो पूरी तरह गले भी नहीं थे। आसपास बदबू फैली हुई थी।” गांव के लड़कों को मजदूर बना रहे माफिया ग्राम व्यवस्था समिति के सचिव तामेश्वर साहू का आरोप है कि, अवैध खनन करने वाले लोग गांव के युवाओं का इस्तेमाल करते हैं। “17-18 साल के लड़कों को पहले मजदूरी पर रखते हैं। बाद में उन्हीं से ट्रैक्टर चलवाते हैं। कई के पास लाइसेंस भी नहीं होता।” तामेश्वर कहते हैं कि इससे गांव के लोगों के लिए विरोध करना मुश्किल हो जाता है। “सामने अपना ही गांव का लड़का दिखाई देता है, इसलिए लोग झगड़ा नहीं करना चाहते। असली लोग पीछे रहते हैं।” वे बताते हैं कि कई बार शिकायतें की गईं। प्रशासन आता है, कार्रवाई का भरोसा देता है और एक-दो दिन खनन रुक जाता है। लेकिन उसके बाद फिर रात में ट्रैक्टर चलने लगते हैं। शिकायतें हुईं, लेकिन खनन नहीं रुका ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब अवैध खनन की शिकायत हुई हो। गांव की सरपंच नीलम साहू बताती हैं कि पंचायत और ग्राम विकास समिति कई बार बैठक कर चुकी है। मुनादी कराई गई थी कि श्मशान घाट में रेत खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। सूचना देने वाले को 2 हजार रुपए इनाम देने की घोषणा भी की गई थी। लेकिन इसके बावजूद खनन जारी रहा। हैरानी की बात यह है कि 10 कंकाल निकलने के बाद भी उसी रात फिर रेत निकाली गई। आज भी दूसरे रास्ते से गाड़ियां निकाली गई हैं। केवल 5 एकड़ श्मशान, फिर भी वहीं पहुंच गए खनन करने वाले ग्राम समिति के प्रमुख सुहास साहू बताते हैं कि, गांव में महानदी का लगभग 50 से 60 एकड़ क्षेत्र है। इसमें सिर्फ 5 एकड़ जमीन श्मशान के लिए सुरक्षित है। बाकी बड़ा इलाका खाली पड़ा है। इसके बावजूद खुदाई वहीं की गई जहां लोगों के पूर्वज दफन हैं। वे कहते हैं कि बिना संरक्षण के ऐसा संभव नहीं है। कुछ कहो तो घर आकर धमकाते हैं। ट्रैक्टरों में नंबर प्लेट तक नहीं लगी होती। पंचायत में खड़े मिले जब्त ट्रैक्टर श्मशान घाट से निकलने के बाद भास्कर टीम पंचायत भवन भी पहुंची। यहीं पर ग्रामीणों ने कुछ ट्रैक्टर जब्त कर रखे गए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इन्हीं ट्रैक्टरों से रेत निकाली जा रही थी। मौके पर खड़े कई ट्रैक्टरों में नंबर प्लेट नहीं थी। ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय इन्हीं वाहनों से रेत का परिवहन किया जाता है। कलेक्टर बोले- 5 ट्रैक्टर जब्त, माइनिंग इंस्पेक्टर को नोटिस धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने बताया कि, मामले में 5 ट्रैक्टर जब्त किए गए हैं। संबंधित क्षेत्र के माइनिंग इंस्पेक्टर को कारण बताओ (शोकॉज) नोटिस जारी किया गया है। कलेक्टर ने कहा कि जिस जगह रेत भंडारण की अनुमति दी गई थी, उसे भी निरस्त कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि एनजीटी के आदेश के मुताबिक 15 जून तक सभी रेत खदानों को बंद किया जाना है। अविनाश मिश्रा के मुताबिक जिन क्षेत्रों में खनन की अनुमति है, वहां दोबारा सीमांकन कराया जाएगा। साथ ही अवैध रेत खनन और परिवहन के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। सबसे बड़ा दर्द- अपनों की कब्रों की पहचान खत्म हो गई खरेंगा गांव में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की नहीं है कि कितनी रेत निकली या कितने ट्रैक्टर पकड़े गए। लोगों का सबसे बड़ा दर्द यह है कि जिन माता-पिता, दादा-दादी और रिश्तेदारों को उन्होंने वर्षों पहले पूरे सम्मान के साथ यहां दफनाया था, उनकी कब्रों की पहचान अब खत्म हो चुकी है। प्रशासन ने कंकालों को दोबारा दफना तो दिया, लेकिन अब किसी को नहीं पता कि उसके अपने किस जगह हैं। महानदी किनारे खड़े एक ग्रामीण ने जाते-जाते बस इतना कहा, “रेत तो फिर आ जाएगी, लेकिन जिन लोगों की याद में हम यहां आते थे, उनकी जगह अब हम कैसे पहचानेंगे?” यही सवाल आज पूरे खरेंगा गांव के सामने खड़ा है। ……………. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… धमतरी में अवैध रेत खनन से 10 कंकाल निकले: महानदी किनारे प्रतिबंधित क्षेत्र में उत्खनन का आरोप, ग्रामीणों में आक्रोश, रेत से भरे वाहन पकड़े धमतरी जिले के खरेंगा गांव में अवैध रेत उत्खनन का गंभीर मामला सामने आया है। महानदी किनारे स्थित श्मशान घाट से अवैध खनन के दौरान 10 मानव कंकाल बाहर निकल आए। घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया है और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। पढ़ें पूरी खबर…

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