भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स में दूसरा गोल्ड:शर्मिला धनखड़ ने शॉट पुट में मेडल जीता, हाई जंप में सिल्वर जीतने वाले सर्वेश कुशारे पहले भारतीय

भारत की शर्मिला धनकड़ ने सोमवार को कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं के पैरा शॉट पुट F57 इवेंट में गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने 9.81 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो कर यह उपलब्धि हासिल की। यह मौजूदा खेलों में भारत का दूसरा गोल्ड मेडल है। इसी इवेंट में भारत की शिल्पा के. शायला ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। F57 कैटेगरी में उन पैरा एथलीट्स को शामिल किया जाता है, जिनके निचले अंग प्रभावित होते हैं या जिनकी मांसपेशियों की ताकत कम होती है। भारत के मेडल टैली में कुल 10 मेडल हो गए हैं और टीम आठवें स्थान पर है। ऑस्ट्रेलिया 26 गोल्ड सहित 59 मेडल के साथ पहले स्थान पर है। अन्य इवेंट्स में हाई जंप में सर्वेश कुशारे और वेटलिफ्टिंग के 79 किलोग्राम वर्ग में अजय बाबू ने सिल्वर मेडल जीता। वहीं, बिंदियारानी देवी ने 58 किलोग्राम वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया, जबकि ज्ञानेश्वरी यादव ने 53 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीता। शर्मिला धनखड़ ने घर बेचकर शुरू की ट्रेनिंग शर्मिला धनखड़ हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के चित्रौली गांव की रहने वाली हैं। 2 साल की उम्र में पोलियो की शिकार हो गई थीं, जिससे उनका एक पैर प्रभावित हो गया। पिता छोटे किसान थे और मां दृष्टिबाधित हैं। बेहतर इलाज नहीं हो सका। आर्थिक तंगी के बीच कम उम्र में उनकी शादी कर दी गई। शर्मिला के लिए पैरा एथलेटिक्स का सफर आसान नहीं था। 34 साल की उम्र में उन्होंने कोच टेकचंद और देवेंद्र के मार्गदर्शन में F57 कैटेगरी के सीटेड शॉट पुट इवेंट की ट्रेनिंग शुरू की। आर्थिक तंगी इतनी थी कि 2023 में ट्रेनिंग का खर्च जुटाने के लिए उन्होंने अपना घर बेच दिया। इसके बाद परिवार किराए के मकान में रहने लगा, लेकिन शर्मिला ने अभ्यास नहीं छोड़ा। दूसरी शादी के बाद मिली नई राह 26 साल की उम्र में पति ने उन्हें घर से निकाल दिया। तब तक उनकी दो बेटियां हो चुकी थीं। वह दोनों बेटियों को लेकर मायके लौट आईं। 28 साल की उम्र में उन्होंने अजीत से दूसरी शादी की। अखबार में पैरा एथलीट्स की खबर पढ़ने के बाद अजीत ने उन्हें पैरा एथलेटिक्स में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया और हर कदम पर उनका साथ दिया। शर्मिला की पूरी कहानी जानने के लिए यह भी पढ़ें… शिल्पा शायला को नाटकीय घटनाक्रम के बाद मिला ब्रॉन्ज शिल्पा शायला ने महिलाओं के शॉट पुट F57 इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता। हालांकि, उनका पदक नाटकीय घटनाक्रम के बाद पक्का हुआ। शिल्पा ने 7.26 मीटर का थ्रो कर अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था, लेकिन शुरुआती नतीजों में वह चौथे स्थान पर थीं। नाइजीरिया की यूचेरिया इयियाजी को ब्रॉन्ज मेडल दिया गया था। भारत की आपत्ति के बाद अधिकारियों ने नाइजीरियाई खिलाड़ी के थ्रो की समीक्षा की। जांच में उनके एकमात्र वैध थ्रो को फाउल करार दिया गया। इसके बाद संशोधित नतीजों में शिल्पा को चौथे से तीसरे स्थान पर पहुंचाते हुए ब्रॉन्ज मेडल दे दिया गया। मेडल मिलने के बाद शिल्पा भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने साथी खिलाड़ी शर्मिला धनखड़ के साथ इस उपलब्धि का जश्न मनाया। हालांकि, नाइजीरिया इस फैसले के खिलाफ आधिकारिक आपत्ति दर्ज करा सकता है। यदि आपत्ति स्वीकार होती है, तो पदक तालिका में बदलाव भी संभव है। सर्वेश कुशारे ने जीता सिल्वर: 2.25 मीटर की जंप लगाई, 2.28 मीटर पार नहीं कर सके भारत के सर्वेश कुशारे ने कॉमनवेल्थ गेम्स के पुरुष हाई जंप फाइनल में सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने 2.25 मीटर की जंप लगाई, लेकिन 2.28 मीटर की ऊंचाई पार करने की तीनों कोशिशें नाकाम रहीं। जमैका के रोमेन बेकफोर्ड ने काउंटबैक के आधार पर गोल्ड मेडल जीता, जबकि इंग्लैंड के किमानी जैक ने 2.20 मीटर की जंप के साथ ब्रॉन्ज अपने नाम किया। डायमंड लीग में भी ब्रॉन्ज जीता था कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले भी सर्वेश शानदार फॉर्म में थे। इसी महीने मोनाको डायमंड लीग में उन्होंने 2.26 मीटर की जंप लगाकर तीसरा स्थान हासिल किया। इसके साथ ही वह डायमंड लीग में पोडियम पर पहुंचने वाले पहले भारतीय हाई जंपर बने। वह नीरज चोपड़ा, मुरली श्रीशंकर और विकास गौड़ा के बाद डायमंड लीग में टॉप-3 में जगह बनाने वाले चौथे भारतीय एथलीट भी हैं। पिछले महीने भुवनेश्वर में हुई नेशनल इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 2.31 मीटर की जंप लगाकर तेजस्विन शंकर का आठ साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी तोड़ा था। वह विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के पुरुष हाई जंप फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय भी हैं। मकई के छिलकों और कपास से बनाई लैंडिंग पिट, वहीं से शुरू हुआ सफर महाराष्ट्र के नासिक जिले के देवगांव के रहने वाले सर्वेश कुशारे का सफर संघर्षों से भरा रहा है। उनके पिता प्याज की खेती करते थे। बचपन में उन्होंने खेत में ही मकई के छिलकों, कपास और खेती के दूसरे अवशेषों से अस्थायी लैंडिंग पिट तैयार किया, ताकि सर्वेश अभ्यास कर सकें। सीमित संसाधनों के बावजूद सर्वेश ने मेहनत जारी रखी और अब उसी संघर्ष का इनाम कॉमनवेल्थ गेम्स के सिल्वर मेडल के रूप में मिला। अजय बाबू सिर्फ 1 किलो से गोल्ड मेडल से चूके अजय बाबू वल्लुरी ने पुरुष 79 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग इवेंट में सिल्वर मेडल जीता। आंध्र प्रदेश के इस युवा वेटलिफ्टर ने कुल 330 किलोग्राम (149+181) वजन उठाया और गोल्ड से महज 1 किलोग्राम पीछे रह गए। मलेशिया के एरी हिदायत मुहम्मद ने 331 किलोग्राम के गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता, जबकि इंग्लैंड के क्रिस मरे 325 किलोग्राम के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीत सके। स्नैच में रिकॉर्ड, क्लीन एंड जर्क में पलटा मुकाबला अजय ने स्नैच में 149 किलोग्राम वजन उठाकर गेम्स रिकॉर्ड बनाया और इस राउंड के बाद पहले स्थान पर रहे। क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 181 किलोग्राम वजन उठाकर रिकॉर्ड की बराबरी भी कर ली, लेकिन हिदायत ने आखिरी प्रयास में 184 किलोग्राम वजन उठाकर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया और कुल 331 किलोग्राम के साथ गोल्ड अपने नाम कर लिया। अजय को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। कॉमनवेल्थ चैंपियन से कॉमनवेल्थ गेम्स मेडल विजेता तक आंध्र प्रदेश के विजयनगरम के रहने वाले अजय बाबू ने 2025 कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में 335 किलोग्राम (152+183) के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ गोल्ड मेडल जीता था। इसी प्रदर्शन के दम पर उन्होंने 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालिफाई किया। अब उन्होंने गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर अपनी लगातार प्रगति को बरकरार रखा। बिंदियारानी देवी ने कुल 199KG वेट उठाकर ब्रॉन्ज जीता नाइजीरिया की रफियातु फोलाशाडे लावल ने 229 kg (103+126) वजन उठाकर गेम्स और कॉमनवेल्थ रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। कनाडा की एन सोफी टाशेरो ने 215 kg (94+121) वजन उठाकर सिल्वर अपने नाम किया। बिंदियारानी ने स्नैच में 83, 85 और 87 kg वजन उठाया। क्लीन एंड जर्क में उनका पहला 110 kg का प्रयास फेल रहा। उन्होंने दूसरे प्रयास में 112 kg उठाया। हालांकि तीसरे प्रयास में 116 kg नहीं उठा सकीं। यह 27 साल की बिंदियारानी का लगातार दूसरा कॉमनवेल्थ गेम्स मेडल है। उन्होंने बर्मिंघम 2022 में सिल्वर जीता था। ताइक्वांडो गेम से शुरुआत की इम्फाल की रहने वाली बिंदियारानी ने खेल करियर की शुरुआत ताइक्वांडो से की थी। 2008 से 2012 तक ताइक्वांडो में उन्होंने भारत को रिप्रेजेंट किया। हालांकि छोटी हाईट और मजबूत कद-काठी की वजह से कई कोच ने उन्हें वेटलिफ्टिंग की सलाह दी। 2013 में उन्होंने वेटलिफ्टिंग शुरू की। जल्द ही स्पोर्ट्स अथॉरिटी इंडिया के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (इम्फाल) में उनका सिलेक्शन हुआ। यहां से उन्होंने कई मेडल अपने नाम किए।
ज्ञानेश्वरी को सिल्वर सोमवार को ज्ञानेश्वरी यादव ने महिला 53 kg वर्ग में 199 kg (88+111) वजन उठाकर सिल्वर मेडल जीता था। उन्होंने स्नैच में 88 kg उठाकर गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। हालांकि, नाइजीरिया की ओनोमे ओमोलोला डिडीह ने 206 kg (93+113) वजन उठाकर गोल्ड अपने नाम किया। ज्ञानेश्वरी के पिता बॉडीबिल्डर, आर्थिक तंगी में छोड़ना पड़ा खेल छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव की रहने वाली ज्ञानेश्वरी यादव ने कम उम्र में ही वेटलिफ्टिंग की शुरुआत कर दी थी। उनके पिता बॉडीबिल्डर थे, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपना खेल छोड़कर इलेक्ट्रीशियन का काम करना पड़ा। पिता के साथ ट्रेनिंग करते हुए ज्ञानेश्वरी ने जूनियर स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन किया और नेशनल टीम में जगह बनाई। 2026 एशियन वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में उन्होंने स्नैच में सिल्वर और कुल प्रदर्शन में ब्रॉन्ज मेडल जीता। वेटलिफ्टिंग में भारत के 6 मेडल, मणिपुर के खिलाड़ियों के 3 अजय बाबू का सिल्वर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में वेटलिफ्टिंग में भारत का छठा मेडल है। इससे पहले मीराबाई चानू ने गोल्ड, ऋषिकांत सिंह, ज्ञानेश्वरी यादव और राजा मुथुपांडी ने सिल्वर, जबकि बिंदियारानी देवी ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। वहीं, पैरा पावरलिफ्टिंग में झंडू कुमार ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत का खाता खोला था। मणिपुर के खिलाड़ियों का प्रदर्शन भी शानदार रहा। राज्य के मीराबाई चानू, ऋषिकांत सिंह और बिंदियारानी देवी भारत के लिए मेडल जीत चुके हैं। यानी अब तक वेटलिफ्टिंग में भारत के 6 में से 3 मेडल अकेले मणिपुर के खिलाड़ियों ने दिलाए हैं। तेजस शिरसे पुरुषों के 110 मीटर हर्डल्स के फाइनल में आठवें स्थान पर रहे तेजस शिरसे पुरुषों के 110 मीटर बाधा दौड़ के फाइनल में 15.39 सेकेंड का समय लेकर आठवें स्थान पर रहे। इस रेस के दौरान वे चोट से जूझते हुए दिखाई दिए। पैरा एथलेटिक्स: राकेशभाई भट्ट और श्रेयांश त्रिवेदी पांचवें और छठे स्थान पर रहे
भारत के राकेशभाई भट्ट पुरुषों के 100 मीटर T38 फाइनल में 11.82 सेकेंड के समय के साथ पांचवें स्थान पर रहे, जबकि श्रेयांश त्रिवेदी 12.22 सेकेंड के समय के साथ छठे स्थान पर रहे। T38 पैरा-एथलेटिक्स का एक क्लासिफिकेशन है, जो ऐसे ट्रैक एथलीटों के लिए है जिन्हें चलने-फिरने और दौड़ने में हल्की-फुल्की तालमेल की समस्या होती है। स्वीमिंग में आर्यन सातवें, साजन आठवें स्थान पर रहे भारत के आर्यन नेहरा पुरुषों की 800 मीटर फ्रीस्टाइल के फाइनल में 8:07.26 मिनट का समय लेकर सातवें स्थान पर रहे। वहीं, साजन प्रकाश पुरुषों की 200 मीटर बटरफ्लाई के फाइनल में 1:58.05 मिनट के समय के साथ आठवें स्थान पर रहे। वह गोल्ड मेडल जीतने वाले न्यूजीलैंड के लुईस क्लेयरबर्ट से तीन सेकेंड पीछे रहे। सचिन और अंकुश बॉक्सिंग क्वार्टर फाइनल में भारतीय बॉक्सर सचिन सिवाच ने मेंस 60 kg के राउंड ऑफ-16 मुकाबले में इंग्लैंड के विलियम हेविट को 4-1 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। अब उनका सामना बोत्सवाना के ट्रेजर मोरेमी से होगा। वहीं अंकुश ने 80 kg में एंटीगुआ और बारबुडा के जलान जान को 5-0 से हराकर अंतिम-8 में प्रवेश किया। —————————————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… कॉमनवेल्थ गेम्स का पांचवां दिन:निरुपमा देवी सेरम और हरजिंदर कौर गोल्ड के लिए उतरेंगी; भारतीय खिलाड़ी 5 खेलों में चुनौती देंगे कॉमनवेल्थ गेम्स के पांचवें दिन भारतीय खिलाड़ी स्विमिंग, एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग और पैरा स्विमिंग में चुनौती पेश करेंगे। टीम की सबसे ज्यादा उम्मीदें वेटलिफ्टिंग से रहेंगी। निरुपमा देवी सेरम महिला 63 kg और हरजिंदर कौर महिला 69 kg फाइनल में गोल्ड के लिए उतरेंगी। पूरी खबर

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