बेटियां बोलीं-पिता ने मां को NDPS केस में भिजवाया जेल:भरण-पोषण से बचने झूठे केस में फंसाया; महिला आयोग ने कहा-पुलिस जांच का दायरा बढ़ाए

छत्तीसगढ़ महिला आयोग की अध्यक्ष की टिप्पणी के बाद बिलासपुर की सरकंडा पुलिस की एनडीपीएस मामले में की गई कार्रवाई चर्चा में आ गई है। आयोग ने आशंका जताई है कि पारिवारिक विवाद और भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बचने के लिए पति ने अपनी पत्नी को झूठे मामले में फंसाया हो सकता है। इस मामले में महिला की दो बेटियों ने अपने पिता पर आरोप लगाया है कि उन्होंने भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बचने के लिए पुलिस के साथ मिलीभगत कर उनकी मां को कथित तौर पर झूठे एनडीपीएस केस में फंसाया। ऐसे में पिछले 6 महीने से महिला जेल में बंद है। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने पुलिस को जांच का दायरा बढ़ाकर सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच करने और वास्तविक तथ्यों का पता लगाने के निर्देश दिए हैं। बेटियों का आरोप- 6 महीने से जेल में हैं मां सुनवाई के दौरान दो बेटियों ने आयोग को बताया कि पिता साल 2006 से मेडिकल व्यवसाय से जुड़े हैं और साल 2013 से सरकंडा के अशोक नगर स्थित एक मेडिकल स्टोर का संचालन कर रहे थे। उनका आरोप है कि पिता ने बाद में मेडिकल स्टोर अपने भांजे के नाम बेचने का दावा केवल इसलिए किया, ताकि पत्नी और बेटियों को भरण-पोषण देने की जिम्मेदारी से बच सकें, जबकि वे आज भी उसी मेडिकल स्टोर में काम कर रहे हैं। बेटियों ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पिता ने पहले उनकी मां को झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी थी। बाद में घर की छत में नशीली दवाइयां रखवाकर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया गया। उनकी मां पिछले करीब 6 महीने से जेल में बंद है। महिला आयोग ने पुलिस जांच पर भी उठाए सवाल सुनवाई के दौरान मौजूद ASP ने एफआईआर और जब्ती से जुड़े दस्तावेज आयोग के सामने पेश किया। दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद आयोग ने पाया कि जब्त की गई दवाइयों के बैच नंबर के आधार पर यह जांच ही नहीं की गई कि दवाइयां किस डीलर से खरीदी गई थीं और उनकी सप्लाई चेन क्या थी। आयोग ने सरकंडा पुलिस को निर्देश दिए कि जब्त दवाइयों की दोबारा वैज्ञानिक और दस्तावेजी जांच कराई जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि उनका मेडिकल स्टोर से कोई संबंध है या नहीं। आयोग ने आवेदिका और उसके रिश्तेदारों से भी पूछताछ करने के निर्देश दिए, ताकि वास्तविक आरोपी तक पहुंचा जा सके और यदि महिला निर्दोष है तो उसे न्याय मिल सके। परिवार को आयोग की कानूनी सलाह आयोग ने पीड़ित बेटियों को सलाह दी कि वे परिवार न्यायालय में भरण-पोषण से जुड़े पुराने मामले को दोबारा खुलवाने, बकाया राशि की वसूली कराने और नियमित भरण-पोषण दिलाने के लिए आवेदन करें। आयोग ने यह भी कहा कि यदि पिता ने पहली पत्नी के रहते दूसरा विवाह किया है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई कराई जा सकती है। इधर, बच्चियों के मामा ने कहा कि बहन को सरकंडा पुलिस और बहनोई रामकिशोर ने प्लानिंग के तहत फंसाया है। बहन बेगुनाह है और रामकिशोर के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई किया जाए। इस मामले में पुलिसकर्मी शैलेंद सिंह भी शामिल हैं। आयोग में 47 मामलों की हुई सुनवाई बुधवार को छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में आयोजित जनसुनवाई में महिलाओं से जुड़े 47 मामलों की सुनवाई हुई। इस दौरान घरेलू हिंसा, भरण-पोषण, दूसरी शादी, कार्यस्थल पर विवाद, पुलिस जांच में लापरवाही और संपत्ति संबंधी मामलों पर सुनवाई हुई। आयोग ने अधिकतर मामलों में पक्षकारों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देने, पुलिस जांच में तेजी लाने, भरण-पोषण सुनिश्चित कराने और आपसी सहमति से मामलों के निराकरण के निर्देश दिए। दूसरी शादी और भरण-पोषण के मामलों पर भी सुनवाई सुनवाई के दौरान एक महिला ने आरोप लगाया कि उसके पति ने पहली शादी रहते दूसरी शादी कर ली और उसे भरण-पोषण भी नहीं दे रहा है। आयोग ने महिला को विवाह को शून्य घोषित कराने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की सलाह दी। एक अन्य मामले में सामाजिक स्तर पर समझौता होने के बाद महिला को 1 लाख रुपए दिए जाने की जानकारी आयोग को दी गई। आयोग ने सखी केंद्र के काउंसलर की मौजूदगी में महिला को उसका सामान दिलाने तथा पूरी प्रक्रिया की फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग कराने के निर्देश दिए।

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