सहसपुर लोहारा थाना क्षेत्र के 3 धान केंद्रों में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के संयुक्त जांच दल के औचक निरीक्षण ने कागजों पर चल रहे करोड़ों के खेल की पोल खोलकर रख दी है। विपणन वर्ष 2025- 26 के दौरान बासिनझोरी, बिरनपुरकला, और सहसपुर लोहारा में कुल 2441.92 क्विंटल धान और 21,982 नग खाली बारदाने सीधे तौर पर गायब कर दिया गया। इस महाघोटाले से शासन को 81 लाख 19 हजार 502 रुपए की सीधी आर्थिक क्षति पहुंची है। खास बात यह है कि इन तीनों मामलों के केंद्र में समिति प्रबंधक गंगादास मानिकपुरी हैं, जिन्होंने अपने कम्प्यूटर ऑपरेटरों और फड़ प्रभारियों के साथ मिलकर इस अमानत में खयानत को अंजाम दिया। भौतिक सत्यापन में यह खुलासा हुआ है कि तीनों केंद्रों के सैकड़ों तौल पत्रकों में केवल किसानों के हस्ताक्षर कराए गए थे। तीन केंद्रों का पूरा गणित : कहां, कितना हुआ घपला.. तौल पत्रक में न फड़ प्रभारी के दस्तखत, न तौलक के, किसानों को फंसाने की थी साजिश
धान खरीदी के सरकारी सिस्टम में जिले का अब तक का सबसे शातिर और सोची-समझी साजिश वाला घोटाला है। जांच रिपोर्ट में खुलासा यह हुआ है कि धान खरीदी के दौरान तौल पत्रकों में केवल संबंधित किसानों के हस्ताक्षर हैं। खरीदी प्रभारी, फड़ प्रभारी और तौल करने वालों के हस्ताक्षर ही गायब हैं। प्रबंधक गंगादास समेत 6 आरोपी पर एफआईआर: सहसपुर लोहारा में प्रबंधक गंगादास, फड़ प्रभारी बलदाऊ डड़सेना, कंप्यूटर आपरेटर बिहारी राम साहू, बासिनझोरी के फड़ प्रभारी तुकाराम साहू, कंप्यूटर आपरेटर पीलूराम साहू और बिरनपुर कला के कंप्यूटर आपरेटर महावीर साहू के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। बीएनएस की धारा 318(4), 316(5) और 3(5) के तहत जुर्म दर्ज किया है। इनका है कहना- नीति और अनुबंध की उड़ाईं धज्जियां
नियम के मुताबिक, यदि केंद्र में धान की कमी थी या कोई समस्या थी, तो खरीदी प्रभारी को सक्षम अधिकारियों को लिखित में सूचना देनी थी। लेकिन आरोपियों ने ऐसा कुछ नहीं किया। इन्होंने धान उपार्जन नीति 2025-26 की कंडिका 15.9, 17.1 और अनुबंध की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन किया।
