खेल की दुनिया में कुछ कहानियां इतनी फिल्मी होती हैं कि उन पर यकीन करना मुश्किल होता है। ऐसी ही एक कहानी है ब्रिटेन के 35 वर्षीय टेनिस खिलाड़ी मार्कस विलिस की। 2016 में दुनिया के 772वें नंबर के खिलाड़ी विलिस ने क्वालिफायर से सफर शुरू कर विम्बलडन में रोजर फेडरर के खिलाफ मैच खेला था। हालांकि, वे मैच सीधे सेटों में हार गए थे, लेकिन फेडरर के सिर के ऊपर से लगाए गए उनके एक जादुई ‘लॉब शॉट’ ने उन्हें दुनिया भर में मशहूर कर दिया था। एक दशक बाद, विलिस फिर से विम्बलडन में लौटे हैं, लेकिन बिल्कुल नए रूप और नई भूमिका में। जब अरबपति खिलाड़ी फेडरर से भिड़े थे जंकफूड के शौकीन विलिस 10 साल पहले मुकाबला दो अलग-अलग दुनिया के लोगों के बीच था। एक तरफ दुनिया के सबसे अमीर खिलाड़ियों में शामिल फेडरर थे, तो दूसरी तरफ विलिस, जिन्होंने उस पूरे साल टेनिस से सिर्फ 24 हजार रुपए कमाए थे। वे अनफिट थे, जंक फूड के शौकीन थे और खेल छोड़ने वाले थे, लेकिन उनकी गर्लफ्रेंड ने उन्हें खेलते रहने के लिए मनाया था। फेडरर से मैच के बाद उन्हें कुछ समय तो खूब शोहरत मिली, टीवी पर इंटरव्यू हुए, लेकिन जल्द ही यह जादू खत्म हो गया। लगातार लगने वाली चोटों और डिप्रेशन के कारण विलिस ने साल 2018 में टेनिस को पूरी तरह अलविदा कह दिया। साल 2020 में कोरोना के दौरान जब पैसों की भारी किल्लत हुई, तो परिवार चलाने के लिए इस खिलाड़ी ने अपने भाई की कंस्ट्रक्शन कंपनी में ईंट बिछाने का काम किया।
कुछ समय बाद जब स्थितियां बदलीं, तो एक पारिवारिक मित्र ने उनके पेशेवर कमबैक का खर्च उठाने का फैसला किया। विलिस खुद दोबारा खेलने को लेकर दुविधा में थे, लेकिन पत्नी जेनी ने उनसे कहा, ‘जाओ और खेलो, जिंदगी में ऐसा मौका दोबारा नहीं मिलेगा।’ पत्नी के इसी भरोसे ने उन्हें फिर से कोर्ट पर उतारा। इस बार उन्होंने सिंगल्स के बजाय खुद को डबल्स खिलाड़ी के रूप में ढाला। अब वह दुनिया के 64वें नंबर के डबल्स खिलाड़ी हैं। अब जिंदगी में ड्रामा कम, जिम्मेदारी ज्यादा अब 35 वर्षीय विलिस चार बच्चों के पिता हैं। उनका पूरा दिन बच्चों को स्कूल छोड़ने, उनकी एक्टिविटीज और होमवर्क कराने में बीतता है। टेनिस के साथ-साथ वह अपना एक पॉडकास्ट भी चलाते हैं। विलिस कहते हैं, ‘अब मेरी जिंदगी में ड्रामा कम और गंभीरता ज्यादा है। मैं बस एक बेहतर खिलाड़ी, अच्छा पति और पिता बनने की कोशिश कर रहा हूं। फेडरर के खिलाफ उस मैच के अनुभव ने मुझे आज वो इंसान बनने में मदद की है, जो मैं हूं।’
