पहलगाम हमला- ड्रोन से पहुंचाए गए थे हथियार:NIA की चार्जशीट में खुलासा, खुफिया तंत्र की कमजोरी पर उठे सवाल

काश्मीर के पहलगाम के बैसरन मैदान में पिछले वर्ष हुए आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट ने कई अहम खुलासे किए हैं। जांच के अनुसार, सीमा पार से भेजे गए ड्रोन बारामूला जिले तक बिना पकड़े गए हथियार, गोला-बारूद और नकदी पहुंचाने में सफल रहे थे। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 2022 से 2024 के बीच खुफिया तंत्र में आई कमी ने आतंकियों को घाटी में बिना किसी बड़े संदेह के सक्रिय रहने का मौका दिया। अप्रैल 2025 में पहलगाम के लोकप्रिय पर्यटन स्थल बैसरन में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें अधिकांश पर्यटक थे। इस हमले के बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर सीमा पार स्थित आतंकी ढांचे को निशाना बनाया था। खेप में थे 15 लाख रुपए और चीनी ग्रेनेड NIA की चार्जशीट के मुताबिक, वर्ष 2024 की शुरुआत में बारामूला जिले के गोगल दारा जंगल क्षेत्र में आतंकियों को ड्रोन के जरिए हथियार और नकदी पहुंचाई गई थी। इस खेप में 20 पिस्तौल, 15 लाख रुपए नकद और त्रिकोण आकार के चीनी ग्रेनेड शामिल थे। जांच में सामने आया है कि आतंकवादी अब केवल नियंत्रण रेखा (LoC) के पारंपरिक घुसपैठ मार्गों पर निर्भर नहीं हैं। इसके बजाय वे मानवरहित हवाई वाहन (UAV) और ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे सुरक्षा घेरों को पार कर सीधे आतंकी मॉड्यूल तक हथियार और धनराशि पहुंचाई जा सके। अधिकारियों का मानना है कि बारामूला का गोगल दारा जंगल ड्रोन ड्रॉपिंग के लिए एक प्रमुख स्थान बन गया था, क्योंकि यह सीमा पार से सीधे दृष्टि क्षेत्र में आता है। आतंकी गतिविधियों का समय रहते पता नहीं चल सका चार्जशीट में आतंकियों की गतिविधियों का विस्तृत विवरण भी दिया गया है। जांच के अनुसार, हमले में शामिल आतंकी पहाड़ी और शहरी इलाकों से गुजरते रहे, लेकिन उनकी गतिविधियों का समय रहते पता नहीं चल सका। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस अवधि में तकनीकी खुफिया तंत्र पर अधिक निर्भरता और जमीनी स्तर पर मानव स्रोतों की उपेक्षा के कारण खुफिया तंत्र में एक बड़ा खालीपन पैदा हुआ। इसी वजह से आतंकी लक्ष्य की रेकी कर सके, ड्रोन से हथियार प्राप्त कर सके और हमला अंजाम देने में सफल रहे। विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया है कि सुरक्षा एजेंसियों को अपनी रणनीति की समीक्षा करनी चाहिए और गुर्जर तथा बकरवाल समुदायों के साथ भरोसे को फिर से मजबूत करना चाहिए। दशकों से ये दोनों समुदाय पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की आंख और कान माने जाते रहे हैं और आतंकवाद विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। चार्जशीट के बाद सुरक्षा तंत्र, मानव खुफिया नेटवर्क और ड्रोन आधारित आतंकी गतिविधियों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी और मानवीय दोनों तरह की खुफिया क्षमताओं को समान रूप से मजबूत करना होगा। पहलगाम हमले में इस्तेमाल मोबाइल कराची-लाहौर से आए थे इससे पहले 2 जून को NIA ने खुलासा किया था कि पहलगाम हमले में इस्तेमाल मोबाइल कराची-लाहौर से आए थे। NIA के मुताबिक हमले में शामिल आतंकियों का 28 जुलाई को एनकाउंटर हुआ था। इनके पास से ऑरेंज कलर का RedMi 9T और एक ब्लैक कलर का RedMi Note 12 बरामद हुआ था। NIA के मुताबिक दोनों फोन की जानकारी निकाली गई। इसमें सामने आया कि मोबाइल 2021 और 2023 में चीन की कंपनी Xiaomi की सप्लाई चेन के जरिए पाकिस्तान पहुंचाए गए थे। RedMi 9T कराची की कंपनी टेक सिराट प्राइवेट लिमिटेड ने इम्पोर्ट कराकर कराची डिलीवर कराया था। NIA ने बताया कि आतंकियों ने पहलगाम की बैसरन घाटी में हमले की प्लानिंग पहले से कर रखी थी। फोरेंसिक जांच के दौरान मोबाइल के नेविगेशन एप AlpineQuest में बैसरन की लोकेशन सेव मिली। साथ ही बैसरन घाटी के कई स्क्रीनशॉट भी मिले जो 15-16 अप्रैल को लिए गए थे। 22 अप्रैल को अटैक हुआ था। टूरिस्ट गाइड ने आतंकियों को देखा था, बता देते तो हमला नहीं होता ——————
ये खबर भी पढ़ें… NIA चार्जशीट में खुलासा- लश्कर ने करवाया था पहलगाम हमला:पाकिस्तान के कसूर में रहता है मास्टरमाइंड साजिद जट्‌ट कश्मीर के पहलगाम में पिछले साल 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में पाकिस्तान का हाथ था। यह खुलासा नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की चार्जशीट में हुआ है। हमले का मास्टरमाइंड लश्कर-ए-तैयबा आतंकी सैफुल्लाह उर्फ सैफुल्लाह साजिद जट्‌ट उर्फ लंगड़ा था। पूरी खबर पढ़ें…

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