पवन बोले- सनातन को मिटाने वाले मिट्टी में मिल जाएंगे:तिरुपति प्रसाद में मिलावट आइसबर्ग जैसा, इसके नीचे बहुत कुछ; आज SC में सुनवाई

आंध्र प्रदेश के श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर (तिरुपति मंदिर) के प्रसादम (लड्डुओं) में जानवरों की चर्बी मामले पर डिप्टी CM पवन कल्याण ने कहा- प्रसाद में मिलावट आइसबर्ग (छोटा सा हिस्सा) जैसा है। इसके नीचे बहुत कुछ है जिसकी जांच होनी चाहिए। दरअसल लड्डू विवाद सामने आने के बाद डिप्टी CM पवन कल्याण ने 11 दिन की प्रायश्चित दीक्षा ली थी। 3 अक्टूबर को दीक्षा खत्म होने के बाद उन्होंने वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन किए और बाद में एक जनसभा को संबोधित किया। पवन ने कहा- सनातन को मिटाने वाले खुद मिट्टी में मिल जाएंगे। मैं सनातन धर्म का पालन करता हूं और उसके लिए सब कुछ त्याग भी सकता हूं। उधर प्रसाद में चर्बी मामले पर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई होनी है। पहले यह सुनवाई 3 अक्टूबर को होनी थी। जो बाद में टल गई। 30 सितंबर की सुनवाई में जस्टिस बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा- ‘जब प्रसाद में पशु चर्बी होने की जांच CM चंद्रबाबू नायडू ने SIT को दी, तब उन्हें मीडिया में जाने की क्या जरूरत थी। कम से कम भगवान को तो राजनीति से दूर रखें।’ सुप्रीम कोर्ट तय करेगा इस मामले में SIT जांच होगी या नहीं
1 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश पुलिस ने मामले की SIT जांच रोक दी। राज्य के डीजीपी द्वारका तिरुमाला राव ने कहा कि अभी सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही है। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक ये तय किया जाएगा कि SIT जांच को आगे बढ़ाना है या नहीं। पिछली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- क्या सबूत है कि लड्‌डू बनाने में दूषित घी का इस्तेमाल हुआ
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, ‘जुलाई में लैब रिपोर्ट आई। वह स्पष्ट नहीं है। मुख्यमंत्री SIT जांच के आदेश देते हैं और फिर सितंबर में मीडिया के सामने बयान देते हैं। एक संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति ऐसा कैसे कर सकता है।’ कोर्ट ने तिरुपति मंदिर की ओर से पेश हुए वकील सिद्धार्थ लूथरा से पूछा- इस बात के क्या सबूत हैं कि लड्डू बनाने में दूषित घी का इस्तेमाल किया गया था। इस पर वकील ने कहा कि हम जांच कर रहे हैं। इसके बाद जस्टिस गवई ने पूछा, ‘फिर तुरंत प्रेस में जाने की क्या जरूरत थी? आपको धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।’ बेंच ने करीब 1 घंटे की सुनवाई के बाद कहा कि मामले की जांच SIT से ही कराएं या फिर किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से, इसके लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से हम सुझाव चाहते हैं। सभी याचिकाओं पर एक साथ 3 अक्टूबर को दोपहर 3:30 बजे सुनवाई करेंगे। पूरी खबर पढ़ें… 30 सितंबर को SIT ने तिरुमाला में फ्लोर मिल का निरीक्षण किया था
इससे पहले SIT ने 30 सितंबर को कई जगहों पर छानबीन की थी। SIT के अधिकारियों ने तिरुमाला में फ्लोर मिल का निरीक्षण किया। यहीं पर घी को स्टोर किया जाता है। इसी घी का इस्तेमाल लड्डू प्रसादम में होता है। SIT चीफ सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी और उनकी टीम ने तिरुमाला में घी के टैंकरों और तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) लैब की भी जांच-पड़ताल की। तिरुपति मंदिर में नंदिनी घी से लड्डू बन रहे, घी सप्लॉयर की GPS से निगरानी
तिरुपति मंदिर में लड्डू बनाने के लिए अब नंदिनी घी का इस्तेमाल किया जा रहा है। नंदिनी, कर्नाटक मिल्क फेडरेशन का लोकप्रिय ब्रांड है। विवाद के बीच एक महीने पहले ही तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने कर्नाटक मिल्क फेडरेशन को घी सप्लाई करने का कॉन्ट्रैक्ट दिया। कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर एमके जगदीश ने कहा, हमने अपनी गाड़ियों में GPS सिस्टम और जियो लोकेशन डिवाइस लगाई हैं। ये गाड़ियां मंदिर में घी सप्लाई करती हैं। GPS सिस्टम लगाने से हमें पता चलता है कि गाड़ी कहां-कहां रुकी है, ताकि मिलावट को रोका जा सके। कर्नाटक मिल्क फेडरेशन को 350 टन घी की सप्लाई का ठेका मिला है। यह विवाद कैसे सामने आया
कर्नाटक कोऑपरेटिव मिल्क फेडरेशन (KMF) पिछले 50 साल से रियायती दरों पर ट्रस्ट को घी दे रहा था। तिरुपति मंदिर में हर छह महीने में 1400 टन घी लगता है। जुलाई 2023 में कंपनी ने कम रेट में सप्लाई देने से मना कर दिया, जिसके बाद जगन सरकार (YSRCP) ने 5 फर्म को सप्लाई का काम दिया था। इनमें से एक तमिलनाडु के डिंडीगुल स्थित एआर डेयरी फूड्स भी है। इसके प्रोडक्ट में इसी साल जुलाई में गड़बड़ी मिली थी। TDP सरकार आई, जुलाई में सैंपल की जांच, चर्बी की पुष्टि
TDP सरकार ने जून 2024 में सीनियर IAS अधिकारी जे श्यामला राव को तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) का नया एक्जीक्यूटिव ऑफिसर अपॉइंट किया था। उन्होंने प्रसादम (लड्डू) की क्वॉलिटी जांच का आदेश दिया। इसके लिए एक कमेटी बनाई। प्रसाद के टेस्ट और क्वॉलिटी को बेहतर बनाने के लिए कमेटी ने कई सुझाव दिए। साथ ही घी की जांच के लिए नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB), गुजरात में सैंपल भेजे। जुलाई में सामने आई रिपोर्ट में फैट का जिक्र था। इसके बाद TTD ने तमिलनाडु के डिंडीगुल स्थित एआर डेयरी फूड्स की तरफ से भेजे गए घी के स्टॉक को वापस कर दिया और ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट में डाल दिया। इसके बाद TTD ने कर्नाटक मिल्क फेडरेशन से घी खरीदना शुरू कर दिया। पुराने सप्लायर से घी 320 रुपए प्रति किलोग्राम के रेट से खरीदा जाता था। अब तिरुपति ट्रस्ट कर्नाटक कोऑपरेटिव मिल्क फेडरेशन (KMF) से 475 रुपए प्रति किलोग्राम के रेट से घी खरीद रहा है। घी की शुद्धता का परीक्षण करने वाली प्रयोगशाला NDDB CALF (आणंद, गुजरात) ने तिरुपति को घी की शुद्धता की जांच करने के लिए एक मशीन दान करने पर सहमति दी है। इसकी लागत 75 लाख रुपए है। CM नायडू ने लैब रिपोर्ट सार्वजनिक की, विवाद बढ़ा
जुलाई में सामने आई रिपोर्ट में लड्डुओं में चर्बी की पुष्टि हो गई थी। हालांकि, टीडीपी ने दो महीने बाद रिपोर्ट सार्वजनिक की। CM नायडू ने 18 सितंबर को आरोप लगाया था कि पूर्व जगन सरकार में तिरुपति मंदिर के लड्डू में इस्तेमाल होने वाले घी में जानवरों की चर्बी और फिश ऑयल मिलाया गया था। TDP ने एक लैब रिपोर्ट दिखाकर अपने आरोपों की पुष्टि का दावा भी किया। नायडू ने कहा, जब बाजार में 500 रुपए किलो घी मिल रहा था, तब जगन सरकार ने 320 रु. किलो घी खरीदा। ऐसे में घी में सप्लायर की ओर से मिलावट होनी ही थी। जगन सरकार द्वारा कम दाम वाले घी को खरीदने की जांच हाेगी। पशु चर्बी वाले घी से बने लड्डुओं से तिरुपति मंदिर की पवित्रता पर दाग लगाया है। 300 साल पुराना किचन, ब्राह्मण ही बनाते हैं 3.5 लाख लड्‌डू तिरुपति मंदिर दुनिया के सबसे लोकप्रिय और अमीर धर्मस्थलों में से है। यहां हर दिन करीब 70 हजार श्रद्धालु भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन करते हैं। इसका प्रशासन तिरुपति तिरुमाला देवस्थानम (TTD) संभालता है। मंदिर परिसर में बनी 300 साल पुराने किचन ‘पोटू’ में शुद्ध देसी घी के रोज 3.50 लाख लड्‌डू बनते हैं। यह मंदिर का मुख्य प्रसाद है, जिसे करीब 200 ब्राह्मण बनाते हैं। लड्‌डू में शुद्ध बेसन, बूंदी, चीनी, काजू और शुद्ध घी होता है। ट्रस्ट ने करीब एक लाख लड्‌डू राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के वक्त अयोध्या भेजे थे। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… ईशा फाउंडेशन के खिलाफ जांच पर सुप्रीम कोर्ट की रोक: कहा- पुलिस आगे एक्शन न ले सुप्रीम कोर्ट ने 3 अक्टूबर को ईशा फाउंडेशन के खिलाफ पुलिस जांच के आदेश पर रोक लगा दी है। फाउंडेशन के खिलाफ रिटायर्ड प्रोफेसर एस कामराज ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। आरोप था कि आश्रम में उनकी बेटियों लता और गीता को बंधक बनाकर रखा गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें… बुलडोजर एक्शन पर फैसला आने तक सुप्रीम कोर्ट की रोक:कहा- तोड़फोड़ की तो मुआवजा दिया जाएगा बुलडोजर एक्शन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 1 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि फैसला आने तक देशभर में बुलडोजर एक्शन पर रोक जारी रहेगी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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