दिल्ली कैबिनेट ने सोमवार, 29 जून को नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब दिल्ली में ₹30 लाख तक की कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस से पूरी तरह छूट मिलेगी। यह फैसला राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण, खासकर सर्दियों के दौरान होने वाली गंभीर समस्या से निपटने और क्लीनर ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब इस पॉलिसी को उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस नई पॉलिसी को 1 जुलाई से लागू करने की योजना है और यह 31 मार्च 2030 तक प्रभावी रहेगी। किस गाड़ी पर कितनी सब्सिडी मिलेगी पॉलिसी में इलेक्ट्रिक कारों के लिए टैक्स छूट के अलावा अलग-अलग कैटेगरी के वाहनों के लिए खरीद इंसेंटिव यानी सब्सिडी की भी घोषणा की गई है… अधिकारियों ने साफ किया है कि हाइब्रिड वाहनों के लिए कोई सब्सिडी नहीं मिलेगी। यह पॉलिसी पूरी तरह से जीरो-इमिशन (शून्य-उत्सर्जन) वाहनों पर फोकस है। पेट्रोल-CNG वाहनों पर कब से रोक लगेगी पॉलिसी के तहत दिल्ली सरकार ने फेज्ड ट्रांजिशन यानी चरणबद्ध बदलाव का प्लान तैयार किया है… पॉलिसी से ₹15,000 करोड़ के निवेश की उम्मीद कैबिनेट के फैसले की घोषणा करते हुए CM रेखा गुप्ता ने कहा कि यह वास्तव में एक ऐतिहासिक दिन है। हमारा लक्ष्य दिल्ली ईवी पॉलिसी को 1 जुलाई से लागू करना है। उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद यह 31 मार्च 2030 तक लागू रहेगी। सरकार को अगले चार सालों में इस पॉलिसी के तहत करीब ₹15,000 करोड़ के लाभ और निवेश की उम्मीद है। इसमें से करीब ₹7,000 करोड़ इंसेंटिव पर खर्च किए जाएंगे, जबकि ₹8,000 करोड़ ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और टैक्स रियायतों के लिए रखे गए हैं। इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य ईवी को अपनाना, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाना, व्हीकल स्क्रैपिंग को बढ़ावा देना और व्हीकल पॉल्यूशन को कम करना है। 32,000 चार्जिंग पॉइंट्स बनेंगे, इंसेंटिव के लिए अलग पोर्टल ईवी ट्रांजिशन को सपोर्ट करने के लिए दिल्ली सरकार ने पूरी राजधानी में 32,000 चार्जिंग पॉइंट्स बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए जमीन की पहचान भी कर ली गई है। इसके साथ ही ईवी इंसेंटिव से जुड़े आवेदनों के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी डेवलप किया जाएगा। मुख्यमंत्री गुप्ता ने बताया कि इस पॉलिसी के दायरे में टू-व्हीलर्स, थ्री-व्हीलर्स, फोर-व्हीलर्स, N1 ट्रक्स और ग्रामीण सेवा वाहन शामिल हैं। खास बात यह है कि इस पॉलिसी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इंसेंटिव के लिए पात्र वाहनों की संख्या पर कोई कैप यानी सीमा नहीं लगाई गई है। क्या होते हैं N1 कैटेगरी के ट्रक्स? पॉलिसी में N1 कैटेगरी के इलेक्ट्रिक ट्रक्स के लिए ₹1 लाख की सब्सिडी तय की गई है। N1 कैटेगरी के अंतर्गत वे लाइट कॉमर्शियल व्हीकल्स (हल्के व्यावसायिक वाहन) आते हैं, जिन्हें सामान की ढुलाई या ट्रांसपोर्टेशन के लिए डिजाइन किया जाता है। इन वाहनों का अधिकतम ग्रॉस व्हीकल वेट यानी कुल वजन 3,500 किलोग्राम से ज्यादा नहीं होना चाहिए। आमतौर पर छोटे हाथी या इसी तरह के छोटे लोडिंग टेंपो इस कैटेगरी में आते हैं। ये खबर भी पढ़ें… बजाज पल्सर N125 भारत में बंद हुई: लॉन्च के 2 साल के भीतर कंपनी ने फैसला लिया; वजह- कम बिक्री और फीचर्स की कमी बजाज ऑटो ने भारत में अपनी पल्सर N125 बाइक को बंद कर दिया है। अक्टूबर 2024 में लॉन्च हुई यह बाइक भारतीय बाजार में दो साल भी पूरे नहीं कर पाई। कंपनी ने देश के डीलर्स को इसकी सप्लाई बंद कर दी है। पूरी खबर पढ़ें…
