छत्तीसगढ़ में विद्युत टैरिफ के वार्षिक संशोधन के बावजूद छत्तीसगढ़ सरकार ने आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार को न्यूनतम रखने के लिए कई स्तरों पर राहत और संरक्षण की व्यवस्था की है। राज्य में मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना, बिजली बिल समाधान योजना और पीएम सूर्यघर योजना जैसी पहलों के कारण अधिकांश उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव काफी सीमित रहेगा। नए टैरिफ में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि की गई है। हालांकि मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के कारण अधिकांश परिवारों पर अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा। प्रदेश के लगभग 51 लाख उपभोक्ताओं में से 14.5 लाख बीपीएल परिवारों को 30 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जा रही है। इसका पूरा खर्च राज्य सरकार उठा रही है। 400 यूनिट तक खपत वाले 26.5 लाख उपभोक्ता को 200 यूनिट तक की खपत पर 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। इससे लगभग 41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली दर वृद्धि का प्रभाव शून्य से लेकर मात्र 3.65 प्रतिशत तक ही होगा। प्रदेश में अभी 2×660 मेगावाट क्षमता के सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र का काम शुरू हो चुका है। इसकी पहली इकाई मार्च 2029 तक शुरू होने की संभावना है। मड़वा में 800 मेगावाट क्षमता के नए प्लांट की योजना पर भी कार्य चल रहा है। किसानों पर अतिरिक्त भार नहीं राज्य के 8.65 लाख कृषि उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा प्रभार में 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है, लेकिन इसकी प्रतिपूर्ति राज्य शासन सब्सिडी के रूप में कर रहा है। लगभग 66 हजार उपभोक्ता पीएम सूर्यघर योजना का लाभ प्राप्त कर चुके हैं, जिनमें से 16 हजार परिवारों का बिजली बिल शून्य हो गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार ने 12 मार्च 2026 से मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना लागू की गई है। लगभग 1328 करोड़ रुपये के बकाया देयकों का समाधान किया जा चुका है, जिसमें 749 करोड़ रुपये की राहत दी गई है। 10 किलोवाट से अधिक भार वाले घरेलू, गैर-घरेलू, औद्योगिक तथा सार्वजनिक उपयोगिता उपभोक्ताओं को ऑफ-पीक समय (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) बिजली उपयोग पर 5 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। बिजली कंपनी का राजस्व अंतर बढ़कर 3980 करोड़ रुपए पहुंचा
बिजली दरों में 6.23 प्रतिशत की वृद्धि को वितरण क्षेत्र की बढ़ती वित्तीय आवश्यकताओं और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक बताया गया है। जारी नोट के अनुसार वर्ष 2018-19 में वितरण कंपनी लगभग 254 करोड़ रुपए के सरप्लस में थी, लेकिन बाद के वर्षों में राजस्व अंतर लगातार बढ़ते हुए 2023-24 में 2528 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। ऑडिट के बाद यह अंतर करीब 3980 करोड़ रुपए बताया गया है। इसमें कहा गया है कि बिजली खरीद लागत, ईंधन व्यय, महंगाई, अधोसंरचना के रखरखाव और उपभोक्ता सेवाओं पर बढ़ते खर्च के कारण वितरण कंपनी की लागत में लगातार वृद्धि हुई है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार न्यूनतम रखने का प्रयास किया गया है। सरकार द्वारा सब्सिडी और अन्य राहत उपाय जारी रखे गए हैं। बिजली दर वृद्धि व स्मार्ट मीटर के खिलाफ कांग्रेस का आंदोलन, 17 जून को बिजली दफ्तरों का घेराव
छत्तीसगढ़ विद्युत विनियामक आयोग द्वारा बिजली दरों में वृद्धि और स्मार्ट मीटर के विरोध में कांग्रेस ने चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मंगलवार को रायपुर में पत्रकार वार्ता में कहा कि 17 जून को प्रदेश के सभी जिलों में बिजली कार्यालयों का घेराव और मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया जाएगा। 18 जून को जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर विरोध दर्ज कराया जाएगा। वहीं जुलाई के पहले सप्ताह से कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर जाकर आवेदन भरवाकर स्मार्ट मीटर हटाने की मांग करेंगे। बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के टैरिफ में 30 से 50 पैसे, गैर-घरेलू श्रेणी में 20 से 40 पैसे तथा कृषि पंपों की बिजली दर में भी 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की है। हाल ही में 12 प्रतिशत ईंधन अधिभार जोड़ा गया था, जिससे भाजपा सरकार के कार्यकाल में अब तक बिजली दरों में कुल 31.23 प्रतिशत बढ़ोतरी हो चुकी है। प्रदेश में 45 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को जून माह में औसत से दो से तीन गुना अधिक बिजली बिल मिले हैं। पत्रकार वार्ता में पूर्व मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, अमितेश शुक्ल, वरिष्ठ नेता धनेन्द्र साहू, विकास उपाध्याय, सुशील आनंद शुक्ला सहित अन्य कांग्रेस पदाधिकारी मौजूद रहे।
