नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने देश के तीन प्रमुख स्टेडियमों में खेल गतिविधियों पर रोक लगा दी है। इनमें रायपुर का वीर नारायण इंटरनेशनल स्टेडियम, जयपुर का सवाई मानसिंह स्टेडियम और मुंबई का डीवाई पाटिल स्टेडियम शामिल है। यह कार्रवाई भूजल संरक्षण और पर्यावरणीय मानकों से जुड़े एनजीटी के आदेशों की लगातार अनदेखी के कारण की गई है। आदेश के मुताबिक मामला क्रिकेट स्टेडियमों में भूजल के उपयोग, एसटीपी के शोधित जल के इस्तेमाल तथा वर्षा जल संचयन जैसे पर्यावरणीय उपायों के पालन से जुड़ा है। ट्रिब्यूनल ने 2021 में इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए थे और बाद में अनुपालन रिपोर्ट मांगी थी। एनजीटी की प्रधान पीठ के अध्यक्ष न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद ने 2 जुलाई 2026 को सुनवाई के दौरान कहा कि देश के कई हिस्सों में जल संकट गंभीर है। इसके बावजूद संबंधित स्टेडियमों ने न केवल ट्रिब्यूनल के बार-बार दिए गए नोटिसों की अनदेखी की, बल्कि केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) के ई-मेल और नोटिसों का भी जवाब नहीं दिया। ऐसे में अंतरिम आदेश के तहत इन तीनों स्टेडियमों में आगे किसी भी खेल गतिविधि पर रोक लगाई जाती है। एनजीटी ने केंद्रीय भूजल प्राधिकरण को नए जवाबों के आधार पर अद्यतन रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को होगी। उल्लेखनीय है कि एनजीटी ने स्टेडियमों को पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन का दोषी नहीं ठहराया है, बल्कि ट्रिब्यूनल और सीजीडब्ल्यूए के नोटिसों का जवाब नहीं देने तथा आवश्यक जानकारी प्रस्तुत नहीं करने पर अंतरिम रूप से खेल गतिविधियों पर रोक लगाई है। 1.25 लाख का जुर्माना था, अधिकारी खोजते रहे यूपीआई से पेमेंट की सुविधा महज 1 लाख 25 हजार रुपए की पेनल्टी समय पर जमा न करने की सरकारी लापरवाही रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम पर भारी पड़ गई। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश के बाद स्टेडियम में 17 अगस्त तक सभी खेल गतिविधियों पर अंतरिम रोक लगा दी गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि दो साल से लंबित इस जुर्माने को जमा करने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारी विभाग जाने के बजाय ‘गूगल-पे’ और ‘फोन-पे’ जैसी ऑनलाइन यूपीआई सुविधाएं तलाशते रहे। सूत्रों के मुताबिक, एनजीटी द्वारा लगाई गई यह पेनल्टी सीधे संबंधित विभाग के दफ्तर में जाकर मैन्युअल (नकद या चालान) जमा करनी थी। अफसरों की इसी ‘डिजिटल ढिलाई’ के चक्कर में वक्त बीत गया, भुगतान नहीं हुआ और आखिरकार स्टेडियम पर ताला लग गया। छग क्रिकेट संघ ने कहा- अब दूसरी सुनवाई से पहले करेंगे आदेश का पालन
छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के सीईओ हरी गुंडलापहुली ने कहा कि पहले स्टेडियम का संचालन पीडब्ल्यूडी के पास था, इसलिए संघ कई मामलों में सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता था। उन्होंने बताया कि एनजीटी के नोटिस की जानकारी मिल चुकी है। दूसरी सुनवाई से पहले पेनल्टी जमा कर अनुपालन रिपोर्ट पेश कर दी जाएगी, ताकि स्टेडियम से प्रतिबंध हटाने का अनुरोध किया जा सके।
