छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पांचवें और अंतिम दिन प्रश्नकाल में राशन व्यवस्था का मुद्दा उठा। विधायक शेषराज हरबंस ने अंत्योदय कार्डधारियों को 7 किलो अतिरिक्त चावल देने की मांग की। वहीं राशन दुकानों में कथित तौर पर जबरन मसाले बेचने का मुद्दा भी उठा। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि शिकायत और दस्तावेज मिलने पर मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद सदन में साय सरकार के खिलाफ कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत प्रस्ताव पेश करेंगे, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष अपनी-अपनी बात रखेंगे। राज्य गठन के बाद किसी सरकार के खिलाफ यह 10वां अविश्वास प्रस्ताव है। अविश्वास प्रस्ताव क्यों अहम? अविश्वास प्रस्ताव का मकसद केवल सरकार गिराना नहीं होता। विपक्ष इस बहस के जरिए सरकार के पूरे कार्यकाल के कामकाज पर सवाल उठाता है। सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियां गिनाता है और विपक्ष के आरोपों का जवाब देता है। चर्चा के बाद अगर मत विभाजन की स्थिति होती है, तब मतदान होता है। अगर सरकार के पक्ष में बहुमत रहता है तो प्रस्ताव गिर जाता है। कई बार ध्वनिमत से ही फैसला लिया जाता है। इस बार कांग्रेस नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई, कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और कई प्रशासनिक मामलों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं भाजपा सरकार अपनी योजनाओं, विकास कार्यों और प्रशासनिक उपलब्धियों का पक्ष रखेगी। विधानसभा में बीजेपी के 54 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 35 सदस्य हैं। 1 विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के हैं। ऐसे में संख्या बल बीजेपी के पक्ष में है। यही वजह है कि प्रस्ताव का राजनीतिक महत्व अधिक है, जबकि गणित सरकार के पक्ष में दिखाई देता है। अब तक का रिकॉर्ड भी सरकार के पक्ष में छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास में अब तक 9 बार अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो चुकी है। हर बार सरकार बहुमत साबित करने में सफल रही है। पहली विधानसभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के खिलाफ 2002 और 2003 में भाजपा ने दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया था। इसके बाद डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ 2007, 2011, 2015, 2017 और 2018 में कुल पांच बार कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। वहीं भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ 2022 और 2023 में भाजपा अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई। इन सभी प्रस्तावों पर लंबी बहस हुई, लेकिन कोई भी पारित नहीं हो सका। सबसे लंबी चर्चा जुलाई 2015 में डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव पर हुई थी, जो 24 घंटे 25 मिनट तक चली थी। मंगलवार को विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ पेश होने वाला अविश्वास प्रस्ताव राज्य गठन के बाद 10वां होगा। भूपेश सरकार में भी लाया गया था अविश्वास प्रस्ताव प्रदेश में भूपेश बघेल (कांग्रेस) की पूर्ववर्ती सरकार के खिलाफ छत्तीसगढ़ विधानसभा में दो बार 2022 और 2023 में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। 2022 में अविश्वास प्रस्ताव पर 12 घंटे 32 मिनट चर्चा चली थी। जबकि जुलाई 2023 के मानसून सत्र के दौरान बीजेपी ने सरकार के खिलाफ 109 बिंदुओं का आरोप-पत्र पेश किया था। हालांकि, भारी बहुमत (कांग्रेस के 72 विधायक) के कारण यह प्रस्ताव विधानसभा में ध्वनिमत से गिर गया था । …………………………. इससे संबंधित यह खबर भी पढ़िए… मानसून सत्र, सेवाग्राम प्रोजेक्ट पर भूपेश-अजय में बहस: शब्दों के लिए चंद्राकर ने खेद जताया, बघेल ने कहा- धन्यवाद, महतारी वंदन के मुद्दे पर हंगामा छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन की कार्यवाही जारी है। प्रश्नकाल में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल फर्जी ग्रामसभाओं का मामला उठाया। कथित फर्जी ग्रामसभा प्रस्तावों के आधार पर उद्योगों की स्थापना के सवाल पर मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि पुलिस जांच कर रही है। जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया। पढ़ें पूरी खबर…
