छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ और राजनांदगांव जिले पक्षियों के महत्वपूर्ण आवास के रूप में उभरे हैं। वर्ष 2019 से 2025 के बीच किए गए एक विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन में यहां 18 गण और 77 कुलों से संबंधित 296 पक्षी प्रजातियों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। यह अध्ययन क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाता है। अध्ययन के अनुसार, छोटे गाने वाले पक्षियों का समूह पासेरीफॉर्मीस सबसे अधिक संख्या में मौजूद है, जो कुल प्रजातियों का 40 प्रतिशत से अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह किसी भी क्षेत्र के स्वस्थ और संतुलित पर्यावरण का संकेत है। इस शोध की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि 56 से अधिक पक्षी प्रजातियों के प्रजनन की पुष्टि है। घोंसलों, अंडों और बच्चों के पालन-पोषण के आधार पर यह साबित हुआ है कि यह क्षेत्र केवल प्रवासी पक्षियों का ठहराव नहीं, बल्कि उनका स्थायी प्रजनन स्थल बन चुका है। अध्ययन में रिवर टर्न और एशियन ब्राउन फ्लाईकैचर जैसे पक्षियों के छत्तीसगढ़ में पहली बार प्रजनन के प्रमाण मिले हैं। इसके अलावा, सिनेरियस वल्चर की मौजूदगी भी पहली बार दर्ज की गई है, जिसे वैज्ञानिक दृष्टि से एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। बाघनदी, छिंदारी और खातूटोला जैसे जलाशय पक्षियों के प्रमुख केंद्र के रूप में सामने आए हैं, जहां बड़ी संख्या में प्रवासी और स्थानीय पक्षियों का जमावड़ा देखा गया। वहीं, डोंगरगढ़ वन क्षेत्र वन-आश्रित प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण पाया गया है और इसे कंजर्वेशन रिजर्व घोषित करने की सिफारिश की गई है। अध्ययन में 16 से अधिक ऐसी प्रजातियां भी दर्ज की गई हैं जो आईयूसीएन रेड लिस्ट में शामिल हैं। इससे इस क्षेत्र का वैश्विक संरक्षण महत्व और बढ़ जाता है। हालांकि, पेड़ों की कटाई, कीटनाशकों का उपयोग और अवैध शिकार जैसी गतिविधियां पक्षियों के लिए खतरा बनी हुई हैं। शोधकर्ताओं ने आर्द्रभूमियों और जंगलों के संरक्षण, सतत विकास और स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर जोर दिया है।यह अध्ययन प्रतीक ठाकुर, अविनाश भोई, डॉ. दानेश सिन्हा और डॉ. अनुराग विश्वकर्मा द्वारा किया गया है, जिसने इस क्षेत्र को देश के प्रमुख बर्ड हॉटस्पॉट के रूप में स्थापित किया है।
