एक तरफ उत्साह और एक तरफ मजबूरी:सालों से बन रहा भवन, अनावश्यक देरी, लेकिन पढ़ाई तो जरूरी है…

दूसरी तस्वीर सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के शिवपुरी गांव की है। यहां सालों से स्कूल भवन बन रहा है। यहां एक कमरा है लेकिन बिजली और पंखा नहीं होने की वजह से बच्चों को बाहर पेड़ के नीचे पढ़ाना पड़ रहा है। इसमें भी महत्वपूर्ण बात ये है कि दो शिक्षक पेड़ के नीचे बैठ रहे हैं। भवन के लिए 10 लाख रुपए स्वीकृत हुए हैं, लेकिन निर्माण एजेंसी की कोताही से भवन नहीं बन पा रहा है। पहली बार खुला स्कूल, भवन नहीं, लेकिन ग्रामीणों में उत्साह… दंतेवाड़ा जिले में लावा गांव में पहली बार स्कूल खुला है। स्कूल भवन नहीं होने के बावजूद ग्रामीण उत्साहित हैं। उनका कहना है कि जब तक भवन नहीं बन जाता, तब तक पेड़ के नीचे ही हमारे बच्चों को पढ़ाएं। ग्रामीण तो यहां तक कह रहे हैं कि जब तक स्कूल भवन नहीं बन जाता, तब तक उनके घर को ही स्कूल बना दिया जाए। यहां फिलहाल 15 छात्र हैं। इनके लिए 2 शिक्षकों का इंतजाम किया है।

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