भारत के ग्रॉस GST कलेक्शन ने अप्रैल महीने में ₹2.42 लाख करोड़ का नया रिकॉर्ड बनाया। सरकारी डेटा के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष के इसी महीने के मुकाबले इसमें 8.7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे पहले सबसे ज्यादा कलेक्शन अप्रैल 2025 में ₹2.23 लाख करोड़ रहा था। आमतौर पर हर साल अप्रैल के महीने में टैक्स कलेक्शन मजबूत रहता है। इसका मुख्य कारण यह है कि मार्च में वित्त वर्ष खत्म होते समय कंपनियां अपने पूरे साल के खातों का मिलान (रिकन्सिलिएशन) करती हैं। इसके चलते बकाया टैक्स का भुगतान अप्रैल में किया जाता है। नेट GST कलेक्शन ₹2.11 लाख करोड़ रहा इम्पोर्ट से होने वाली कमाई में 25.8% की बढ़ोतरी इस बार GST ग्रोथ में विदेशी व्यापार यानी इम्पोर्ट का बड़ा हाथ रहा है। ग्रॉस इम्पोर्ट रेवेन्यू 25.8% की उछाल के साथ ₹57,580 करोड़ हो गया है। वहीं, ग्रॉस डोमेस्टिक रेवेन्यू यानी घरेलू राजस्व में 4.3% की सामान्य बढ़त देखी गई और यह ₹1.85 लाख करोड़ रहा।
महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात का योगदान सबसे ज्यादा राज्यों के प्रदर्शन की बात करें तो टैक्स सेटलमेंट के बाद स्थिति में सुधार नजर आ रहा है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात जैसे बड़े राज्यों ने सरकारी खजाने में सबसे ज्यादा योगदान दिया है। इसके साथ ही उत्तर और दक्षिण भारत के कई राज्यों में भी टैक्स कलेक्शन के आंकड़ों में तेजी देखी गई है। इकोनॉमी की सेहत दिखाता है GST कलेक्शन जीएसटी कलेक्शन यह बताता है कि देश की अर्थव्यवस्था कितनी तंदुरुस्त है। अगर कलेक्शन ज्यादा है, तो इसका मतलब है कि लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं, फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ रहा है और लोग ईमानदारी से टैक्स भर रहे हैं। 2017 में लागू हुआ था GST सरकार ने 1 जुलाई 2017 को देशभर में GST लागू किया था। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों के 17 करों और 13 उपकरों को हटा दिया गया था। GST को चार हिस्सों में डिवाइड किया गया है:
