ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की पैरा एथलीट शर्मीला धनकड़ ने इतिहास रच दिया है। 40 वर्षीय शर्मीला ने गोला फेंक (F57) प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता है। इस जीत के साथ ही उन्होंने पैरा एथलेटिक्स में भारत के 20 साल के पदक के इंतजार को खत्म किया है। शर्मीला ने 9.81 मीटर का सत्र का सर्वश्रेष्ठ थ्रो लगाकर यह उपलब्धि हासिल की। 14 साल पहले नर्क जैसा था जीवन शर्मीला का जीवन हमेशा से ऐसा नहीं था। 14 साल पहले 2012 में रेवाड़ी के गुरकावास गांव में उनके पहले पति ने उन्हें और उनकी दो बेटियों को निर्वस्त्र करके सड़क पर फेंक दिया था। शर्मीला ने बताया कि उनका पहला पति नशे का आदी था और दूसरी बेटी के जन्म के बाद से ही स्थितियां खराब हो गई थीं। उस समय पड़ोसियों ने उन्हें कंबल और रजाई से लपेटा था, जिसके बाद उनके माता-पिता जय लाल और सरोज उन्हें अपने गांव छिथरौली ले गए थे। संघर्ष और बचपन की कहानी शर्मीला 2 साल की उम्र से ही एक पैर में पोलियो से पीड़ित हैं। उनकी मां सरोज, जो बचपन से नेत्रहीन हैं, ने बताया कि शर्मीला कक्षा 1 से 10 तक टॉपर रही थीं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण 19 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई थी। ग्लास्गो में गोल्ड जीतने के बाद शर्मीला ने अपनी मां और दूसरे पति अजीत सिंह को सेलिब्रेशन के लिए साथ बुलाया। दूसरे पति अजीत ने संवारा जीवन पहले पति से तलाक के बाद 2018 में शर्मीला ने अजीत सिंह से दूसरी शादी की। अजीत एक प्लम्बर और पंप टेक्नीशियन थे। शर्मीला ने बताया कि अजीत ने उन्हें खेल में आगे बढ़ाने के लिए अपना काम तक छोड़ दिया और उनकी बेटियों को संभाला। 2018 में हरियाणा रोडवेज की हड़ताल के दौरान शर्मीला ने तीन महीने तक बतौर बस कंडक्टर भी काम किया था। पिता का निधन और भविष्य की उम्मीदें ग्लास्गो खेलों से एक साल पहले ही शर्मीला के पिता का निधन हो गया था। शर्मीला अभी रेवाड़ी में किराए के मकान में रहती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि इस गोल्ड मेडल के बाद स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) और हरियाणा सरकार के सहयोग से वह अपना खुद का घर खरीद सकेंगी। इससे पहले वह बर्मिंघम पैरा कॉमनवेल्थ गेम्स और हांगझोउ पैरा एशियाई खेलों में चौथे स्थान पर रही थीं। महिलाओं के लिए दिया संदेश गोल्ड मेडल जीतने के बाद शर्मीला ने सभी महिलाओं को संदेश दिया कि उन्हें प्रताड़ना के खिलाफ लड़ना चाहिए और आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने भविष्य में अपनी बेटियों को भी खेल के क्षेत्र में आगे ले जाने की बात कही है। वहीं, राष्ट्रमंडल खेलों के पांचवें दिन भारत के लिए अजय बाबू और सर्वेश कुशारे ने रजत पदक, जबकि शिल्पा ने कांस्य पदक जीता।
