आयुर्वेद अस्पताल पर बढ़ा भरोसा; 5 साल में 10 गुना बढ़ी ओपीडी

राजधानी समेत प्रदेश में आयुष चिकित्सा के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है। रायपुर और बिलासपुर के शासकीय आयुर्वेद अस्पतालों में पांच साल पहले जहां रोज 50-60 मरीज ओपीडी में पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या 550 से अधिक हो गई है। दोनों अस्पतालों में सालाना करीब दो लाख मरीज उपचार करा रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक एलोपैथी उपचार का बढ़ता खर्च, मुफ्त दवाएं और पुराने रोगों में राहत मिलने से मरीजों का भरोसा बढ़ा है। इसका असर आयुष शिक्षा पर भी दिख रहा है। प्रदेश के दो शासकीय आयुष कॉलेजों की 75-75 सीटें पहले ही काउंसिलिंग राउंड में भर जाती हैं। छह निजी कॉलेजों में आयुर्वेद, यूनानी, होमियोपैथी तथा प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग की 440 सीटों में भी हर साल करीब 90 फीसदी प्रवेश हो रहे हैं। प्रदेशभर से आ रहे मरीज, हर तरह की बीमारी का इलाज
रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, सरगुजा, दुर्ग, दल्ली-राजहरा और जगदलपुर के आयुर्वेद अस्पतालों तथा 635 औषधालयों में हर साल 30 लाख से अधिक लोगों का इलाज हो रहा है। यहां सर्दी-खांसी, पेट, डायबिटीज, बीपी, साइटिका, स्लिप डिस्क, लकवा और जोड़ों के दर्द के मरीज अधिक पहुंचते हैं। बढ़ती मांग से आयुर्वेद व होमियोपैथी डॉक्टरों की सैलरी 40 हजार से 1.5 लाख रुपए प्रतिमाह तक पहुंच गई है, जबकि निजी प्रैक्टिस से आय इससे अधिक है। खाली पद भी जल्द भरेंगे
आयुर्वेद अस्पतालों में इलाज कराने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जहां पहले लोग कम आते थे अब उनकी संख्या कई गुना बढ़ गई है। रायपुर आयुर्वेद कॉलेज में अभी प्रोफेसर का एक भी पद खाली नहीं है। रीडर के 23 पदों में 2 और व्याख्याता के 35 पदों में केवल 5 ही खाली हैं। -प्रवीण कुमार जोशी, प्राचार्य आयुर्वेद कॉलेज रायपुर

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