43 शिक्षकों से 10-12 करोड़ की ठगी का खुलासा:बैंकिंग सिस्टम की खामी का फायदा उठाकर उठाए कई लोन, जांच के बाद 5 आरोपी गिरफ्तार

कम समय में अधिक पैसा कमाने और एक साथ कई बैंकों से पर्सनल लोन दिलाने का झांसा देकर शिक्षकों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरजिला संगठित गिरोह का कोंडागांव पुलिस ने पर्दाफाश किया है। करीब तीन महीने तक चली तकनीकी और वित्तीय जांच के बाद फरसगांव और केशकाल पुलिस ने पांच आरोपियों को अंबिकापुर, जशपुर और सारंगढ़ से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी अब तक 43 शिक्षकों को अपना शिकार बना चुके हैं। जांच में करीब 10 से 12 करोड़ रुपये की ठगी सामने आई है। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस को आशंका है कि पीड़ितों की संख्या और बढ़ सकती है। जिले में 150 से 200 शिक्षक ठगी के शिकार होने की चर्चा मामले से जुड़े कुछ शिक्षकों का दावा है कि बदनामी और सामाजिक संकोच के कारण कई पीड़ित अब तक पुलिस के सामने नहीं आए हैं। उनका कहना है कि जिले में करीब 150 से 200 शिक्षक इस गिरोह के झांसे में आए हो सकते हैं। हालांकि पुलिस ने फिलहाल 43 शिक्षकों से ठगी की पुष्टि की है और अन्य मामलों की जांच जारी है। ऐसे रचते थे करोड़ों की ठगी का खेल पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह सबसे पहले शिक्षकों से संपर्क करता था और कम समय में कई बैंकों से पर्सनल लोन दिलाने का भरोसा देता था। इसके लिए अलग-अलग बैंक और लोन एजेंटों के माध्यम से एक साथ कई बैंकों में आवेदन कराया जाता था। लोन स्वीकृत होने के बाद शिक्षकों को कुल राशि का केवल 40 प्रतिशत हिस्सा दिया जाता था, जबकि 60 प्रतिशत रकम आरोपी अपने और अपने साथियों के बैंक खातों में ट्रांसफर करा लेते थे। पीड़ितों को भरोसा दिलाया जाता था कि दो से तीन वर्षों में पूरा लोन, एचआरए सहित, चुका दिया जाएगा। इसी भरोसे में शिक्षक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर देते थे। बाद में आरोपी पैसे लेकर फरार हो जाते थे और पूरी ईएमआई का बोझ शिक्षकों पर आ जाता था। फर्जी आधार कार्ड और बदले गए पते जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि कई मामलों में आरोपियों ने शिक्षकों के नाम पर फर्जी आधार कार्ड और कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। कई पीड़ितों के पते बदलकर नए आधार कार्ड बनवाए गए और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग बैंकों से लोन स्वीकृत कराया गया। इन शिकायतों से खुला पूरा मामला फरसगांव निवासी संजय कोडोपी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उन्हें और उनके साथियों को विभिन्न बैंकों से पर्सनल लोन दिलाने के नाम पर करीब 2 करोड़ रुपये की ठगी की गई। इसी तरह बड़ेडोंगर निवासी अनंत कुमार निर्मलकर ने करीब 4 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। वहीं केशकाल क्षेत्र के देवेन्द्र किशोर खवास, योगेश्वर बैद्य सहित अन्य शिक्षकों ने भी करोड़ों रुपये की ठगी की शिकायत पुलिस से की। इन शिकायतों के आधार पर फरसगांव और केशकाल थानों में कुल चार अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई। तीन महीने तक चली तकनीकी और वित्तीय जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा (IPS) के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कपिल चंद्रा के मार्गदर्शन में विशेष जांच टीम बनाई गई। एसडीओपी फरसगांव अभिनव उपाध्याय और एसडीओपी केशकाल अरुण नेताम के नेतृत्व में गठित टीम ने तीन महीने तक बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और दस्तावेजों की तकनीकी जांच की। अलग-अलग जिलों में दबिश देने के बाद पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। ये आरोपी गिरफ्तार मोबाइल, लैपटॉप, एटीएम और बैंक दस्तावेज जब्त आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, डायरी, रजिस्टर, लैपटॉप और डेस्कटॉप कंप्यूटर सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं। पुलिस इन सभी डिजिटल और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच कर रही है। बैंकिंग सिस्टम की खामी भी आई सामने जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कम समय के भीतर अलग-अलग बैंकों से लोन स्वीकृत कराने में सफल हो जाते थे। जानकारों का कहना है कि कई मामलों में एक बैंक से लिया गया लोन केंद्रीय रिकॉर्ड (क्रेडिट सिस्टम) में अपडेट होने में कुछ दिन लग जाते हैं। इसी अवधि का फायदा उठाकर आरोपियों ने एक ही व्यक्ति के नाम पर अलग-अलग बैंकों से कई लोन स्वीकृत करा लिए। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पर्सनल लोन स्वीकृत करने से पहले सभी बैंकों के बीच क्रेडिट रिकॉर्ड का रियल-टाइम सत्यापन और समन्वय जरूरी है, ताकि एक ही व्यक्ति के नाम पर कम समय में कई लोन स्वीकृत न हो सकें। जांच का दायरा बढ़ा पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, बैंक एजेंटों और संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आशंका है कि यह गिरोह कोंडागांव के अलावा अन्य जिलों में भी इसी तरह की ठगी को अंजाम दे चुका है। इसलिए जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। ………………………. इससे संबंधित यह खबर भी पढ़िए… छत्तीसगढ़ में 1000 करोड़ से ज्यादा की ठगी का आरोप:शेयर-ट्रेडिंग और गोल्ड ETF में डबल प्रॉफिट का झांसा, भिलाई का युवक गिरफ्तार छत्तीसगढ़ के भिलाई में शेयर ट्रेडिंग और गोल्ड ETF में निवेश के नाम पर प्रदेश के 1000 से 1500 लोगों से करीब 1000 करोड़ रुपए की ठगी का आरोप है। कंपनी ने लोगों को हर महीने 10% प्रॉफिट और रकम डबल करने का झांसा दिया था। पढ़िए पूरी खबर…

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