छत्तीसगढ़ के सरगुजा में गर्भवती महिला और नवजात की डिलीवरी के दौरान मौत हो गई। गांव की दाई ही घर में डिलीवरी करवा रही थी। महिला को खून की कमी थी। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि प्रसूता को हॉस्पिटल जाने और आयरन शुक्रोज चढ़ाने की सलाह दी गई थी। परिजनों ने मामले में लापरवाही बरती। मामला लखनपुर ब्लॉक के ग्राम सकरिया का है। जानकारी के मुताबिक, ग्राम सकरिया के दर्रीडुगू निवासी प्रसूता सुखनी मझवार (26) का प्रसव मंगलवार सुबह घर में कराया जा रहा था। डिलीवरी के दौरान सुखनी और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। लखनपुर बीएमओ के निर्देश पर आरएमए डॉ. विनोद कुमार भार्गव सकरिया पहुंचे और परिजनों का बयान दर्ज किया। तमिवनाडू से काम करके लौटी थी परिजनों से पूछताछ में पता चला कि, सुखनी मझवार अपने पति दिनेश मझवार के साथ तमिलनाडू में रहकर काम करती थी। वह अपने पति के साथ 14 जून को वापस घर लौटी थी। वो 8 महीने की प्रेग्नेंट थी। 21 जून को गांव की मितानिन सुखनी मझवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुन्नी जांच के लिए लेकर गई थी। जांच के दौरान सुखनी का ब्लड एचबी 6.6 पाया गया था और बीपी बढ़ा हुआ था। डॉक्टरों ने अस्पताल जाने दी थी सलाह स्वास्थ्य विभाग ने सुखनी को अगले दिन हॉस्पिटल आकर आयरन शुक्रोज चढ़ाने और जिला अस्पताल अंबिकापुर ले जाकर जांच कराने की सलाह दी थी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सुखनी अपना इलाज कराने न तो अंबिकापुर ही गई और न ही उसे आयरन शुक्रोज चढ़ाया गया। जांच के करीब एक पखवाड़े बाद उसे मंगलवार को प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो घर में ही गांव की मितानिन ही उसका प्रसव करा रही थी। प्रसव के दौरान मां-बच्चे दोनों की मौत हो गई। खून की कमी के कारण हुई मौत इसस मामले में आरएमओ डॉ. विनोद कुमार भार्गव ने कहा कि, शुरुआती तौर पर खून की कमी से जच्चे-बच्चे की मौत होना पाया गया है। खून की कमी और कमजोरी होने के बावजूद प्रसूता का सही इलाज नहीं कराया गया। जागरूकता की कमी के कारण यह स्थिति बनी। मितानिनों को समझाइश दी जा रही है कि सभी प्रसूताओं की नियमित जांच कराएं। ………………………….. इससे संबंधित यह खबर भी पढ़िए…
