फीफा वर्ल्ड कप में अमेरिकी फुटबॉलर फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड रद्द होने पर विवाद हो गया है। रेड कार्ड अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के फीफा अध्यक्ष इन्फेंटिनो को फोन करने के बाद रद्द किया गया। इसके बाद बालोगुन को बेल्जियम के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल मैच खेलने की परमीशन मिल गई। हालांकि, बालोगुन के खेलने के बाद भी अमेरिकी टीम बेल्जियम के खिलाफ 1-4 से हारकर टूर्नामेंट से बाहर गई। फुटबॉल वर्ल्ड कप के इतिहास में यह पहला मामला है, जब किसी राष्ट्राध्यक्ष ने रेड कार्ड रद्द करने की पैरवी की हो और फीफा ने इसे मान भी लिया हो। फीफा के इस फैसले का बेल्जियम फुटबॉल संघ और यूरोपियन फुटबॉल यूनियन ने विरोध किया है। बालोगुन को बोस्निया के खिलाफ रेड कार्ड दिखाया गया था 25 साल के बालोगुन को पिछले नॉकआउट मुकाबले में रेड कार्ड मिला था। नियमों के अनुसार उन्हें एक मैच का बैन झेलना चाहिए था। इसके बावजूद फीफा ने उन्हें बेल्जियम के खिलाफ राउंड ऑफ-16 मुकाबले में खेलने की मंजूरी दे दी। बेल्जियम फुटबॉल महासंघ ने फीफा के इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की, जो खारिज हो गई। बालोगुन ने टूर्नामेंट में तीन गोल किए हैं। ट्रम्प ने दखल देने की बात मानी प्री क्वार्टर फाइनल से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बालोगुन रेड कार्ड मामले में दखल देने की बात स्वीकार की। उन्होंने सोमवार को व्हाइट हाउस में कहा कि उन्होंने ही फीफा से कहा था कि वे अमेरिका के स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन पर लगाए गए एक मैच के बैन की समीक्षा (रिव्यू) करे। ट्रम्प ने कहा- ‘मैंने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से बात की और फैसले की समीक्षा करने के लिए कहा। क्योंकि, मुझे नहीं लगता था कि यह फाउल था। उन्होंने कहा- फीफा ने सही निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि अगर प्रतिबंध लागू किया जाता, तो टूर्नामेंट पर एक बड़ा धब्बा लग जाता।’ फीफा ने फैसले का किया बचाव फीफा प्रेसिडेंट जियानी इन्फेंटिनो ने सोशल मीडिया पर कहा कि अनुशासन समिति ने पूरी स्वतंत्रता के साथ निर्णय लिया है। हर मामले का मूल्यांकन संबंधित नियमों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर किया जाता है। हालांकि, इस फैसले ने विश्व कप के दौरान फीफा की पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फीफा हमेशा यह दावा करता रहा है कि उसके फैसले राजनीतिक प्रभाव से पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं। ऐसे में विश्व कप के दौरान किसी देश के राष्ट्रपति की सार्वजनिक दखलअंदाजी और उसके बाद खिलाड़ी को मिली राहत ने खेल प्रशासन की निष्पक्षता पर नई बहस छेड़ दी है। यही वजह है कि यह विवाद अब सिर्फ एक रेड कार्ड का नहीं, बल्कि खेल और राजनीति के रिश्ते का बड़ा मुद्दा बन गया है। 1962 में गैरिंचा का रेड कार्ड रद्द हुआ था यह वर्ल्ड कप के इतिहास में रेड कार्ड रद्द होने का दूसरा मामला है। पहला मामला 1962 में सामने आया था। तब ब्राजील के गैरिंचा को सेमीफाइनल में चिली के खिलाफ रेड कार्ड दिखाया गया था। लेकिन, गैरिंचा ने फाइनल में हिस्सा लिया और चेकोस्लोवाकिया पर जीत हासिल की। उस समय रेड कार्ड के बाद खिलाड़ी पर प्रतिबंध नहीं लगता था, बल्कि अधिकारी सबूतों के आधार पर सजा तय करते थे। 1962 में फीफा की अनुशासनात्मक समिति का निर्णय राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों से घिरा हुआ था। ————————————— फुटबॉल वर्ल्ड कप से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… रोनाल्डो की टीम पुर्तगाल फुटबॉल वर्ल्डकप से बाहर, स्पेन ने 1-0 से हराया स्टार फुटबॉलर क्रिस्टियानों रोनाल्डो की टीम पुर्तगाल फुटबॉल वर्ल्ड कप से बाहर हो गई है। उसे मंगलवार को राउंड ऑफ 16 मुकाबले में स्पेन ने 1-0 से हराया। इस हार के बाद 41 साल के रोनाल्डो ने अपने करियर का आखिरी वर्ल्ड कप खेल लिया। पढ़ें पूरी खबर
