एयरटेल ने हर ग्राहक से ₹23 ज्यादा कमाई की:दूसरी तिमाही में मुनाफा 89% बढ़कर ₹6,792 करोड़ रहा; एक साल में 30% चढ़ा शेयर

टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल लिमिटेड को वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में ₹6,791.7 (कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट) का मुनाफा हुआ है। कंपनी ने पिछले साल की समान तिमाही में ₹3,593.2 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया था। सालाना आधार पर यह 89% बढ़ा है। जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी ने संचालन से ₹52,145 करोड़ का रेवेन्यू जनरेट किया, जो पिछले साल के ₹41,473 करोड़ से 25.73% ज्यादा है। वस्तुओं और सेवाओं को बेचने से मिली राशि को रेवेन्यू या राजस्व कहा जाता है। Q2 में कंपनी ने 9.5 लाख नए कस्टमर्स जोड़े एयरटेल ने फाइलिंग में कहा कि पोस्टपेड सेगमेंट में उसकी पोजीशन मजबूत हो गई है। इस क्वार्टर में 9.5 लाख नए कस्टमर्स जोड़े गए, जिससे कुल पोस्टपेड यूजर्स 2.75 करोड़ हो गए। साथ ही, पिछले 12 महीनों में स्मार्टफोन डेटा यूजर्स 2.22 करोड़ बढ़े, जो सालाना 8.4% की ग्रोथ दिखाता है। क्वार्टर के आखिर में भारत में 45 करोड़ और अफ्रीका में 17.4 करोड़ कस्टमर्स थे, कुल मिलाकर 15 देशों में कंपनी करीब 62.4 करोड़ यूजर्स हो गए। कंपनी ने कंसोलिडेटेड EBITDA 29,919 करोड़ रुपए का रिपोर्ट किया, जिसमें EBITDA मार्जिन 57.4% रहा।
जुलाई-सितंबर में ARPU 10% बढ़ा जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान एयरटेल का एवरेज रेवेन्यू प्रति यूजर यानी ARPU 10% बढ़कर 256 रुपए पर पहुंच गया। जो पिछले साल की समान तिमाही में 233 रुपए था। ARPU का मतलब हर यूजर से औसत कमाई। कुल रेवेन्यू को एक्टिव यूजर्स से भाग देने पर यह नंबर निकलता है। जैसे- रेवेन्यू 10 लाख है और कंपनी के पास 1000 यूजर हैं, तो ARPU ₹1000 होगा। इससे कंपनी पता लगाती है कि ग्राहक कितना फायदा दे रहा। साथ ही यह प्लानिंग करती है बेहतर सर्विस या अपसेलिंग के लिए क्या किया जाए। एयरटेल देश की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी है दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2025) के नतीजों से पहले सोमवार, 3 नवंबर को एयरटेल का शेयर 1.10% चढ़कर 2,077 पर बंद हुआ। बीते एक महीने में यह 9.51%, 6 महीने में 11.31% और एक साल में 30.53% चढ़ा है। मार्केट वैल्यू के लिहाज से एयरटेल 12.43 लाख करोड़ रुपए मार्केट कैप के साथ देश की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी है। 1995 में हुई थी भारती एयरटेल की शुरुआत भारत सरकार ने 1992 में पहली बार मोबाइल सेवा के लिए लाइसेंस बांटने शुरू किए। कंपनी के फाउंडर सुनील मित्तल ने इस अवसर को समझा और फ्रेंच कंपनी विवेंडी के साथ मिलकर दिल्ली और आस-पास के इलाकों के लाइसेंस हासिल किए। 1995 में मित्तल ने सेल्युलर सर्विस ऑफर करने के लिए भारती सेल्युलर लिमिटेड बनाई और एयरटेल ब्रांड के तहत काम शुरू किया।

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