ट्रम्प सरकार बोली-कंपनियों ने H-1B वीजा का गलत इस्तेमाल किया:कम सैलरी वाले विदेशियों को नौकरी दी, अमेरिकी युवाओं से ‘अमेरिकन ड्रीम’ चुराया

ट्रम्प सरकार के लेबर डिपार्टमेंट ने कंपनियों पर H-1B वीजा का गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया है। डिपार्टमेंट ने इसे लेकर वीडियो जारी किया है। इसमें कहा गया है कि कंपनियों H-1B वीजा का गलत इस्तेमाल कर अमेरिकी युवाओं का ‘अमेरिकन ड्रीम’ चुराया। इन्होंने कम सैलरी वाले विदेशी कर्मचारियों को गलत तरीके से नौकरियां दीं। वीडियो में राजनेताओं और नौकरशाहों को दोषी ठहराया गया है, जो कंपनियों को यह गड़बड़ी करने देते हैं। इसमें बताया गया कि H-1B वीजा होल्डर्स का 72% हिस्सा भारतीयों का है, जबकि 12% चीनी हैं। वीडियो में नरेटर कहता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति और लेबर सेक्रेटरी लोरी चावेज-डेरमर की लीडरशिप में हम कंपनियों को वीजा के गलत इस्तेमाल का जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। अमेरिकी लोगों के लिए अमेरिकन ड्रीम वापस ला रहे हैं।
वीडियो में प्रोजेक्ट फायरवॉल का जिक्र वीडियो में 1950 के दशक की खुशहाल परिवारों, घरों और लोगों की पुरानी क्लिप्स दिखाई गई हैं। 51 सेकेंड के वीडियो प्रोजेक्ट फायरवॉल का जिक्र किया गया। इसमें बताया गया है कि प्रोजेक्ट फायरवॉल के जरिए हम कंपनियों को H-1B गलत इस्तेमाल के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। भर्ती में अमेरिकियों को प्राथमिकता देंगे, ताकि अमेरिकी लोगों के लिए अमेरिकन ड्रीम वापस आए। लेबर डिपार्टमेंट ने सितंबर 2025 में प्रोजेक्ट फायरवॉल शुरू किया था। यह H-1B वीजा पर सख्त निगरानी का रखने का प्रोग्राम है। इसका मकसद अमेरिकी कामगारों के अधिकार, वेतन और नौकरी के मौके बचाना है। कंपनियों को यह तय करना होगा कि वे विदेशी कामगारों से पहले अमेरिकियों को प्राथमिकता दें। प्रोजेक्ट के तहत कंपनियों की जांच होगी। अगर कोई गड़बड़ी मिली, तो प्रभावित वर्कर्स को बकाया सैलरी देनी होगी। सिविल पेनल्टी लगेगी और तय समय के लिए H-1B प्रोग्राम से बाहर कर दिया जाएगा। H-1B वीजा फीस बढ़ाकर 88 लाख की अमेरिकी सरकार ने पिछले महीने H-1B वीजा फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर (करीब 88 लाख रुपए) करने का फैसला किया है। तब व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने बताय था कि बढ़ी हुई फीस सिर्फ वन टाइम होगी, जो एप्लिकेशन देते समय चुकानी होगी। इसका मकसद विदेशी कामगारों पर निर्भरता कम करना है। यह शुल्क 21 सितंबर 2025 से लागू हो गया। यह नियन पुराने H1 वीजा होल्डर्स पर लागू नहीं होगा, सिर्फ नए वीजा होल्डर्स को ही यह फीस देनी होगी। H-1B वीजा के लिए पहले 5.5 से 6.7 लाख रुपए लगते थे। यह 3 साल के लिए मान्य होता था। इसे दोबारा फीस देकर अगले 3 साल के लिए रिन्यू किया जा सकता था। यानी अमेरिका में 6 साल रहने के लिए H-1B वीजा का कुल खर्च 11 से 13 लाख रुपए के करीब बैठता था।

More From Author

भारत-अमेरिका में 10 साल का डिफेंस एग्रीमेंट:US एडवांस टेक्नोलॉजी शेयर करेगा; एक दिन पहले चाबहार पोर्ट पर भारत को प्रतिबंधों से छूट दी

छत्तीसगढ़ इवनिंग बुलेटिन:KISS नहीं देने पर मर्डर, मंत्री बोलीं-मोदी ईश्वर समान, 13 फीट का किंग कोबरा, बच्ची से रेप, VIDEO में 10 बड़ी खबरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *