भारत पर 50% अमेरिकी टैरिफ लागू होने के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री स्कॉट बेसेंट ने पहली बार बयान दिया है। उन्होंने कहा- भारत-अमेरिका के रिश्ते काफी पेचीदा हैं, लेकिन हमें भरोसा है कि दोनों देश आखिरकार एक साथ आएंगे। उन्होंने बुधवार को फॉक्स न्यूज से इंटरव्यू में कहा कि वे मई या जून तक भारत के साथ व्यापार समझौता होने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन भारत ने बातचीत को लंबा खींच लिया। बेसेंट ने यह भी कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और अमेरिका सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, इसलिए दोनों देशों के बीच अच्छे रिश्ते हैं और भविष्य में एक अच्छा समझौता हो सकता है। वहीं, भारत के विदेश राज्य मंत्री किर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि अमेरिका ने जानबूझकर भारत को अलग से टारगेट किया है। जबकि और भी देश रूस से तेल खरीद रहे हैं। बेसेंट ने कहा- रुपए के ग्लोबल करेंसी बनने की चिंता नहीं बेसेंट ने ट्रम्प के रुख को दोहराते हुए कहा कि जब व्यापार में असमानता होती है तो घाटे वाला देश फायदा उठाता है, जबकि ज्यादा बेचने वाला देश को चिंता करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “भारत हमें सामान बेच रहा है, उनके टैरिफ बहुत ऊंचे हैं और हमारे लिए बड़ा घाटा है।” जब उनसे पूछा गया कि क्या वह भारत के रुपए में व्यापार करने को लेकर चिंतित हैं, तो उन्होंने कहा कि भारतीय रुपया अभी डॉलर के मुकाबले अपने सबसे निचले स्तर पर है। इसलिए उन्हें इसकी कोई चिंता नहीं है। उन्होंने कहा- मुझे कई चीजों की फिक्र है, लेकिन रुपए के ग्लोबल करेंसी बनने का मुद्दा उसमें शामिल नहीं है। बेसेंट बोले- भारत ने बातचीत में सहयोग नहीं किया बेसेंट ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधानमंत्री मोदी के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि रिश्ता जटिल है और यह सिर्फ रूसी तेल का मामला नहीं है। अमेरिका का भारत के साथ बड़ा व्यापार घाटा है। बेसेंट ने कहा- हमें लगा था भारत शुरुआती समझौतों में शामिल हो सकता है। फिर बातचीत में भारत ने सहयोग भी किया, लेकिन रूस से कच्चे तेल की खरीद का मामला मुश्किलें पैदा कर रहा है, क्योंकि भारत इससे मुनाफा कमा रहा है। भारतीय मंत्री बोले- हमारी अर्थव्यवस्था इस चुनौती का सामना कर लेगी वहीं, भारत के विदेश राज्य मंत्री किर्ति वर्धन सिंह ने अमेरिका के इस टैरिफ को गलत, अनुचित और अन्यायपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत को अलग से टारगेट किया है, जबकि दूसरे देश भी रूस से तेल खरीदते हैं। सिंह ने भरोसा जताया कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है और यह इस चुनौती का सामना कर लेगी। उन्होंने कहा- हमारी सरकार देश के हितों और 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा जरूरतों की रक्षा करेगी। हम वहां से तेल खरीदेंगे, जहां से हमें सबसे अच्छा सौदा मिलेगा।
