चैटजीपीडी जैसे बॉट बनाने वाली कंपनी OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने अपनी कंपनी के नए AI मॉडल ChatGPT-5 की तुलना मैनहट्टन प्रोजेक्ट से की है। इस प्रोजेक्ट में सेकेंड वर्ल्ड वॉर के दौरान दुनिया का पहला परमाणु बम बनाया गया था। उन्होंने ये भी कहा कि ChatGPT-5 को टेस्ट करते वक्त उन्हें ऐसा लगा जैसे वो खुद “बेकार” हो गए हों। सैम ऑल्टमैन की इस बात ने AI के संभावित खतरों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। मैनहट्टन प्रोजेक्ट से क्यों की तुलना? मैनहट्टन प्रोजेक्ट में वैज्ञानिकों को बाद में एहसास हुआ था कि उनकी बनाई तकनीक कितनी खतरनाक हो सकती है। सैम ऑल्टमैन ने कहा- विज्ञान में कुछ ऐसे पल आते हैं जब लोग अपनी बनाई चीज को देखकर पूछते हैं, हमने क्या कर दिया। उनके लिए GPT-5 ऐसा ही एक पल है। उन्होंने चिंता जताई कि AI की रफ्तार इतनी तेज है कि दुनिया के नियम-कायदे और सरकारें इसके साथ कदम नहीं मिला पा रही हैं। सैम ने कहा, “ऐसा लगता है जैसे इस कमरे में कोई बड़ा-बुजुर्ग नहीं है।” यानी, AI की इस रेस में निगरानी और नियंत्रण की भारी कमी है। सैम ऑल्टमैन के लिए GPT-5 एक ऐसा पल है जो बहुत बड़ा है। ये सिर्फ कंप्यूटिंग पावर में छलांग नहीं है, बल्कि ये वो मौका है जब हमें इंसानी इनोवेशन की दिशा पर सोचने की जरूरत है। हमने एक भगवान जैसा टूल बना लिया है, लेकिन बिना किसी नैतिक दिशा-सूत्र के। GPT-5 ने वो सवाल हल किया जो सैम नहीं कर पाए सैम ऑल्टमैन ने ‘दिस पास्ट वीकेंड विद थियो वॉन’ पॉडकास्ट में बताया कि ChatGPT-5 की टेस्टिंग के दौरान एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने उन्हें हैरान कर दिया। उन्होंने एक जटिल सवाल का जवाब ढूंढने की कोशिश की, लेकिन वो खुद उसका हल नहीं निकाल पाए। फिर उन्होंने वही सवाल ChatGPT-5 से पूछा और मॉडल ने पलक झपकते ही सटीक जवाब दे दिया। सैम ने कहा, “मैंने कुर्सी पर पीछे बैठकर सोचा, ‘अरे, ये क्या हो गया!’ मैं खुद को AI के सामने बेकार महसूस करने लगा। ये एक अजीब एहसास था।” ChatGPT-5 के सामने काफी कमजोर है GPT-4 सैम ने ये भी कहा कि GPT-4 को अभी तक का सबसे एडवांस मॉडल माना जाता था, लेकिन ChatGPT-5 के सामने ये “काफी कमजोर” लगता है। GPT-5 में मल्टी-स्टेप रीजनिंग, लंबी मेमोरी और मल्टीमॉडल क्षमताएं (टेक्स्ट, इमेज, और डेटा प्रोसेसिंग) इतनी बेहतर हैं कि ये पुराने मॉडल्स को बहुत पीछे छोड़ देता है। ChatGPT-5 की खासियतें सैम ने X पर एक पोस्ट में लिखा, “GPT-5 सबसे स्मार्ट मॉडल है, जो हमने अब तक बनाया है। हमारा फोकस इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने और इसके रियल-वर्ल्ड इस्तेमाल पर है।” ChatGPT-5 जैसे मॉडल्स का गलत इस्तेमाल हो सकता है सैम की चिंताओं का एक बड़ा हिस्सा ये है कि ChatGPT-5 जैसे मॉडल्स का गलत इस्तेमाल हो सकता है। सैम ने कहा कि अगर इस तकनीक को सही ढंग से नियंत्रित नहीं किया गया, तो ये सामाजिक ढांचे को नुकसान पहुंचा सकती है। इंसानों की खासियत को चुनौती दे सकती है। आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस हासिल करना अगला कदम सैम ने साफ किया कि OpenAI का लंबे समय का लक्ष्य आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) हासिल करना है, यानी ऐसा AI जो इंसानों की तरह हर तरह के काम कर सके। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने ये भी माना कि अगर AGI को सही ढंग से मैनेज नहीं किया गया, तो ये खतरनाक हो सकता है। सैम ने कहा, “हमें नहीं पता कि ये तकनीक हमें कहां ले जाएगी। ये शानदार हो सकती है, लेकिन इसके रिस्क भी उतने ही बड़े हैं।” फ्री यूजर्स भी ChatGPT-5 का इस्तेमाल कर सकते हैं ChatGPT-5 को 7 अगस्त 2025 में लॉन्च किया गया है और इसे फ्री, प्लस, प्रो, और टीम यूजर्स के लिए रोल आउट किया जा रहा है। अगले हफ्ते ये एंटरप्राइज और एजुकेशन यूजर्स के लिए भी उपलब्ध होगा। सैम ने ये भी कहा कि ये मॉडल इतना सस्ता है कि एक अरब से ज्यादा लोग इसका फायदा उठा सकते हैं। सितंबर में भारत आने का प्लान बना रहे ऑल्टमैन सैम ऑल्टमैन सितंबर में भारत भी आ सकते हैं। उन्होंने कहा- भारत अमेरिका के बाद हमारा दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा बाजार है और ये जल्द ही हमारा सबसे बड़ा बाजार बन सकता है। भारत के लोग AI का इस्तेमाल कर रहे हैं, वो वाकई में कमाल का है।
