केंद्र सरकार ने चांदी के इम्पोर्ट पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। सरकारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, चांदी की कई कैटेगरीज को ‘फ्री’ लिस्ट से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ यानी प्रतिबंधित कैटेगिरी में डाल दिया गया है। सरकार ने यह फैसला कीमती धातुओं के बढ़ते आयात को रोकने और देश के बढ़ते इम्पोर्ट बिल को कंट्रोल करने के लिए लिया है। नए नियमों के बाद, अब कोई भी कंपनी चांदी की सिल्लियां (सिल्वर बार), अनरॉट सिल्वर (बिना गढ़ी चांदी) या चांदी का पाउडर अपनी मर्जी से सीधे भारत नहीं ला सकेगी। इसके लिए अब पहले सरकार से बकायदा मंजूरी (लाइसेंस) लेना होगा। इसके साथ ही, चांदी मंगाने की कुछ कैटेगरीज को रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के दायरे में भी लाया गया है। इससे पहले सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 6% से बढ़ाकर सीधे 15% कर दिया था। इस फैसले का आम कारोबारियों, एक्सपोर्टर्स और बाजार पर क्या असर होगा? आइए आसान सवाल-जवाब में समझते हैं… सवाल 1: सरकार ने चांदी के इम्पोर्ट को लेकर क्या नया आदेश जारी किया है? जवाब: सरकार ने एक नया नोटिफिकेशन जारी कर चांदी की कई कैटेगरीज के आयात नियमों को कड़ा कर दिया है। अब तक चांदी का इम्पोर्ट ‘फ्री’ कैटेगिरी में था, जिसे अब बदलकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ (प्रतिबंधित) कैटेगिरी में डाल दिया गया है। सवाल 2: इस पाबंदी के दायरे में चांदी के कौन-कौन से प्रोडक्ट्स आएंगे? जवाब: नए नियमों के मुताबिक, अब कोई भी कंपनी या कारोबारी सिल्वर बार (चांदी की सिल्लियां), अनरॉट सिल्वर (बिना गढ़ी कच्ची चांदी) और चांदी का पाउडर या सेमी-मैन्युफैक्चरर्ड सिल्वर अपनी मर्जी से सीधे भारत नहीं ला सकेगा। सवाल 3: अगर कोई चांदी भारत मंगाना चाहता है, तो अब उसका क्या तरीका होगा? जवाब: अब चांदी का इम्पोर्ट करने के लिए कंपनियों को सरकार से बकायदा मंजूरी यानी लाइसेंस लेना होगा। इसके बिना कस्टम क्लीयरेंस नहीं मिलेगा। इसके अलावा, चांदी मंगाने की कुछ खास कैटेगरीज को अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नियमों और निगरानी के दायरे में भी ला दिया गया है। सवाल 4: सरकार को चांदी के इम्पोर्ट पर अचानक यह प्रतिबंध क्यों लगाना पड़ा? जवाब: इसका मुख्य उद्देश्य देश में कीमती धातुओं के तेजी से बढ़ते आयात को रोकना है। लगातार बढ़ रहे इम्पोर्ट के कारण देश का इम्पोर्ट बिल (आयात खर्च) बढ़ रहा है, जिससे व्यापार घाटा (ट्रेड डेफिसिट) बढ़ता है। इसे कंट्रोल करने और विदेशी बाजार के दबावों के बीच भारतीय रुपये को मजबूती देने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। सवाल 5: एक्सपोर्टर्स के लिए ‘एडवांस ऑथराइजेशन’ स्कीम में क्या बदलाव हुआ है? जवाब: विदेश व्यापार महानिदेशक (DGFT) ने इस स्कीम के तहत ड्यूटी-फ्री (बिना टैक्स) सोना मंगाने के नियमों को बेहद सख्त कर दिया है। अब कोई भी एक्सपोर्टर इस स्कीम के तहत एक लाइसेंस पर अधिकतम 100 किलोग्राम तक ही सोना इम्पोर्ट कर पाएगा। इससे ज्यादा सोना मंगाने की अनुमति नहीं होगी। सवाल 6: जो लोग पहली बार ड्यूटी-फ्री सोने के लिए अप्लाई कर रहे हैं, उनके लिए क्या नियम है? जवाब: नए आवेदकों के लिए सरकार ने फिजिकल वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया है। यानी, पहली बार अप्लाई करने वाले एक्सपोर्टर्स को अप्रूवल मिलने से पहले अपनी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी या फैक्ट्री की भौतिक जांच करानी होगी। सरकारी अधिकारियों की संतुष्टि और हरी झंडी के बाद ही उन्हें लाइसेंस जारी होगा। सवाल 7: पुराने एक्सपोर्टर्स जो दोबारा लाइसेंस (रिपीट ऑथराइजेशन) चाहते हैं, उनके लिए क्या शर्त है? जवाब: DGFT ने पुराने या रिपीट आवेदकों के लिए भी नियम कड़े किए हैं। अब नया या फ्रेश ऑथराइजेशन केवल तभी जारी किया जाएगा, जब संबंधित कंपनी ने अपने पिछले लाइसेंस के तहत मिली कुल एक्सपोर्ट देनदारी (जितना माल बाहर भेजने का वादा किया था) का कम से कम 50% हिस्सा पूरा कर लिया हो। सवाल 8: टैक्स-फ्री सोना मंगाने वाली कंपनियों की निगरानी कैसे की जाएगी? जवाब: कंपनियों को अब हर 15 दिन में अपने इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट ट्रांजैक्शन की पूरी रिपोर्ट देनी होगी। इस रिपोर्ट को किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से सर्टिफाइड कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, क्षेत्रीय अधिकारी इन सभी जानकारियों की एक कंसोलिडेटेड मंथली रिपोर्ट बनाकर डीजीएफटी (DGFT) मुख्यालय को केंद्रीय निगरानी के लिए भेजेंगे। सवाल 9: देश में सोने का इम्पोर्ट इस समय किस स्तर पर पहुंच गया है? जवाब: साल 2025-26 के दौरान भारत का गोल्ड इम्पोर्ट 24 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर $71.98 अरब (रिकॉर्ड स्तर) पर पहुंच गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस दौरान सोने की मात्रा (वॉल्यूम) में थोड़ी कमी आई, लेकिन ग्लोबल मार्केट में कीमतें बढ़ने से कुल बिल बहुत ज्यादा बढ़ गया। भारत सबसे ज्यादा सोना स्विट्जरलैंड से मंगाता है, जिसके बाद यूएई (UAE) और दक्षिण अफ्रीका का नंबर आता है। सवाल 10: सरकार के इन सख्त फैसलों पर ज्वेलरी इंडस्ट्री का क्या कहना है? जवाब: ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी काउंसिल सहित कई प्रमुख इंडस्ट्री बॉडीज ने इस पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इम्पोर्ट ड्यूटी को 15% करने और चांदी पर इस तरह के प्रतिबंध लगाने से बाजार में ग्रे-मार्केट (अवैध कारोबार) सक्रिय हो सकता है। इससे सोने-चांदी की स्मगलिंग (तस्करी) बढ़ने की आशंका है, जिससे ईमानदारी से काम करने वाले असली कारोबारियों को नुकसान होगा। सोना इस साल 25 हजार और चांदी 38 हजार महंगी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 25,015 रुपए और चांदी 38,080 रुपए महंगी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.58 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.69 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। पीएम ने एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की प्रधानमंत्री ने कहा ‘एक समय था, जब संकट आने पर देशहित में लोग सोना दान दे देते थे। आज दान की जरूरत नहीं है, लेकिन देशहित में हमें यह तय करना होगा कि सालभर तक घर में कोई कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे। विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हमारी देशभक्ति हमें चुनौती दे रही है और हमें यह स्वीकार करके विदेशी मुद्रा बचानी होगी।’ ऐसा क्यों कहा: पीएम मोदी ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए ये अपील की। भारत अपने इस्तेमाल का करीब 99% सोना विदेशों से खरीदता है। 2025-26 में सोने का ये इम्पोर्ट बिल करीब 6.4 लाख करोड़ रुपए का था। विदेशों से खरीदे जाने वाले सामान के कुल खर्चे में 9% हिस्सेदारी के साथ सोना दूसरे नंबर पर है।
