सुशासन तिहार में अफसरों की क्लास, कर्मचारी बोले- सब रीलबाजी:CM से लेकर सांसद-विधायक ने मंच से फटकारा; कहीं सस्पेंशन तो कहीं बैठक से निकाला

छत्तीसगढ़ में 1 मई से शुरू हुए सुशासन तिहार का मकसद लोगों की शिकायतें सुनना और उनका समय पर समाधान करना था। लेकिन इस बार यह अभियान सिर्फ आवेदन लेने और समाधान शिविर लगाने तक सीमित नहीं रहा। पूरे अभियान के दौरान कई ऐसे मौके आए जब मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद और विधायक अधिकारियों पर नाराज होते दिखाई दिए। कहीं अधिकारियों को मंच से फटकार लगाई गई, कहीं बैठक से बाहर भेज दिया गया, तो कहीं सस्पेंशन के आदेश तक जारी हो गए। करीब एक महीने के अंदर अलग-अलग जिलों से ऐसे कई मामलों के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इसका छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन ने विरोध किया है और आंदोलन की चेतावनी दी है। फेडरेशन ने ये भी आरोप लगाया कि ये सब सोशल मीडिया पर रील्स के लिए किया जा रहा है। आइए तारीखवार जानते हैं कि सुशासन तिहार के दौरान कब, कहां और किस जनप्रतिनिधि ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, जिसका अब कर्मचारी संगठन विरोध कर रहा है। 4 मई: मुख्यमंत्री ने अधिकारी को बैठक से बाहर भेजा सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बलरामपुर जिले के दौरे पर थे। समीक्षा बैठक के दौरान लोक निर्माण विभाग (PWD) के एक अधिकारी से सड़क मरम्मत कार्यों की जानकारी मांगी गई। अधिकारी ना तो जानकारी दे पाए और न ही सवालों का संतोषजनक जवाब दे सके। इस पर मुख्यमंत्री नाराज हो गए। उन्होंने अधिकारी से कहा कि पहले सही जानकारी लेकर आएं और उसके बाद बैठक में शामिल हों। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अधिकारी को बैठक से बाहर जाना पड़ा। इस घटना के बाद बैठक में मौजूद अधिकारियों के बीच सन्नाटा छा गया। बैठक में मौजूद अधिकारियों के लिए यह साफ संदेश था कि अधूरी जानकारी और लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जनता से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ समय पर पूरा किया जाए। 4 मई: राजिम शिविर में अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर भड़के विधायक इसी दिन राजिम के पास ग्राम सेम्हरतरा में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में विधायक रोहित साहू ने विभागवार समीक्षा की। स्टॉलों का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने मंच से एक-एक विभाग के अधिकारियों को बुलाकर जानकारी ली। कई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं मिले। इस पर विधायक ने नाराजगी जताई। मत्स्य विभाग के अधिकारी से योजनाओं के लाभार्थियों की संख्या पूछी गई तो वे तुरंत जानकारी नहीं दे सके। विधायक ने कहा कि शिविर में आने से पहले पूरी तैयारी और जानकारी के साथ आना चाहिए। बिजली विभाग के डीई भी मौके पर मौजूद नहीं थे। विधायक ने उन्हें तत्काल बुलाने के निर्देश दिए। बाद में अधिकारी पहुंचे और विभागीय कामकाज की समीक्षा की गई। 7 मई: मंत्री टंकराम वर्मा ने पटवारी के निलंबन के निर्देश दिए भाटापारा में आयोजित समाधान शिविर के दौरान लोगों ने राजस्व संबंधी शिकायतें मंत्री टंकराम वर्मा के सामने रखीं। शिकायतों की समीक्षा के दौरान एक पटवारी के खिलाफ लगातार लापरवाही की बात सामने आई। इस पर मंत्री ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित पटवारी को निलंबित करने के निर्देश दिए। ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि एक छोटे किसान को कई दिनों तक दफ्तरों के चक्कर लगवाए गए। उसकी जमीन को रिकॉर्ड में ‘निरंक’ दिखा दिया गया। मंत्री ने साफ कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि शिकायतों का समय पर निराकरण सुनिश्चित करें। 7 मई: विधायक बोले- पटवारी को जूते से मारूंगा इसी दिन एक और मामला सामने आया। जहां गरियाबंद जिले में छुरा ब्लॉक के ग्राम पाटसिवनी में सुशासन तिहार के तहत जनसभा हुई। इस सभा में एक शिकायत पर राजिम से भाजपा विधायक रोहित साहू ने मंच से कहा कि रिश्वत लेने वाले पटवारी को जूते से मारूंगा। इस घटना का वीडियो वायरल हुआ था। वहीं पटवारी के लिए अपशब्द कहने पर पटवारी संघ ने सुशासन तिहार का बहिष्कार कर दिया गया था। 7 मई: खाली कुर्सी देखकर भड़के भाजपा नेता अमलीपदर तहसील मुख्यालय में आयोजित सुशासन शिविर में खाली कुर्सियां देखकर पूर्व संसदीय सचिव गोवर्धन मांझी भड़क गए थे। भाजपा नेता मांझी ने अधिकारियों पर फोन न उठाने और शिविर की तैयारियों में लापरवाही का आरोप लगाया। कहा कि कलेक्टर साहब, आप फोन तो उठा लिया करें। इस दौरान कलेक्टर भगवान सिंह उईके मंच पर ही मौजूद थे। 8 मई: शकुंतला पोर्ते बोलीं- जनता का काम नहीं होगा तो श्राप देगी बलरामपुर जिले में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रतापपुर विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराज नजर आईं थी। लोगों ने उन्हें बताया कि कई मामलों में आवेदन देने के बाद भी काम नहीं हो रहा है और लोगों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इस पर विधायक ने मंच से अधिकारियों को नसीहत देते हुए कहा, ‘परेशानी लेकर आने वाली जनता का अगर काम नहीं होता है तो वह श्राप देती है।’ उन्होंने आगे कहा, पढ़-लिख लेने से कोई जनता से ऊपर नहीं हो जाता। आपके हाथ में कलम की ताकत है, लेकिन हमारे पास जनता की ताकत है। 8 मई: मंत्री दयालदास बघेल ने आबकारी अधिकारी को लगाई फटकार सुशासन तिहार के तहत 8 मई को बेमेतरा में आयोजित समाधान शिविर के दौरान मंत्री दयालदास बघेल अवैध शराब बिक्री की शिकायतों पर नाराज नजर आए। शिविर में ग्रामीणों ने कुछ गांवों में खुलेआम अवैध शराब बिकने की शिकायत की थी। शिकायत सामने आने के बाद मंत्री ने मंच से ही आबकारी विभाग के अधिकारी से पूछा कि इस पर क्या कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी ने जवाब दिया कि विभाग छापेमारी करेगा और कार्रवाई करेगा। अधिकारी का जवाब सुनते ही मंत्री ने कहा, “छापा मारोगे तो पकड़ाएगा? दारू तो तुम ही दे रहे हो उसको, तुम ही बता दोगे कि छापा है, क्या छापा मारोगे?” मंत्री ने पुलिस अधिकारियों से कहा, “कोड़िया और झाल में बिक रही शराब को बंद कराओ।” इसके बाद उन्होंने फिर आबकारी विभाग की ओर इशारा करते हुए कहा, “ये लोग कहां पकड़ेंगे। यही लोग तो दारू दे रहे हैं। आप लोग देखो इन दोनों गांवों में।” 15 मई: तहसीलदार से बोले बृजमोहन – सांसद को कितना पैसा दिए हो? रायपुर जिले के आरंग क्षेत्र के समोदा नगर पंचायत में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान सांसद बृजमोहन अग्रवाल को राजस्व विभाग से जुड़ी कई शिकायतें मिलीं। शिकायतों का जिक्र करते हुए उन्होंने नायब तहसीलदार गजानंद सिदार को मंच से फटकार लगाई। सांसद ने नायब तहसीलदार गजानंद सिदार को मंच पर बुलाया और कहा, “आपका अभिनंदन करें कि क्या करें बताओ?” इसके बाद उन्होंने कहा, “सबसे ज्यादा शिकायत आपकी है। कितना पैसा लेते हो, जो लोगों को बोलते हो… क्या बोलते हो लोगों से? कितना पैसा दिए हो सांसद जी को… कितना पैसा दिए हो?” यह बयान सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोग ताली बजाने लगे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। 18 मई: ‘हमें पता है अवैध शराब कहां बिक रही है’ 18 मई को रायपुर नगर निगम के जोन-5 स्थित अश्विनी नगर में आयोजित सुशासन तिहार शिविर में सांसद बृजमोहन अग्रवाल फिर सख्त रुख में दिखाई दिए। मुद्दा था शहर में अवैध शराब की बिक्री। मंच से उन्होंने पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारियों से सवाल पूछा कि अगर आम लोगों को पता है कि कहां अवैध शराब बिक रही है तो अधिकारियों को क्यों नहीं पता। उन्होंने अधिकारियों से कहा, “कोई बड़े से बड़ा आदमी हो उसको उठाकर बंद करो।” फिर बोले,”3 महीना जमानत नहीं होगी ना, बंद हो जाएगा तो… करो ना बंद, क्यों नहीं बंद करते?” इसके बाद उन्होंने अधिकारियों से पूछा, “हमें मालूम है कि अवैध शराब कहां बिक रही है, तो क्या पुलिस वालों को नहीं मालूम?” बृजमोहन ने भाठागांव, मठपुरैना, चंगोराभाठा, संतोषी नगर और टिकरापारा का नाम लेते हुए कार्रवाई की मांग की। 22 मई: चिरमिरी समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री का सबसे बड़ा एक्शन सुशासन तिहार के दौरान सबसे बड़ी कार्रवाई 22 मई को चिरमिरी में हुई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सूरजपुर, कोरिया और एमसीबी जिले के अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक ले रहे थे। इसी दौरान कोरिया जिले में किसानों को खाद वितरण में गड़बड़ी और खाद गबन का मामला सामने आया। मुख्यमंत्री ने बिना देरी किए सहायक आयुक्त एवं सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं आयुष प्रताप सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए। साथ ही खाद गबन मामले में शाखा प्रबंधक कल्लू प्रसाद मिश्रा के खिलाफ भी कार्रवाई हुई। बैठक में मौजूद अधिकारियों के अनुसार इस कार्रवाई के बाद पूरा माहौल बदल गया। मुख्यमंत्री ने साफ संकेत दिया कि किसानों और आम लोगों से जुड़े मामलों में लापरवाही किसी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। 25 मई: अधिकारियों को टंकराम बोले – सांप की तरह बैठे रहते हो 25 मई को राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने रायपुर तहसील कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान एक महिला ने शिकायत की कि वह अपने रजिस्ट्री रिकॉर्ड में सुधार के लिए एक महीने से दफ्तर के चक्कर लगा रही है, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हो रही। शिकायत सुनते ही मंत्री नाराज हो गए। उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा, “जनता की सेवा के लिए बैठे हो, कुर्सियां तोड़ने के लिए नहीं।” इसके बाद उन्होंने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा, “सांप की तरह बैठे हो और लोगों की समस्याओं का समय पर निराकरण नहीं करते।” मंत्री की नाराजगी के बाद अधिकारी तत्काल शिकायत के निराकरण में जुट गए। 31 मई: बेमेतरा में रमन सिंह ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उठाए सवाल हालांकि यह मामला सीधे तौर पर सुशासन तिहार से जुड़ा नहीं था, लेकिन उसी दौरान हुई एक सरकारी आयोजन की अव्यवस्था भी चर्चा में रही। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत बेमेतरा में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में हुई अव्यवस्थाओं को लेकर विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह अधिकारियों पर नाराज दिखाई दिए। ये सुशासन तिहार का मामला नहीं था लेकिन बेमेतरा विधायक दीपेश साहू समेत 23 जोड़ों की सरकारी योजना में सामूहिक विवाह का कार्यक्रम था। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत बेमेतरा में सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मंत्री और कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे। तेज बारिश और आंधी के कारण कार्यक्रम प्रभावित हो गया। इसके बाद डॉ. रमन सिंह ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई। उन्होंने कलेक्टर और एसपी से कहा कि इतनी बड़ी मौजूदगी के बावजूद पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकी। उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने ऐसी अव्यवस्था नहीं देखी थी। बाद में रेस्ट हाउस में भी उन्होंने अधिकारियों को बेहतर तैयारी की सलाह दी। तेज बारिश और आंधी के कारण कार्यक्रम प्रभावित हो गया। व्यवस्थाओं को लेकर नाराज रमन सिंह ने अधिकारियों से कहा, “यह ठीक तरीका नहीं है। मुख्यमंत्री यहां मौजूद हैं और उनका पीछे से स्वागत किया जा रहा है।” बाद में रेस्ट हाउस में उन्होंने कहा, ढाई घंटे बीत जाने के बाद भी प्रशासन वैकल्पिक स्थल की व्यवस्था नहीं कर पाया। उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा, “मैं 15 साल मुख्यमंत्री रहा, लेकिन ऐसी व्यवस्था कभी नहीं देखी और फिर जोड़ा, चलो, अब शायद वे सीख जाएंगे।” 1 जून: जो करना है कर लो वाले CEO सस्पेंड दुर्ग जिले में सुशासन तिहार के दौरान जनपद पंचायत CEO रूपेश कुमार पांडेय का वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में वे बीजेपी ग्रामीण महामंत्री पुराण देशमुख से बहस करते नजर आए। विवाद सामुदायिक भवन के लिए राशि जारी करने के मुद्दे पर हुआ था। यह पूरा विवाद विधायक ललित चंद्राकर की मौजूदगी में हुआ था। वीडियो में अधिकारी को यह कहते हुए सुना गया, “जो करना है कर लो।” वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही वायरल हो गया। इसके बाद बीजेपी नेताओं और स्थानीय लोगों ने अधिकारी के व्यवहार पर सवाल उठाए थे। मामले के तूल पकड़ने के बाद राज्य सरकार ने रूपेश कुमार पांडेय को सस्पेंड कर दिया है। 4 जून: गोबरा नवापारा में रेंजर पर कार्रवाई के निर्देश सुशासन तिहार के अंतिम चरण में 4 जून को रायपुर जिले के गोबरा नवापारा में आयोजित शिविर के दौरान सांसद बृजमोहन अग्रवाल को एक और शिकायत मिली। कुलेश्वर महादेव शासकीय महाविद्यालय की बाउंड्री वॉल निर्माण को लेकर वन विभाग की आपत्ति का मामला सामने आया। जब संबंधित मामले पर चर्चा हुई तो पता चला कि जिम्मेदार रेंजर शिविर में मौजूद ही नहीं है। इस पर सांसद नाराज हो गए। उन्होंने मंच से कहा, “रेंजर यहां क्यों नहीं है?” इसके बाद अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा, “शोकॉज नोटिस जारी करो और उसे सस्पेंड करो।” मई-जून: विधायक और नायब तहसीलदार विवाद ने खींचा प्रदेश का ध्यान सुशासन तिहार के दौरान नेताओं और अधिकारियों के बीच कई बार तीखी नोकझोंक देखने को मिली, लेकिन इसी बीच सरगुजा जिले का एक मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया। यह मामला सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो और नायब तहसीलदार तुषार मानिक के बीच विवाद से जुड़ा था। हालांकि यह मामला सुशासन तिहार से जुड़ा नहीं था, लेकिन इसी दौरान विधायक और अधिकारी के बीच टकराव का सबसे बड़ा मामला सरगुजा के सीतापुर में सामने आया, जिसकी गूंज पूरे प्रदेश में सुनाई दी।” विधायक रामकुमार टोप्पो का आरोप था कि नायब तहसीलदार तुषार मानिक ने उनकी चचेरी बहन से अभद्र व्यवहार किया था। वहीं तुषार मानिक ने आरोप लगाया कि इसी बात को लेकर विधायक और उनके समर्थकों ने उनके साथ मारपीट की। मामले में दोनों पक्षों की ओर से काउंटर एफआईआर दर्ज हुई। विवाद इतना बढ़ा कि प्रदेशभर के करीब 500 तहसीलदार हड़ताल पर चले गए। तहसीलदारों ने सरकारी अधिकारियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कार्रवाई की मांग की। बाद में राजस्व मंत्री से आश्वासन मिलने के बाद हड़ताल समाप्त हुई। इस बीच विधायक रामकुमार टोप्पो ने नायब तहसीलदार तुषार मानिक और एसडीएम फागेश सिन्हा को हटाने की मांग को लेकर सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत से मुलाकात की। इसके बाद कलेक्टर ने तुषार मानिक को सीतापुर से हटाकर अंबिकापुर कलेक्टर कार्यालय में अटैच कर दिया। वहीं राजापुर उप तहसील का प्रभार सीतापुर तहसीलदार उमेश बाज को सौंपा गया। वहीं अब एसडीएम फागेश सिन्हा के तबादले पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। यह मामला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि एक तरफ विधायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई, दूसरी तरफ पूरे प्रदेश के तहसीलदार हड़ताल पर उतर आए। बाद में प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों को हटाने की कार्रवाई ने इस विवाद को और राजनीतिक बना दिया। कर्मचारियों ने दी आंदोलन की चेतावनी इस तरह की सार्वजनिक डांट फटकार का कर्मचारियों ने विरोध किया है। छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन ने पूरे प्रदेश में आंदोलन की चेतावनी दी है। बता दें कि फेडरेशन में 5 लाख कर्मचारी-अधिकारी जुड़े हैं। फेडरेशन के महासचिव चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि, उनकी भी अपनी मानवता और पारिवारिक पृष्ठभूमि है। इस तरह से मिसबिहेव कर उन्हें अपमानित किया जा रहा। फेडरेशन के पदाधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है। जवाबदेही का संदेश या सार्वजनिक फटकार? सुशासन तिहार के दौरान सामने आए ये मामले दिखाते हैं कि इस बार अभियान सिर्फ शिकायतें लेने तक सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री, सांसद और विधायक तक कई जनप्रतिनिधि अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते नजर आए। कहीं निलंबन हुए, कहीं मंच से फटकार लगी और कहीं अधिकारियों से सीधे जवाब मांगा गया। सरकार इसे जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया बता रही है, जबकि विपक्ष समय-समय पर इसे अधिकारियों की सार्वजनिक फटकार का मामला बताता रहा है। विपक्ष समय-समय पर यह सवाल उठाता रहा है कि अगर इतने बड़े पैमाने पर शिकायतें सामने आ रही हैं और अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से फटकारना पड़ रहा है, तो यह प्रशासनिक निगरानी की कमजोरी भी दिखाता है। सवाल यह भी है कि जिन समस्याओं पर सुशासन तिहार के मंचों से नाराजगी जताई गई, वे पहले क्यों नहीं सुलझाई जा सकीं। एक और महत्वपूर्ण बात यह रही कि ज्यादातर मामलों में कार्रवाई जनता की मौजूदगी में हुई। इससे आम लोगों को यह संदेश मिला कि उनकी शिकायतें सीधे जनप्रतिनिधियों तक पहुंच रही हैं। वहीं अधिकारियों के लिए भी यह स्पष्ट संकेत था कि अब फील्ड स्तर की लापरवाही आसानी से छिप नहीं पाएगी।

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