‘साउथ-सूडान में टॉयलेट साफ करवाया…एसिड पिलाया’:40,000 की नौकरी के लिए फंसा युवक, कई देशों के लोग बंधक; रायपुर के वकील की मदद से वापसी

साउथ सूडान में भारतीय बेरोजगारों को अफसर वाली नौकरी देने का झांसा देकर श्रमिकों वाला काम करवाया जा रहा है। भारत से बुलवाकर सबसे पहले उनके दस्तावेज जब्त कर लिए जाते हैं फिर उन्हें बंधक बनाकर टॉयलेट तक साफ कराया जा रहा है। साउथ सूडान में स्टेशनरी सप्लाई का काम करने वाली अहमदाबाद की टेक्नो ट्रेडिंग कंपनी पर आदित्य राठौर नाम के युवक ने बंधक बनाकर काम करवाने, झूठे आरोप में जेल भिजवाने और जान से मारने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। भारत सहित कई देशों के लोग अब भी वहां बंधक हैं। आदित्य राठौर किस तरह भारत से साउथ सूडान पहुंचा? वहां पर किस विवाद के बाद जेल पहुंचा? रायपुर में सुप्रीम कोर्ट के वकील निश्चय सिंह ने उसका रेस्क्यू किस तरह से करवाया? युवक ने सारी बातें दैनिक भास्कर को बताई। पढ़िए इस रिपोर्ट में युवक की आपबीती… मेरा नाम आदित्य राठौर है। मैं मूलत: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी का रहने वाला हूं। मैं नागपुर में अपने मामा के घर में रहकर एक निजी होटल में काम करता था। मेरा अहमदाबाद का दोस्त नीरव शाह साउथ सूडान में टेक्नो ट्रेडिंग कंपनी में काम करता है। होटल में काम करने के दौरान उससे दोस्ती हुई थी। उससे मैंने नवंबर में बात की, तो उसने साउथ सूडान में उसकी कंपनी में अफसर की पोस्ट और 40 हजार सैलरी दिलवाने का वादा किया। HR ने अच्छा घर, खाना मिलने की बात कही नीरव ने कंपनी के HR से इंटरव्यू करवाया, तो सेल्समैन की पोस्ट के लिए चयनित हुआ। चयन के दौरान एचआर ने अच्छा घर और खाना ऑफिस की तरफ से मिलने की बात बताई और कंपनी का ऑफर लेटर भेज दिया। कंपनी की तरफ से कुछ दिन बाद टिकट आया, तो मैं 27 अक्टूबर 2024 को साउथ सूडान पहुंचा। साउथ सूडान पहुंचते ही कंपनी के एचआर से मिला, तो उसने पासपोर्ट और वीजा अपने पास रख लिया और कंपनी की ओर से बनाए गए टीन के डिब्बा नुमा घर में रहने के लिए कहा। मैंने काम पूछा, तो एचआर ने बताया, कि अभी सेल्समैन की पोस्ट भर गई है, तो क्लीनिंग और किराएदारों से रेंट वसूलने का काम करो। कुछ दिन बाद तुम्हे सेल्समैन डिपार्टमेंट में शिफ्ट कर देंगे। हवाला के माध्यम से कंपनी देती थी सैलरी पीड़ित आदित्य के अनुसार दिन के 17–17 घंटे काम के बाद जो उसे मंथली सैलरी दी जाती थी, वो सीधे अकाउंट में ना देकर हवाला के माध्यम से दी जाती थी। कंपनी के जिम्मेदारी अपना अधिकांश लेन-देन अंगड़िया (माध्यम) से करते थे। (अंगड़िया, पैसे या सामान भेजने का एक तरीका है) मैंने इंडिया वापस आने के लिए कंपनी को डेढ़ लाख रुपए अंगड़िया के माध्यम से दिया है। ये पैसा मैंने अपने रूम मेट के परिवार की मदद से जमा करवाया था। पैसा देने के बाद भी कंपनी ने मुझे झूठे आरोप लगाकर जेल भिजवा दिया। मेरे जैसे कई और पीड़ित अभी कंपनी में फंसे है। मेरा रूम मेट, जिसने मेरी मदद की, वो अपने परिवार से संपर्क नहीं कर पा रहा है। टेक्नो ट्रेडिंग कंपनी पर कार्रवाई हो और वहां फंसे भारतीयों का रेस्क्यू हो, इसलिए विदेश मंत्री के पास जाकर उनकी शिकायत करूंगा। 150 से ज्यादा लोगों से मांगी मदद आदित्य ने बताया कि बडी जेल में एक ही कपड़ा पहनने और खाना नहीं मिलने से वो बीमार रहने लगा। जेल प्रबंधन की मदद से उसने इंडिया में अपने परिचितों को सूचना भेजना शुरू किया। इस दौरान रायपुर के रहने वाले सुप्रीम कोर्ट के वकील निश्चय सिंह से उसका संपर्क हुआ। एडवोकेट ने उनका केस लिया और केंद्र सरकार, राज्यपाल, एजेंसी और साउथ सूडान की लोकल एजेंसियों से संपर्क करके उसे बाहर निकलवाया और भारत वापस आने में मदद की। जिसके बाद आदित्य 8 फरवरी 2025 को सूडान से रायपुर पहुंचा। टेक्नो ट्रेडिंग कंपनी के अधिकारियों ने बनाई दूरी आदित्य सिंह की शिकायत पर टेक्नो ट्रेडिंग कंपनी के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई। उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई और पक्ष जानने की कोशिश दैनिक भास्कर टीम ने भी की। लेकिन कंपनी प्रबंधन ने पूरे मामले में अपना पक्ष नहीं रखा। साउथ सूडान में आदित्य को प्रताड़ित किया गया वकील निश्चय सिंह के मुताबिक, आदित्य राठौर पर झूठा आरोप लगाकर उसे साउथ सूडान में प्रताड़ित किया गया। मुझे इसके बारे में पता चला तो छत्तीसगढ़ के राज्यपाल, गवर्नर, इंडिया एम्बेसी के अधिकारियों को घटना की जानकारी दी और आदित्य को वहां से रेस्क्यू कराने की प्रक्रिया शुरू की थी।

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