जिस पैसे से ओलिंपिक मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को ट्रेनिंग मिलनी थी, उससे दिल्ली के बड़े अधिकारी अपने रिहायशी इलाकों में स्विमिंग पूल और टेनिस कोर्ट चमका रहे हैं। यह खुलासा ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट में हुआ है। इसके अनुसार नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड (NSDF) का करोड़ों रुपया ब्यूरोक्रेट्स की सोसायटियों और क्लबों में डाइवर्ट किया गया। दावा है कि खेल फैसिलिटी के लिए आवंटित इस फंड का एक हिस्सा सिविल सेवा संस्थानों और नौकरशाहों की दिल्ली स्थिति कॉलोनियों के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में खर्च हुआ है। इतना ही नहीं, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की RSS से जुड़ी 2 संस्थाओं और एशिया व कैरेबियाई क्षेत्र के कुछ छोटे क्रिकेट बोर्ड पर भी पैसा खर्च किया गया। NSDF से टॉप्स जैसी स्कीम चलती हैं NSDF भारत सरकार का विशेष फंड है, जिसका उद्देश्य खेलों को बढ़ावा देना और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को फाइनेंशियल सपोर्ट देना है। इसकी स्थापना नवंबर 1998 में हुई थी। NSDF से टारगेट ओलिंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) जैसी स्कीम चलाई जाती हैं। NSDF फंड का संचालन केंद्रीय खेल मंत्री की देखरेख में 12 मेंबर्स की काउंसिल करती है। हालांकि, अनुदान प्रस्तावों को मंजूरी खेल मंत्रालय की 6 अधिकारियों की कमेटी देती है। यानी उसी सिस्टम के लोग इन अनुदानों से लाभान्वित होते हैं। न्यू मोती बाग में टैम्परेचर-कंट्रोल्ड स्विमिंग पूल बना लुटियंस दिल्ली के न्यू मोती बाग जैसे पॉश इलाकों में NSDF के पैसे से टैम्परेचर-कंट्रोल्ड स्विमिंग पूल और आलीशान टेनिस कोर्ट बनाए गए हैं। NSDF में आने वाला डोनेशन 2023-24 में ₹85.26 करोड़ था, जो 2025-26 में घटकर ₹37.02 करोड़ रह गया। फंड कम होने के बावजूद अधिकारियों की सुविधाओं के लिए दूसरी किस्त जारी कर दी गई। 2019 में खेलो इंडिया योजना का 2.8 करोड़ खर्च हुआ था रिकॉर्ड्स के मुताबिक, 2024 में NSDF अनुदान आवेदनों की जांच करने वाली 6 मेंबर्स की कमेटी के पास एक प्रस्ताव पहुंचा। यह प्रस्ताव कई सीनियर ब्यूरोक्रेट्स की रिहायशी कॉलोनी के लिए था। कॉलोनी दिल्ली के बीचोंबीच स्थित है, कड़ी सुरक्षा में रहती है और 100 एकड़ में फैली है। यह पहली बार नहीं था जब खिलाड़ियों का पैसा न्यू मोती बाग में खर्च हुआ हो। इससे पहले 31 जुलाई 2019 को SAI ने खेलो इंडिया योजना के तहत न्यू मोती बाग कॉम्प्लेक्स में खेल सुविधाएं विकसित करने के लिए 2.8 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। 5 साल बाद हार्ड कोर्ट्स को अपग्रेड किया 7 जून 2024 को NSDF से 2.2 करोड़ रुपए का एक और अनुदान मंजूर किया गया। यह रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन, मोती बाग को मिला। इसका उद्देश्य नई दिल्ली स्थित न्यू मोती बाग रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स में खेल सुविधाओं का अपग्रेड और नवीनीकरण था। 2024-25 में 1.1 करोड़ रुपए जारी किए गए। वहीं, 2025-26 में 88 लाख रुपए की दूसरी किस्त दी गई, जबकि 2021-22 के बाद NSDF में योगदान सबसे कम था। SAI की प्रोजेक्ट स्टेटस रिपोर्ट के मुताबिक, टेनिस कोर्ट पहले ही 2019 की खेलो इंडिया परियोजना का हिस्सा थे। इसके बावजूद पांच साल बाद इन्हीं हार्ड कोर्ट्स को फिर अपग्रेड किया गया। 5 साल में 50 करोड़ का खेल अनुदान जारी हुआ पिछले 5 वर्षों के रिकॉर्ड्स के मुताबिक, खेल ढांचे, उपकरण और खेल प्रोत्साहन के लिए NSDF ने 2021 से 2026 के बीच करीब 50 करोड़ रुपए का अनुदान जारी किए हैं। इसका एक हिस्सा नौकरशाहों से जुड़ी संस्थाओं पर भी खर्च हुआ। संसदीय समिति ने भी जताई नाराजगी अगस्त 2025 में संसद की एक स्थायी समिति ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया था। समिति ने साफ कहा था कि “यह पैसा आवासीय कॉलोनियों और अधिकारियों के संगठनों को देना बंद किया जाना चाहिए।” लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, इसी सिस्टम के अधिकारी इस फंड के सबसे बड़े लाभार्थी बने हुए हैं। जिम्मेदार बोले- सुविधाएं फिटनेस को बढ़ावा देने के लिए हैं न्यू मोती बाग रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के प्रेसिडेंट सुधांशु पांडे ने कहा- ‘ये सुविधाएं फिटनेस को बढ़ावा देने के लिए हैं और पैसा कहां से आएगा, यह सरकार तय करती है।’ SAI के पूर्व खेल अधिकारियों ने इसे अनैतिक बताते हुए कहा कि टैक्सपेयर्स का पैसा खिलाड़ियों के लिए है, न कि ब्यूरोक्रेट्स की लाइफस्टाइल सुधारने के लिए। ————————————————————– ओलिंपिक स्पोर्ट्स से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… नर्स बनने के लिए ओलिंपिक विजेता का संन्यास; कहा- मुझे ‘असली दुनिया’ का आकर्षण खींच रहा ब्रिटेन की सबसे सफल और दिग्गज साइकिलिस्ट में से एक, तीन बार की ओलिंपिक मेडलिस्ट केटी आर्चीबाल्ड ने अचानक संन्यास ले लिया है। हैरानी की बात यह है कि उन्हें इसी साल होने वाले 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए स्कॉटलैंड की टीम में चुना गया था। पढ़ें पूरी खबर
