मनरेगा का नाम बदलकर VB G RAM G करने का विरोध कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतरकर करेगी। यह जानकारी शनिवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दी। उन्होंने कहा- मोदी को गांधी सरनेम से दिक्कत है, इसलिए मनरेगा का नाम बदला गया। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा- मनरेगा का नाम बदलने का फैसला कैबिनेट और राज्यों से बिना पूछे ही ये फैसला लिया गया है। मोदी वन मैन शो चल रहे है, मोदी जी जो करना चाहते हैं करते हैं। इसका पूरा फायदा 2-3 अरबतियों को मिल रहा है। इसका नुकसान ग्रामीण इलाकों को हो रहा है। राहुल ने कहा- मनरेगा सिर्फ योजना नहीं थी। मनरेगा राइट बेस्ड कॉन्सेप्ट था। यानी इससे देश के करोड़ों लोगों को मिनिमम वेज (न्यूनतम आय) मिलती थी। मनरेगा बंद करना डायरेक्ट राइट बेस्ड के कॉन्सेप्ट पर आक्रमण है। ये जो पैसा लिया जा रहा है, वो राज्यों से छीनकर केंद्र सरकार ले रहा है। ये पावर और फाइनेंस का कान्ट्रैक्शन है। ये फैसला सीधे पीएम हाउस से लिया गया है। खड़गे बोले- SIR अधिकारों को कम करने की साजिश दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में खड़गे ने यह भी कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया लोकतांत्रिक अधिकारों को कम करने की सुनियोजित साजिश है। घर-घर जाकर यह सुनिश्चित करें कि गरीब, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय के वोटर्स के नाम वोटर लिस्ट न हटें। खड़गे की स्पीच की 4 प्रमुख बातें… बैठक में शशि थरूर भी पहुंचे कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में शशि थरूर भी शामिल हुए, जबकि वे पिछली दो बड़ी बैठकों में नहीं आए थे। यह बिहार चुनाव में हार के बाद CWC की पहली बैठक है, जिसमें कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री व PCC अध्यक्ष शामिल हुए। बैठक में जी राम जी बिल पर सरकार के खिलाफ पार्टी की रणनीति पर चर्चा की जा रही है। बैठक से पहले खड़गे ने मनरेगा को यूपीए सरकार की दूरदर्शी योजना बताते हुए कहा कि इसकी सराहना विश्वभर में हुई, इसी कारण इसका नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने बिना अध्ययन या परामर्श के इस कानून को समाप्त किया और कृषि कानूनों का उदाहरण देते हुए कहा कि जनविरोध के बाद सरकार को उन्हें वापस लेना पड़ा। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की निंदा की और कहा कि भाजपा-आरएसएस से जुड़े संगठनों द्वारा क्रिसमस समारोहों पर हमलों से सांप्रदायिक सौहार्द और भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचा है। बैठक की 2 तस्वीरें… कानून का विरोध क्यों हो रहा UPA-काल के MGNREGA की जगह लेने वाला विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक शीतकालीन सत्र में पारित किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इसे अपनी मंजूरी दे दी है। कांग्रेस ने वाले नए कानून पर आपत्ति जताई है। उसका कहना है कि यह महात्मा गांधी का अपमान है क्योंकि उनका नाम हटा दिया गया है। नया कानून हर ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वेतन रोजगार की गारंटी देता है, जिसके वयस्क सदस्य बिना किसी कौशल वाले शारीरिक श्रम के लिए तैयार होते हैं। हालांकि, केंद्रीय योजना के बजाय नया कानून यह प्रावधान करता है कि केंद्र और राज्यों को योजना की फंडिंग 60:40 प्रतिशत के अनुपात में साझा करनी होगी। ————————– ये खबर भी पढ़ें… थरूर कांग्रेस की स्ट्रैटजिक मीटिंग में फिर नहीं पहुंचे थे, कहा था- 90 साल की मां के साथ हूं; SIR पर हुई बैठक से भी दूर थे 30 नवंबर को पार्लियामेंट के विंटर सेशन को लेकर सोनिया गांधी की लीडरशिप में बैठक हुई थी। हालांकि थरूर के ऑफिस ने बताया था कि वह केरल में अपनी 90 साल की मां के साथ थे। यह दूसरा मौका था जब थरूर पार्टी की किसी मीटिंग में नहीं पहुंचे। इससे पहले खराब सेहत का हवाला देकर SIR मुद्दे पर बुलाई गई कांग्रेस की मीटिंग से भी दूर रहे थे। उस दौरान वे पीएम मोदी के इवेंट में शामिल हुए थे, जिसे लेकर बवाल मचा था। पढ़ें पूरी खबर…
