2010 की चैंपियन स्पेन ने फुटबॉल वर्ल्ड कप के प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली है। टीम ने गुरुवार के आखिरी मुकाबले में स्पेन ने ऑस्ट्रिया को 3-0 से हराया। टीम ने 2010 के बाद पहली बार नॉकआउट मुकाबले में जीत दर्ज की। मिकेल ओयारजाबाल ने दो गोल किए, जबकि पेड्रो पोरो ने एक गोल जोड़ा। राउंड ऑफ 16 में स्पेन का मुकाबला पुर्तगाल और क्रोएशिया के बीच होने वाले मुकाबले के विजेता से होगा। मैच रिपोर्ट पढ़िए… स्पेन ने अब तक कोई गोल नहीं खाया स्पेन ने पूरे मैच में गेंद पर कब्जा बनाए रखा और टूर्नामेंट का अपना सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन किया। टीम ने लगातार चौथे मैच में क्लीन शीट रखी। ऑस्ट्रिया की टीम पूरे मैच में गोल पर एक भी शॉट नहीं लगा सकी और गोलकीपर उनाई सिमोन को एक भी सेव नहीं करना पड़ा। पहले हाफ में शुरुआती सावधानी के बाद स्पेन ने हाइड्रेशन ब्रेक के बाद आक्रमण तेज किया। 36वें मिनट में मार्क कुकुरेला के पास पर मिकेल ओयारजाबाल ने गोल कर टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। यह टूर्नामेंट में उनका तीसरा गोल था। दूसरे हाफ में स्पेन ने लगातार दबाव बनाए रखा। एलेक्स बैएना ने शानदार मूव बनाया और उनका पास पेड्रो पोरो तक पहुंचा। पोरो ने हेडर से गोल कर अंतर 2-0 कर दिया। यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला गोल था।
89वें मिनट में कुकुरेला ने फिर बेहतरीन पास दिया, जिस पर ओयारजाबाल ने अपना दूसरा और टीम का तीसरा गोल कर जीत पक्की कर दी। यामाल ने सबसे ज्यादा समय मैदान पर बिताया 18 साल के स्टार विंगर लामिन यामाल ने पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा समय मैदान पर बिताया। उन्होंने स्पेन के 10 ऑन-टारगेट शॉट्स में से चार लगाए। 85वें मिनट में उनका जोरदार शॉट ऑस्ट्रिया के डिफेंडर डेविड अलाबा ने गोललाइन पर रोक दिया। इसके कुछ ही देर बाद उन्हें मैदान से बाहर बुला लिया गया। स्पेन के कोच लुइस डे ला फुएंते ने कहा, ‘बड़ी टीमें जरूरत के समय अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करती हैं। हमने शानदार मैच खेला और लगभग परफेक्शन के करीब पहुंचे। फिर भी हमें लगातार सुधार करना होगा, क्योंकि आगे हर मुकाबला कठिन होगा।’ ऑस्ट्रिया की कोशिश नाकाम रही ऑस्ट्रिया के गोलकीपर अलेक्जेंडर श्लेगर ने छह शानदार बचाव किए और कई आसान दिख रहे मौकों को गोल बनने से रोका। इसके बावजूद टीम हार नहीं टाल सकी। ऑस्ट्रिया 1998 के बाद पहली बार विश्व कप के नॉकआउट चरण में पहुंचा था। उसने ग्रुप चरण में अल्जीरिया के खिलाफ इंजरी टाइम में गोल कर ड्रॉ हासिल करते हुए अगले दौर में जगह बनाई थी। हालांकि टीम 1954 के बाद पहली बार नॉकआउट मुकाबला जीतने का इंतजार जारी नहीं रख सकी। ——————————————————–
