महेन्द्र कर्मा के बेटे ने कहा- वापस आ रहे नक्सली:छविंद्र बोले- बस्तर में फिर भर्ती, सरपंचों की ले रहे मीटिंग, जिंदा है गणेश उइके

केंद्र और राज्य सरकार दोनों बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे का दावा कर रही है। इस बीच दिवंगत नेता महेंद्र कर्मा के बेटे और कांग्रेस महामंत्री छविंद्र कर्मा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि, बस्तर में नक्सली बड़े स्तर पर दोबारा स्थानीय युवाओं की भर्ती कर रहे हैं। गांव-गांव में अब भी नक्सलियों की स्मॉल एक्शन टीम का मूवमेंट जारी है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में छविंद्र ने दावा किया है कि, बस्तर में नक्सली खत्म नहीं हुए हैं, बल्कि वे दोबारा बड़ी ताकत के साथ कमबैक की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 10-20 की संख्या में नक्सली आज भी गांवों में सरपंचों की बैठकें ले रहे हैं। फोर्स ने जिस खूंखार नक्सली लीडर गणेश उइके को मारने का दावा किया है, वो जिंदा है। छविंद्र ने चुनौती देते हुए कहा कि, अगर नक्सली खत्म हो गए हैं, तो बस्तर के SP हमें लिख कर दे दें कि हम बिना सुरक्षा के किसी भी गांव में साइकिल से जा सकते हैं। जिस दिन ऐसा होगा, मैं मान लूंगा कि खतरा टल गया। अब सिलसिलेवार पढ़िए कि छविंद्र कर्मा ने इंटरव्यू में क्या कहा?… सवाल- राज्य और केंद्र सरकार नक्सलवाद खत्म होने का दावा कर रहे हैं, क्या आप सरकार के दावे को गलत मानते हैं? जवाब- मैंने और मेरे परिवार ने नक्सलवाद का दंश झेला है। केंद्रीय गृहमंत्री का बयान देना कि हमने नक्सलवाद का अंत कर दिया है, ये अति उत्साह है। बस्तर में पिछले 40 सालों से नक्सलवाद है। जब भी नक्सली बैकफुट या साइलेंट हुए हैं ये बड़ी ताकत के साथ कमबैक किए हैं। जब नक्सली अटैकिंग मोड पर थे तब सरकार और पुलिस फोर्स डिफेंडिंग मोड पर होती थी। किसी का शांत होना इसे खात्मा नहीं मान सकते। गांवों में नक्सलियों की लगातार गतिविधियां दिख रही हैं। हमारे पास बहुत से इनपुट्स हैं। गांव में कहीं 10 कहीं 20 की संख्या में नक्सली मौजूद हैं। कुछ लोगों का एनकाउंटर करने और सरेंडर करने को नक्सलवाद का खत्म हो जाना कहना ये जल्दबाजी है। सवाल- क्या विपक्ष में रहकर आप बिना सबूत सरकार के दावों पर सवाल उठा रहे हैं? जवाब- पिछले 40 साल से हम नक्सलवाद से लड़ रहे हैं। नक्सलवाद की वजह से मैंने अपने पिता को भी खोया है। ये एक गंभीर विषय है। इसे हम राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देख सकते। मेरे पिता और मेरा परिवार लगातार नक्सलियों के खिलाफ लड़े हैं। नक्सली हमारे दुश्मन हैं। हम उनके भी टारगेट में रहते हैं, इसलिए हम भी उनकी सारी गतिविधियों की जानकारी लेते रहते हैं। यहां के SP हमें कह दें कि आप बिना सुरक्षा के साइकिल से किसी भी गांव में चले जाइए, जिस दिन ऐसा हुआ उस दिन मैं मानूंगा की नक्सली खत्म हो गए हैं। कुछ हथियारबंद लोगों का ही एनकाउंटर हुआ है। नक्सलियों की तादात बहुत ज्यादा है। मैं सरकार और गृहमंत्री को बताना चाहूंगा कि नक्सलियों ने बड़े पैमाने पर फिर से भर्ती चालू कर दी है। नक्सली गांव-गांव में सरपंचों की बैठकें ले रहे हैं। मैं नाम नहीं बताऊंगा। सरकार को इसकी जानकारी जुटानी चाहिए। हमारी लड़ाई विचारधारा से भी है। बंदूक से आप सिर्फ डरा सकते हैं, लेकिन उनके अंदर क्या चल रहा है ये नहीं बता सकते। यहां के स्थानीय MLA भी मेरे पिता के साथ एंटी नक्सल ऑपरेशन में साथ रहे हैं। गांवों में आज भी नक्सली आ रहे हैं। जिस दिन वाकई नक्सली खत्म होंगे सबसे पहले मैं सुरक्षा छोडूंगा। सवाल- बड़े नक्सली लीडर मारे गए या सरेंडर कर चुके, फिर नई भर्ती कौन करवा रहा है? जवाब – कुछ दिन पहले नक्सलियों की NCC की तरफ से एक बयान आया था कि उनके लोग अब भी एक्टिव हैं। जब फोर्स का दबाव आया तो ये अंडरग्राउंड हो गए हैं। खुद को ताकतवर बनाने में लगे रहते हैं। अपनी एनर्जी व्यर्थ नहीं करते। जब भी नक्सलियों के ऊपर सरकार और फोर्स हावी हुई है उन्होंने खुद को ताकतवर बनाकर कमबैक किया है। बॉर्डर्स पर जो गांव हैं वहां सरकार को अपने सूचना तंत्र मजबूत करना होगा। मेरी जानकारी में गणेश उइके के पास उनकी सबसे बड़ी टीम थी। गणेश उइके के साथ करीब 108 नक्सली रहते थे। पुलिस ने दावा किया है कि उसका एनकाउंटर हो गया है। हमने भी बॉडी देखी जिसके बाद जानकारी जुटाई, लेकिन जो मेरी जानकारी में है वो गणेश उइके नहीं है। बड़े लीडर्स की तरफ से भी गणेश उइके के मारे जाने का कोई बयान सामने नहीं आया था। इस पर सरकार को जांच करना चाहिए। सवाल- कांग्रेस सत्ता में रही, फिर भी झीरम हमले का सच बाहर क्यों नहीं आया? जवाब – इस मामले पर हमने भूपेश बघेल से भी चर्चा की थी। मामले की जांच के लिए हमने NIA से जांच रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन अंत तक उन्होंने हमारी सरकार को जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी थी। सवाल- झीरम के मास्टरमाइंड सरेंडर कर चुके, क्या उनसे सच जानने की कोशिश नहीं हुई? जवाब – सरकार का बड़ा दावा होता है। कोई भी लीडर पकड़ा गया या सरेंडर किया हो तो उसे झीरम का मास्टरमाइंड बताया गया। ये सवाल सरकार से भी है कि क्या सरकार में बैठे लोगों ने भी इन सरेंडर्ड किए नक्सलियों से पूछताछ कर सच बाहर लाने की कोशिश की? ये जवाबदारी सरकार की भी है। यदि इन्होंने ऐसा नहीं किया तो सरकार पीड़ितों को न्याय दिलाना नहीं चाहती। सवाल- मंत्री बेफिक्र होकर अब नक्सल इलाकों में घूम रहे, फिर आपको अब डर क्यों लग रहा है? जवाब – मुझे जाने में कोई आपत्ति नहीं है। क्या मुझे सरकार और यहां के SP परमिशन देते हैं? DRG के जवानों से पूछिए की क्या आखिर नक्सली खत्म हुए हैं? मेरे कई रिश्तेदार DRG में हैं। मैं उनका नाम नहीं लूंगा लेकिन ये जरूर कहूंगा कि उन्होंने मुझे नक्सलवाद को लेकर कई सच्चाई बताई है। सरकार के कोई भी मंत्री यहां आएं मैं उन्हें चैलेंज करता हूं कि वो मेरे साथ बिना किसी सुरक्षा के किसी भी गांव में जाकर दिखाए। सवाल- क्या सुरक्षा कम होने के डर से आप ऐसे बयान दे रहे हैं? जवाब – आप फ्री होकर कहीं भी चले जाते हैं। हमारी भी बहुत सी इच्छा होती है। लेकिन क्या सुरक्षा के चलते हम फ्री होकर घूम पाते हैं? मैं सिर्फ अपनी बात नहीं कर रहा मैं उन सभी लोगों की बात कर रहा जिन्हें सुरक्षा मिली है। सुरक्षा कोई स्थाई नहीं है। ये कहना की रावडी वाली फीलिंग्स के लिए सुरक्षा लेकर चलते हैं ये गलत है। सरकार को लगता है कि हम नक्सलियों से लड़ते हैं। नक्सलियों के खिलाफ खुलकर बोलते हैं। इसलिए हमें सुरक्षा दी गई है। जितने लोगों ने सरेंडर किया है उन्हें पहले जेल भेजा जाए। …………………………. इससे संबंधित यह खबर भी पढ़िए… दंतेवाड़ा में छविंद्र कर्मा विवादों में घिरे: पहले कहा था- सलवा जुडूम-2 की तैयारी; बाद में पलटे, बोले- ऐसा नहीं कहा दंतेवाड़ा विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी बनाए गए छविंद्र कर्मा सलवा जुडूम पर दिए अपने बयान को लेकर पलट गए हैं। छविंद्र ने कहा कि मीडिया में जो चल रहा है, वो गलत है। मेरा तात्पर्य ये नहीं था। जबकि इससे पहले दैनिक भास्कर से बातचीत में छविंद्र ने कहा था कि यदि जरूरत पड़ी तो सलवा जुडूम-2 के लिए विचार करूंगा। पढ़ें पूरी खबर…

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