भारत खुद 5वीं पीढ़ी का फाइटर जेट बना रहा:AMCA प्रोजेक्ट पर काम जारी, अमेरिका से F-35 फाइटर जेट की डील पूरी होने में कई दिक्कतें

भारत खुद के 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जो 2-3 साल में पूरा हो जाएगा। रूस भी भारत को यह फाइटर जेट बेचने का ऑफर दे चुका है। रूसी हथियार कंपनी ने बेंगलुरु एयर शो में कहा कि विमान की सप्लाई के अलावा हम भारत में इसका जॉइंट प्रोडक्शन भी करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि इस साल से अमेरिका भारत को कई अरब डॉलर के सैन्य उपकरण बेचेगा। साथ ही एफ-35 स्टील्थ फाइटर्स देने का भी रास्ता साफ करेगा। ट्रम्प ने भले ही भारत को एफ-35 विमान देने की पेशकश कर दी हो, लेकिन इस डील को पटरी पर लाना आसान नहीं होगा। अमेरिका को अपनी संसद कांग्रेस से मंजूरी लेनी होगी। फिर भारत लागत पर विचार करेगा। क्या है AMCA प्रोजेक्ट ? अमेरिकी रक्षा विभाग का सबसे महंगा विमान F-35
F-35 लड़ाकू विमान 5वीं जनरेशन का विमान है। इसे लॉकहीड मार्टिन ने डेवलप किया है। इस प्लेन को 2006 से बनाना शुरू किया गया था। 2015 से यह अमेरिकी वायुसेना का एक अहम हिस्सा है। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के इतिहास में सबसे महंगा विमान F-35 ही है। अमेरिका एक F-35 फाइटर प्लेन पर 82.5 मिलियन डॉलर (करीब 715 करोड़ रुपए) खर्च करता है। अमेरिका की भारत को जैवलिन मिसाइल और स्ट्राइकर टैंक की पेशकश जैवलिन: एंटी टैंक मिसाइल
यह एंटी टैंक हथियार है। अमूमन गुरिल्ला युद्ध में इस्तेमाल करते हैं। ये बेहद सख्त सुरक्षा कवच को भी भेद सकती है। इसे सैनिक कंधे पर रखते ऑपरेट करते हैं। इसकी रेंज 2500 मीटर तक होती है। 160 मीटर की ऊंचाई में भी जा सकती है। इसकी लंबाई 108 सेमी और वजन 22.3 किलो होता है। स्ट्राइकर: सशस्त्र सैन्य वाहन
अमेरिकी स्ट्राइकर 8 व्हील वाला सैन्य वाहन है। इसमें 30 एमएम और 105 एमएम की गन है। ये 100 किमी/घंटे से चल सकता है। लंबाई 22 फीट 10 इंच, चौड़ाई 8 फीट 11 इंच, ऊंचाई 8 फीट 8 इंच है। इसे हेलिकॉप्टर से ऊंची जगह पहुंचा सकते हैं। लद्दाख में ट्रायल हो चुका। ……………………………………………
एयरफोर्स से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… HAL बोला- जल्द होगी तेजस की डिलीवरी: तकनीकी दिक्कत थी, दूर हो गई; एयरफोर्स चीफ की नाराजगी का VIDEO सामने आया था तेजस की डिलिवरी पर एयरफोर्स चीफ की चिंता के बाद हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड (HAL) ने 12 फरवरी को जवाब दिया। HAL ने कहा कि हम जल्द ही वायुसेना को तेजस की डिलीवरी शुरू कर देंगे। HAL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डीके सुनील ने कहा कि डिलिवरी में देरी के पीछे इंडस्ट्री को जिम्मेदार ठहराया जा रहा था, लेकिन यह देरी तकनीकी खामी की वजह से हुई है। अब इसे दूर कर लिया गया है। पूरी खबर पढ़ें…

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