पोप के अंतिम संस्कार की रिहर्सल की खबर:फेफड़ों के इंफेक्शन से जूझ रहे पोप बोले- मेरे बचने की उम्मीद नहीं

कैथोलिक ईसाई धर्मगुरु पोप फ्रांसिस के अंतिम संस्कार की रिहर्सल शुरू हो गई है। रोमन कैथोलिक चर्च के हेडक्वार्टर वेटिकन के मुताबिक पोप ने खुद कहा है कि निमोनिया से उनके बचने की उम्मीद नहीं है। यह दावा स्विस न्यूज पेपर ब्लिक ने किया है। इस खबर के सामने आने के बाद स्विस गार्ड के प्रवक्ता ने इसे अफवाह बताया और कहा कि गार्ड्स अपने सामान्य रूटीन के मुताबिक काम कर रहे हैं। दरअसल 88 साल के पोप फ्रांसिस पिछले हफ्ते से निमोनिया और फेफड़ों के संक्रमण की वजह से रोम के जेमेली अस्पताल में एडमिट हैं। वेटिकन में मौजूदा हालात को गंभीरता से लिया जा रहा है। वेटिकन बोला- पोप की हालत स्थिर
वेटिकन ने गुरुवार को बताया कि पोप की हालात स्थिर है। उनके ब्लड टेस्ट में थोड़ा सुधार दिखाई दे रहा है। CNN ने वेटिकन के एक सोर्स के हवाले से बताया कि पोप अपने बेड से उठकर अस्पताल के कमरे में कुर्सी पर बैठने की हालात में हैं। इससे पहले सोमवार को वेटिकन ने कहा था कि पोप फ्रांसिस को सांस नली में पॉलीमाइक्रोबियल इन्फेक्शन है, जिसकी वजह से उनके मेडिकल ट्रीटमेंट में बदलाव करना पड़ा है। इसके बाद मंगलवार को जारी बयान में कहा गया कि दोनों फेफड़ों में निमोनिया होने के बावजूद पोप फ्रांसिस अच्छे मूड में हैं। जबकि बुधवार को बताया गया था कि पोप की हालत गंभीर बनी हुई है। वेटिकन के प्रवक्ता माटेओ ब्रूनी के मुताबिक पोप फ्रांसिस से उनके सबसे करीबी सहयोगियों के अलावा कोई और मिलने नहीं आया। ब्रूनी ने बताया कि पोप अस्पताल से ही काम कर रहे हैं। पोप से मिलने पहुंचीं मेलोनी, कहा- उनके चेहरे पर मुस्कान है
बुधवार को इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी पोप से मिलने रोम के अस्पताल पहुंचीं। दोनों के बीच करीब 20 मिनट की मुलाकात हुई। मुलाकात के बाद में मेलोनी ने बताया कि पोप की हालत में हल्का सुधार है और चेहरे पर मुस्कान बनी हुई है। मेलोनी ने बताया- पोप और मैने हमेशा की तरह मजाक किया। पोप ने अपना सेंस ऑफ ह्यूमर नहीं खोया है।’ पोप के भर्ती होने के बाद मेलोनी उनसे मिलने वाली पहली नेता हैं। 1000 साल में पोप बनने वाले पहले गैर-यूरोपीय
पोप फ्रांसिस अर्जेंटीना के एक जेसुइट पादरी हैं, वो 2013 में रोमन कैथोलिक चर्च के 266वें पोप बने थे। उन्हें पोप बेनेडिक्ट सोलहवें का उत्तराधिकारी चुना गया था। पोप फ्रांसिस बीते 1000 साल में पहले ऐसे इंसान हैं जो गैर-यूरोपीय होते हुए भी कैथोलिक धर्म के सर्वोच्च पद पर पहुंचे। पोप का जन्म 17 दिसम्बर 1936 को अर्जेंटीना के फ्लोरेस शहर में हुआ था। पोप बनने से पहले उन्होंने जॉर्ज मारियो बर्गोग्लियो नाम से जाना जाता था। पोप फ्रांसिस के दादा-दादी तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी से बचने के लिए इटली छोड़कर अर्जेंटीना चले गए थे। पोप ने अपना ज्यादातर जीवन अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में बिताया है। पोप पर लगा था समलैंगिकों के अपमान का आरोप
पिछले साल पोप पर समलैंगिक पुरुषों को लेकर अभद्र टिप्पणी करने का आरोप लगा था। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि पोप ने समलैंगिक लोगों के लिए इटालियन भाषा के एक बेहद आपत्तिजनक शब्द ‘फैगट’ का इस्तेमाल किया। फैगट शब्द को साधारण तौर पर समलैंगिक पुरुषों के कामुक व्यवहार को बताने के लिए किया जाता है। इसकी LGBTQ समुदाय आलोचना करता रहा है। हालांकि विवाद के बाद पोप फ्रांसिस ने माफी मांग ली थी। तब वेटिकन ने कहा था कि पोप का इरादा किसी को ठेस पहुंचाने का नहीं था। अगर किसी को उनकी बात से ठेस पहुंची है तो वो इसके लिए वे माफी मांगते हैं।

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